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Kangra News: देहरा में कन्या स्कूल के विलय पर बवाल, छात्राओं और अभिभावकों ने खोला मोर्चा

Tue, 24 Feb 2026 06:14 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा Updated Tue, 24 Feb 2026 06:14 AM IST
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Uproar over merger of girls' school in Dehra, students and parents open front
रावमापा (कन्या) देहरा की छात्राएं और अभिभावक स्कूल को रावमापा बाॅयज में मर्ज करने के खिलाफ नारे
देहरागोपीपुर (कांगड़ा)। राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला देहरा को बॉय स्कूल में मर्ज करने के फैसले के विरोध में प्रदर्शन शुरू हो गया। रविवार को छात्राओं और अभिभावकों ने शहीद भुवनेश डोगरा स्टेडियम में एकत्रित होकर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। साथ ही स्पष्ट किया कि यह फैसला न केवल छात्राओं की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है, बल्कि उनके शैक्षणिक भविष्य पर भी गहरा संकट है।
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विरोध का सबसे बड़ा कारण पाठ्यक्रम में बदलाव को बताया जा रहा है। वर्तमान में कन्या विद्यालय हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड से संबद्ध है, जबकि जिस बॉय स्कूल में इसका विलय किया जा रहा है, उसे सीबीएसई में बदला जा रहा है। सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य एसएस परमार और अभिभावकों का तर्क है कि हिमाचल बोर्ड में पढ़ रही छात्राओं पर अचानक सीबीएसई का एडवांस सिलेबस थोपना उनके साथ मानसिक अन्याय होगा। शहर में अलग-अलग बोर्ड के स्कूल रहने से छात्रों के पास विकल्प मौजूद रहता, जो अब खत्म होने की कगार पर है।
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एसएमसी प्रधान विवेक कुमार और अभिभावकों ने कहा कि शहर के केंद्र में स्थित इस स्कूल में दूर-दराज के गांवों की बेटियां खुद को सुरक्षित महसूस करती हैं। अलग कन्या विद्यालय होने के कारण अभिभावक भी निश्चिंत रहते हैं। स्कूल के शानदार बुनियादी ढांचे के बावजूद इसे मर्ज करना तर्कसंगत नहीं है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए इस फैसले को वापस नहीं लिया, तो वे आंदोलन को और उग्र करेंगे।
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हमारा स्कूल विशेष रूप से छात्राओं के लिए है, जो हमें एक सुरक्षित और सहज शैक्षणिक माहौल देता है। जब हमारे स्कूल में पढ़ाई का स्तर उत्कृष्ट है और सभी सुविधाएं मौजूद हैं, तो सरकार को इसे बंद नहीं करना चाहिए। को-एजुकेशन में जाने को लेकर अभिभावकों के मन में सुरक्षा का डर बना रहेगा। -अंशिका, छात्रा
हम लंबे समय से हिमाचल बोर्ड के पैटर्न पर पढ़ाई कर रहे हैं। स्कूल शहर के बीचों-बीच होने के कारण दूर के गांवों से आने वाली लड़कियों के लिए भी यहां पहुंचना सुगम है। अगर यह स्कूल बंद हुआ, तो कई गरीब परिवारों की बेटियों की पढ़ाई पर संकट खड़ा हो जाएगा। -अंजलि, छात्रा

बॉय स्कूल अब पूरी तरह सीबीएसई हो रहा है। विलय होने पर हमारे पास हिमाचल बोर्ड का विकल्प ही खत्म हो जाएगा। अचानक सिलेबस बदलना असंभव होगा और जो लड़कियां सीबीएसई नहीं पढ़ पाएंगी, उन्हें मजबूरी में महंगे निजी स्कूलों का रुख करना पड़ेगा। यह मध्यमवर्गीय परिवारों पर बड़ा आर्थिक बोझ होगा। -निष्ठा, छात्रा
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