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Kangra News: धरती ने दिया साथ... आसमान ने छीन ली आस
Wed, 15 Apr 2026 12:45 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Wed, 15 Apr 2026 12:45 AM IST
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धर्मशाला के पास में बारिश के चलते खराब हुई आलू की फसल। अमर उजाला
खास खबर...
आसमान से बरसी आफत... जमीन में ही सड़ने लगे आलू
अप्रैल में लगातार बारिश के साथ खेतों भरे पानी और अधिक नमी के कारण खराब होने लगी आलू की फसल
किसान परेशान- खेत सूखने के बाद फसल निकालने की दी सलाह
अमर उजाला ब्यूरो
धर्मशाला। अप्रैल में लगातार बारिश से किसानों के लिए भारी पड़ने लगी है। मार्च में फसल देखकर किसानों को उम्मीद थी कि उत्पादन अधिक होगा। अब अप्रैल में फसल पूरी तरह तैयार हुई तो खेतों में पानी भर गया और अधिक नमी हो गई। इस कारण तैयार फसल सड़ने लगी है, जिससे किसानों की मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा है। साथ ही उत्पादन और आमदनी पर संकट खड़ा हो दिया है।
वर्तमान में पूरे जिले में आलू की खोदाई का दौर चल रहा है लेकिन लगातार बारिश के चलते खेतों में पानी भर गया है। इससे फसल को निकालना मुश्किल हो गया है और जमीन के भीतर ही आलू खराब होने लगे हैं। कई क्षेत्रों में तो आलू की गुणवत्ता भी प्रभावित हो चुकी है, जिससे बाजार में उचित दाम मिलने की संभावना कम हो गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार आलू की फसल के लिए अत्यधिक नमी नुकसानदायक होती है। अगर समय पर फसल नहीं निकाली गई तो उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है। कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि जैसे ही मौसम साफ हो और खेतों की नमी कम हो, तुरंत फसल निकाल लें। इसके साथ ही पानी की निकासी के उचित प्रबंध करें, ताकि फसल को और नुकसान से बचाया जा सके।
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450 हेक्टेयर भूमि पर होती है खेती
जिला कांगड़ा में करीब 450 हेक्टेयर भूमि पर आलू की फसल उगाई जाती है। हर साल आलू का उत्पादन करीब 5,810 मीट्रिक टन तक होगा। कांगड़ा के बैजनाथ ब्लॉक के छोटा भंगाल की मुल्थान और बरोट चौहार घाटी में आलू की सबसे अधिक फसल तैयार की जाती है। इसके अलावा पामलपुर क्षेत्र में भी काफी फसल लगाई जाती है।
किसान बोले- महंगे बीज खरीदे, अब मूल्य भी नहीं मिलेगा
धर्मशाला के पासू क्षेत्र के किसान चुनी चंद, जोगिंद्र कुमार और साइलेश ने बताया कि जब आलू की फसल बोई थी तो उस समय 40 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बीज खरीदा था। जब फसल तैयार हुई तो लगातार बारिश के कारण आलू सड़ने लगा है। हर 10 में से एक या दो आलू सड़े निकल रहे हैं, जिससे बाकी के आलू भी खराब हो रहे हैं।
इस संकट के समय क्या करें
आलू की फसल निकालने से पहले किसानों को दवाइयों का छिड़काव करना चाहिए, ताकि किसी प्रकार का कीड़ा फसल को नुकसान न पहुंचा सके। फसल निकालने के बाद कोई दवा का इस्तेमाल न करें, जिससे कि सेहत को नुकसान पहुंचे। देसी नुस्खों का इस्तेमाल किसान कर सकते हैं, जैसे फुलणू और सफेदे के पत्ते आलू की फसल में रखें, ताकि कीड़ा लगने का प्रभाव कम हो सके। - कुलदीप धीमान, उपनिदेशक, कृषि विभाग कांगड़ा
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आसमान से बरसी आफत... जमीन में ही सड़ने लगे आलू
अप्रैल में लगातार बारिश के साथ खेतों भरे पानी और अधिक नमी के कारण खराब होने लगी आलू की फसल
किसान परेशान- खेत सूखने के बाद फसल निकालने की दी सलाह
अमर उजाला ब्यूरो
धर्मशाला। अप्रैल में लगातार बारिश से किसानों के लिए भारी पड़ने लगी है। मार्च में फसल देखकर किसानों को उम्मीद थी कि उत्पादन अधिक होगा। अब अप्रैल में फसल पूरी तरह तैयार हुई तो खेतों में पानी भर गया और अधिक नमी हो गई। इस कारण तैयार फसल सड़ने लगी है, जिससे किसानों की मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा है। साथ ही उत्पादन और आमदनी पर संकट खड़ा हो दिया है।
वर्तमान में पूरे जिले में आलू की खोदाई का दौर चल रहा है लेकिन लगातार बारिश के चलते खेतों में पानी भर गया है। इससे फसल को निकालना मुश्किल हो गया है और जमीन के भीतर ही आलू खराब होने लगे हैं। कई क्षेत्रों में तो आलू की गुणवत्ता भी प्रभावित हो चुकी है, जिससे बाजार में उचित दाम मिलने की संभावना कम हो गई है।
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विशेषज्ञों के अनुसार आलू की फसल के लिए अत्यधिक नमी नुकसानदायक होती है। अगर समय पर फसल नहीं निकाली गई तो उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है। कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि जैसे ही मौसम साफ हो और खेतों की नमी कम हो, तुरंत फसल निकाल लें। इसके साथ ही पानी की निकासी के उचित प्रबंध करें, ताकि फसल को और नुकसान से बचाया जा सके।
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450 हेक्टेयर भूमि पर होती है खेती
जिला कांगड़ा में करीब 450 हेक्टेयर भूमि पर आलू की फसल उगाई जाती है। हर साल आलू का उत्पादन करीब 5,810 मीट्रिक टन तक होगा। कांगड़ा के बैजनाथ ब्लॉक के छोटा भंगाल की मुल्थान और बरोट चौहार घाटी में आलू की सबसे अधिक फसल तैयार की जाती है। इसके अलावा पामलपुर क्षेत्र में भी काफी फसल लगाई जाती है।
किसान बोले- महंगे बीज खरीदे, अब मूल्य भी नहीं मिलेगा
धर्मशाला के पासू क्षेत्र के किसान चुनी चंद, जोगिंद्र कुमार और साइलेश ने बताया कि जब आलू की फसल बोई थी तो उस समय 40 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बीज खरीदा था। जब फसल तैयार हुई तो लगातार बारिश के कारण आलू सड़ने लगा है। हर 10 में से एक या दो आलू सड़े निकल रहे हैं, जिससे बाकी के आलू भी खराब हो रहे हैं।
इस संकट के समय क्या करें
आलू की फसल निकालने से पहले किसानों को दवाइयों का छिड़काव करना चाहिए, ताकि किसी प्रकार का कीड़ा फसल को नुकसान न पहुंचा सके। फसल निकालने के बाद कोई दवा का इस्तेमाल न करें, जिससे कि सेहत को नुकसान पहुंचे। देसी नुस्खों का इस्तेमाल किसान कर सकते हैं, जैसे फुलणू और सफेदे के पत्ते आलू की फसल में रखें, ताकि कीड़ा लगने का प्रभाव कम हो सके। - कुलदीप धीमान, उपनिदेशक, कृषि विभाग कांगड़ा

धर्मशाला के पास में बारिश के चलते खराब हुई आलू की फसल। अमर उजाला