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Kangra News: जयकारों से गूंजी नंदरूल की पहाड़ियां
Thu, 06 Nov 2025 08:00 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Thu, 06 Nov 2025 08:00 AM IST
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जयंती माता मंदिर में अंतिम पंचभीष्म मेले के दाैरान लगी भक्ताें की लगी कतार। स्त्राेत-जागरूक पाठ
कांगड़ा। नंदरूल की पहाड़ियों पर स्थित ऐतिहासिक मां जयंती मंदिर में पंचभीष्म मेले का भक्तिपूर्ण माहौल में बुधवार को समापन हो गया। मेले के अंतिम दिन माता के दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए लगभग 12000 श्रद्धालु मां जयंती के दरबार पहुंचे।
अंतिम दिन होने के कारण मंदिर परिसर में सुबह से ही भक्तों की लंबी-लंबी कतारें लग गईं। श्रद्धालु माता के जयकारे लगाते हुए मंदिर तक पहुंचे। भजन-कीर्तन: मंदिर परिसर में भक्तों द्वारा श्रद्धापूर्वक भजन-कीर्तन का आयोजन भी किया गया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
मंदिर के पुजारी नरेश को शर्मा ने बताया कि इस वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की गई। उन्होंने बताया कि अंतिम दिन मंदिर में लगभग 12 हजार श्रद्धालु माता के चरणों में नतमस्तक हुए और आशीर्वाद प्राप्त किया। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर परिसर में अजय वर्मा परिवार की ओर से विशाल लंगर का आयोजन किया गया।
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मंदिर को जाने वाले रास्ते में भी कई संस्थाओं द्वारा भक्तों के लिए लंगर लगाए गए थे। पुजारी ने बताया कि यह मेला न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है, बल्कि यह क्षेत्र की संस्कृति और लोक परंपरा को भी जीवित रखता है। इस वर्ष पंचभीष्म मेले में प्रदेश के कोने-कोने से भक्त माता के दर्शन के लिए पहुंचे, जिससे श्रद्धालुओं का खासा उत्साह देखा गया।
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अंतिम दिन होने के कारण मंदिर परिसर में सुबह से ही भक्तों की लंबी-लंबी कतारें लग गईं। श्रद्धालु माता के जयकारे लगाते हुए मंदिर तक पहुंचे। भजन-कीर्तन: मंदिर परिसर में भक्तों द्वारा श्रद्धापूर्वक भजन-कीर्तन का आयोजन भी किया गया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
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मंदिर के पुजारी नरेश को शर्मा ने बताया कि इस वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की गई। उन्होंने बताया कि अंतिम दिन मंदिर में लगभग 12 हजार श्रद्धालु माता के चरणों में नतमस्तक हुए और आशीर्वाद प्राप्त किया। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर परिसर में अजय वर्मा परिवार की ओर से विशाल लंगर का आयोजन किया गया।
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मंदिर को जाने वाले रास्ते में भी कई संस्थाओं द्वारा भक्तों के लिए लंगर लगाए गए थे। पुजारी ने बताया कि यह मेला न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है, बल्कि यह क्षेत्र की संस्कृति और लोक परंपरा को भी जीवित रखता है। इस वर्ष पंचभीष्म मेले में प्रदेश के कोने-कोने से भक्त माता के दर्शन के लिए पहुंचे, जिससे श्रद्धालुओं का खासा उत्साह देखा गया।