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Kangra News: बच्चों की लंबाई और पढ़ाई पर भारी पड़ सकता है थायराइड
Tue, 26 May 2026 05:24 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Tue, 26 May 2026 05:24 AM IST
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टांडा में जागरूकता कार्यक्रम के दौरान बच्चों के साथ डॉ. अतुल गुप्ता और अन्य। -स्रोत: विभाग
धर्मशाला। बच्चों में तेजी से पैर पसार रहा थायराइड रोग उनके संपूर्ण भविष्य के लिए खतरा बन सकता है। यदि समय रहते इसकी पहचान और सटीक इलाज न शुरू किया जाए तो यह बच्चों की लंबाई (शारीरिक विकास) को रोकने के साथ-साथ उनके मानसिक विकास और पढ़ाई-लिखाई को भी बुरी तरह प्रभावित कर सकता है।
डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय (टांडा) के बाल रोग विभाग में सोमवार को विश्व थायराइड दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम में डॉक्टरों ने इस बीमारी पर चिंता जताई है। पीडियाट्रिक एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. अतुल गुप्ता ने बताया कि टांडा के विशेष एंडोक्राइन क्लिनिक में थायराइड से पीड़ित करीब 300 बच्चों का नियमित उपचार किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि बच्चों में थायराइड दो रूपों में सामने आ रहा है। पहले रूप हाइपोथायरॉयडिज्म के कारण बच्चों की लंबाई कम बढ़ना, वजन का तेजी से बढ़ना, सुस्ती, कब्ज, रूखी त्वचा और अत्यधिक नींद आने जैसी समस्याएं होती हैं, जो सीधे उनकी पढ़ाई को प्रभावित करती हैं। वहीं, हाइपरथायरॉयडिज्म में अचानक वजन घटना, अत्यधिक चंचलता, नींद कम आना, ज्यादा पसीना लगना और आंखें बाहर की ओर निकलना जैसे लक्षण दिखते हैं।
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डॉ. अतुल गुप्ता ने स्पष्ट किया कि इस बीमारी का इलाज पूरी तरह अनुशासन पर निर्भर है। थायराइड की दवाइयां रोजाना तय समय पर और बिना किसी नागा के दी जानी चाहिए। उपचार ले रहे बच्चों का हर तीन महीने में डॉक्टर से फॉलोअप और ब्लड टेस्ट करवाना अनिवार्य है, ताकि शारीरिक विकास के अनुसार दवा की डोज सेट की जा सके।
डॉक्टरों ने बच्चों के मानसिक और थायराइड ग्रंथि के सही विकास के लिए भोजन में केवल आयोडीन युक्त नमक के इस्तेमाल की सलाह दी है।वहीं, बाल रोग विभाग की अध्यक्ष डॉ. सीमा शर्मा और टांडा मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मिलाप शर्मा ने अभिभावकों व स्कूल शिक्षकों से अपील की है कि बच्चों के स्वास्थ्य और उनके व्यवहार में आने वाले असामान्य बदलावों को लेकर सतर्क रहें और तुरंत डॉक्टरी सलाह लें।
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डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय (टांडा) के बाल रोग विभाग में सोमवार को विश्व थायराइड दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम में डॉक्टरों ने इस बीमारी पर चिंता जताई है। पीडियाट्रिक एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. अतुल गुप्ता ने बताया कि टांडा के विशेष एंडोक्राइन क्लिनिक में थायराइड से पीड़ित करीब 300 बच्चों का नियमित उपचार किया जा रहा है।
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उन्होंने बताया कि बच्चों में थायराइड दो रूपों में सामने आ रहा है। पहले रूप हाइपोथायरॉयडिज्म के कारण बच्चों की लंबाई कम बढ़ना, वजन का तेजी से बढ़ना, सुस्ती, कब्ज, रूखी त्वचा और अत्यधिक नींद आने जैसी समस्याएं होती हैं, जो सीधे उनकी पढ़ाई को प्रभावित करती हैं। वहीं, हाइपरथायरॉयडिज्म में अचानक वजन घटना, अत्यधिक चंचलता, नींद कम आना, ज्यादा पसीना लगना और आंखें बाहर की ओर निकलना जैसे लक्षण दिखते हैं।
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डॉ. अतुल गुप्ता ने स्पष्ट किया कि इस बीमारी का इलाज पूरी तरह अनुशासन पर निर्भर है। थायराइड की दवाइयां रोजाना तय समय पर और बिना किसी नागा के दी जानी चाहिए। उपचार ले रहे बच्चों का हर तीन महीने में डॉक्टर से फॉलोअप और ब्लड टेस्ट करवाना अनिवार्य है, ताकि शारीरिक विकास के अनुसार दवा की डोज सेट की जा सके।
डॉक्टरों ने बच्चों के मानसिक और थायराइड ग्रंथि के सही विकास के लिए भोजन में केवल आयोडीन युक्त नमक के इस्तेमाल की सलाह दी है।वहीं, बाल रोग विभाग की अध्यक्ष डॉ. सीमा शर्मा और टांडा मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मिलाप शर्मा ने अभिभावकों व स्कूल शिक्षकों से अपील की है कि बच्चों के स्वास्थ्य और उनके व्यवहार में आने वाले असामान्य बदलावों को लेकर सतर्क रहें और तुरंत डॉक्टरी सलाह लें।