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किसानों के समर्थन में उतारा प्रदेश पेंशन बहाली सयुंक्त मोर्चा
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पालमपुर (कांगड़ा)। प्रदेश पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा ने किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत के उस बयान का समर्थन किया है, इसमें उन्होंने सरकार से विधायकों और सांसदों की पेंशन बंद करने के लिए आग्रह किया।
संयुक्त मोर्चा प्रदेशाध्यक्ष प्रवीण शर्मा, राज्य महामंत्री एलडी चौहान, मोर्चा सलाहकार भारत भूषण, राज्य महिला विंग अध्यक्ष रीता शर्मा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष अमर शर्मा, जिला किन्नौर कार्यकारी अध्यक्ष भक्त सिंह नेगी, जिला कांगड़ा अध्यक्ष अरुण कानूनगो, जिला शिमला अध्यक्ष अमृत नेगी, जोगिंद्र सिंह पठानिया, राजेश शर्मा, संजय शर्मा, सुमन और अन्य ने किसान यूनियन प्रवक्ता राकेश टिकैत के पेंशन पर आए बयान का समर्थन किया और कहा कि किसान यूनियन प्रवक्ता ने सही कहा कि नेताओं की पेंशन बंद होनी चाहिए।
यह व्यवस्था जब आम कर्मचारियों से छीन ली है तो फिर नेताओं के लिए यह व्यवस्था अभी भी लागू क्यों हैं । मोर्चा ने कहा कि सच में यह एक भारतीय संविधान का निरादर है, जहां सत्ता सुख भोगने वाले नेता पेंशन लेते हैं पर पीड़ित प्रजा पेंशन से वंचित हैं।
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कहा कि किसानों का आंदोलन और पेंशन बहाली के लिए संयुक्त मोर्चा का आंदोलन बेशक अलग है, लेकिन जब जायज हकों को छीना जाता है तो उस समय वे बातें भी सामने लानी पड़ती हैं, जो संविधान के विरुद्ध हो। कर्मचारी भी किसानों के परिवार का हिस्सा हैं और पीड़ित हैं। उन्हें समानता के हक से वंचित कर दिया गया है। कहा कि किसान यूनियन ने पेंशन रूपी समानता के अधिकार की बात की है तो संयुक्त मोर्चा प्रदेश के किसानों के जायज हकों के समर्थन का एलान करता है और मांग करता है कि किसानों की जायज मांग को जल्द माना जाए।
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संयुक्त मोर्चा प्रदेशाध्यक्ष प्रवीण शर्मा, राज्य महामंत्री एलडी चौहान, मोर्चा सलाहकार भारत भूषण, राज्य महिला विंग अध्यक्ष रीता शर्मा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष अमर शर्मा, जिला किन्नौर कार्यकारी अध्यक्ष भक्त सिंह नेगी, जिला कांगड़ा अध्यक्ष अरुण कानूनगो, जिला शिमला अध्यक्ष अमृत नेगी, जोगिंद्र सिंह पठानिया, राजेश शर्मा, संजय शर्मा, सुमन और अन्य ने किसान यूनियन प्रवक्ता राकेश टिकैत के पेंशन पर आए बयान का समर्थन किया और कहा कि किसान यूनियन प्रवक्ता ने सही कहा कि नेताओं की पेंशन बंद होनी चाहिए।
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यह व्यवस्था जब आम कर्मचारियों से छीन ली है तो फिर नेताओं के लिए यह व्यवस्था अभी भी लागू क्यों हैं । मोर्चा ने कहा कि सच में यह एक भारतीय संविधान का निरादर है, जहां सत्ता सुख भोगने वाले नेता पेंशन लेते हैं पर पीड़ित प्रजा पेंशन से वंचित हैं।
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कहा कि किसानों का आंदोलन और पेंशन बहाली के लिए संयुक्त मोर्चा का आंदोलन बेशक अलग है, लेकिन जब जायज हकों को छीना जाता है तो उस समय वे बातें भी सामने लानी पड़ती हैं, जो संविधान के विरुद्ध हो। कर्मचारी भी किसानों के परिवार का हिस्सा हैं और पीड़ित हैं। उन्हें समानता के हक से वंचित कर दिया गया है। कहा कि किसान यूनियन ने पेंशन रूपी समानता के अधिकार की बात की है तो संयुक्त मोर्चा प्रदेश के किसानों के जायज हकों के समर्थन का एलान करता है और मांग करता है कि किसानों की जायज मांग को जल्द माना जाए।