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Kangra News: रियाली क्षेत्र में धान की फसल पर वायरस का हमला
Thu, 31 Jul 2025 08:04 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Thu, 31 Jul 2025 08:04 AM IST
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धर्मशाला। फतेहपुर के रियाली क्षेत्र में धान की फसल में बौनेपन की शिकायतों के बाद कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर और कृषि विज्ञान केंद्र कांगड़ा की संयुक्त डायग्नोस्टिक टीम ने प्रभावित खेतों का सर्वेक्षण किया। जांच में धान की फसल में साउदर्न राइस ब्लैक स्ट्रिक्ड ड्वार्फ वायरस के लक्षण पाए गए जो सफेद पीठ वाले फुदके से फैलता है।
रियाली क्षेत्र में धान की पीआर 131, 114, 121, 126, 128, 129, 132 और पीआर 147 शामिल हैं। सर्वे के अनुसार पीआर 131 किस्म सबसे अधिक प्रभावित हुई है। यह रोग विशेष रूप से 25 जून से पहले रोपित फसलों में पाया गया है। पादप रोग विशेषज्ञ डॉ. सुमन कुमार ने किसानों को संक्रमण की रोकथाम के उपाय बताते हुए कहा कि पौधों की नियमित जांच करें, संक्रमित पौधों को खेत से बाहर निकालें और खेतों में जलभराव न होने दें। कीटनाशक दवाओं में इमिडाक्लोप्रिड, फिप्रोनिल, डाइनोटेफ्यूरान और फ्लोनिकैमिड को उचित मात्रा में मिलाकर विशेष नोजल से पौधों के आधार पर छिड़काव करने की सलाह दी गई है। सर्वे के दौरान डॉ. अंजु ठाकुर, डॉ. विशाखा पॉल और फतेहपुर कृषि विभाग की टीम भी मौजूद रही।
वायरस से संक्रमित पौधों में पाए गए लक्षण
पौधे सामान्य आकार से आधे या एक-तिहाई रह गए हैं
पत्तियां गहरे हरे रंग की हैं, जड़ें कमजोर और उथली
अत्यधिक टिल्लरिंग, पर बालियों का न बनना
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रियाली क्षेत्र में धान की पीआर 131, 114, 121, 126, 128, 129, 132 और पीआर 147 शामिल हैं। सर्वे के अनुसार पीआर 131 किस्म सबसे अधिक प्रभावित हुई है। यह रोग विशेष रूप से 25 जून से पहले रोपित फसलों में पाया गया है। पादप रोग विशेषज्ञ डॉ. सुमन कुमार ने किसानों को संक्रमण की रोकथाम के उपाय बताते हुए कहा कि पौधों की नियमित जांच करें, संक्रमित पौधों को खेत से बाहर निकालें और खेतों में जलभराव न होने दें। कीटनाशक दवाओं में इमिडाक्लोप्रिड, फिप्रोनिल, डाइनोटेफ्यूरान और फ्लोनिकैमिड को उचित मात्रा में मिलाकर विशेष नोजल से पौधों के आधार पर छिड़काव करने की सलाह दी गई है। सर्वे के दौरान डॉ. अंजु ठाकुर, डॉ. विशाखा पॉल और फतेहपुर कृषि विभाग की टीम भी मौजूद रही।
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वायरस से संक्रमित पौधों में पाए गए लक्षण
पौधे सामान्य आकार से आधे या एक-तिहाई रह गए हैं
पत्तियां गहरे हरे रंग की हैं, जड़ें कमजोर और उथली
अत्यधिक टिल्लरिंग, पर बालियों का न बनना