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Kangra News: मुद्रा लोन लिया, किस्तें चुकाना भूला, अब होगी 4.65 लाख की वसूली
Wed, 09 Sep 2026 03:47 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Wed, 09 Sep 2026 03:47 AM IST
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धर्मशाला। जिला न्यायालय की सिविल जज प्रियंशी की अदालत ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए बैंक के पक्ष में 4,65,018 रुपये की वसूली की डिक्री पारित की है।
अदालत ने प्रतिवादी को मूल बकाया राशि के साथ मुकदमे की लागत और वाद दायर होने की तारीख से वास्तविक वसूली तक छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज का भुगतान करने का आदेश दिया है।
अदालत के समक्ष प्रस्तुत मामले के अनुसार आरोपी ने 16 सितंबर 2022 को प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत व्यवसाय के लिए पांच लाख रुपये के टर्म लोन का आवेदन किया था। बैंक ने आवेदन स्वीकार करते हुए ऋण स्वीकृत किया और 17 सितंबर 2022 को ऋण राशि जारी कर दी।
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ऋण की शर्तों के अनुसार इसे 84 मासिक किस्तों में 8,288 रुपये प्रति माह चुकाया जाना था। ब्याज दर 9.95 प्रतिशत वार्षिक तय की गई थी और भुगतान में चूक होने की स्थिति में अतिरिक्त दंडात्मक ब्याज का भी जानकारी दी गई थी।
अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार ऋण लेने के बाद प्रतिवादी ने बैंकिंग नियमों के अनुरूप भुगतान करना बंद कर दिया और ऋण की अदायगी में चूक हुई। इसके बाद बैंक ने बकाया ऋण की वसूली के लिए न्यायालय का रुख किया।
मामले में न्यायालय द्वारा समन जारी किए जाने के बावजूद प्रतिवादी अदालत में उपस्थित नहीं हुआ और न ही निर्धारित अवधि में अपना लिखित जवाब दाखिल किया। इसके बाद कोर्ट के आदेश के तहत प्रतिवादी को एकतरफा कर दिया गया। बैंक की ओर से शाखा प्रबंधक एवं प्रधान अधिकारी ने साक्ष्य प्रस्तुत किए।
बैंक ने ऋण आवेदन, स्वीकृति पत्र, टर्म लोन एग्रीमेंट, हाइपोथिकेशन एग्रीमेंट, डिमांड प्रोमिसरी नोट, ब्याज समझौता, गारंटी पत्र और कानूनी नोटिस सहित ऋण से संबंधित दस्तावेज अदालत के समक्ष पेश किए। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और रिकॉर्ड के आधार पर बैंक के दावे को स्वीकार करते हुए प्रतिवादी के खिलाफ डिक्री पारित की।
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अदालत ने प्रतिवादी को मूल बकाया राशि के साथ मुकदमे की लागत और वाद दायर होने की तारीख से वास्तविक वसूली तक छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज का भुगतान करने का आदेश दिया है।
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अदालत के समक्ष प्रस्तुत मामले के अनुसार आरोपी ने 16 सितंबर 2022 को प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत व्यवसाय के लिए पांच लाख रुपये के टर्म लोन का आवेदन किया था। बैंक ने आवेदन स्वीकार करते हुए ऋण स्वीकृत किया और 17 सितंबर 2022 को ऋण राशि जारी कर दी।
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ऋण की शर्तों के अनुसार इसे 84 मासिक किस्तों में 8,288 रुपये प्रति माह चुकाया जाना था। ब्याज दर 9.95 प्रतिशत वार्षिक तय की गई थी और भुगतान में चूक होने की स्थिति में अतिरिक्त दंडात्मक ब्याज का भी जानकारी दी गई थी।
अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार ऋण लेने के बाद प्रतिवादी ने बैंकिंग नियमों के अनुरूप भुगतान करना बंद कर दिया और ऋण की अदायगी में चूक हुई। इसके बाद बैंक ने बकाया ऋण की वसूली के लिए न्यायालय का रुख किया।
मामले में न्यायालय द्वारा समन जारी किए जाने के बावजूद प्रतिवादी अदालत में उपस्थित नहीं हुआ और न ही निर्धारित अवधि में अपना लिखित जवाब दाखिल किया। इसके बाद कोर्ट के आदेश के तहत प्रतिवादी को एकतरफा कर दिया गया। बैंक की ओर से शाखा प्रबंधक एवं प्रधान अधिकारी ने साक्ष्य प्रस्तुत किए।
बैंक ने ऋण आवेदन, स्वीकृति पत्र, टर्म लोन एग्रीमेंट, हाइपोथिकेशन एग्रीमेंट, डिमांड प्रोमिसरी नोट, ब्याज समझौता, गारंटी पत्र और कानूनी नोटिस सहित ऋण से संबंधित दस्तावेज अदालत के समक्ष पेश किए। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और रिकॉर्ड के आधार पर बैंक के दावे को स्वीकार करते हुए प्रतिवादी के खिलाफ डिक्री पारित की।