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प्रकृति का बिगड़ता संतुलन बड़ी चुनौती, युद्ध भी बढ़ा रहे पर्यावरणीय संकट : प्रो. महावीर

Tue, 17 Mar 2026 05:19 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 17 Mar 2026 05:19 AM IST
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The deteriorating balance of nature is a big challenge, wars are also increasing the environmental crisis: Prof. Mahavir
धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. महावीर सिंह ने कहा कि वैश्विक जलवायु परिवर्तन से प्रकृति का संतुलन तेजी से प्रभावित हो रहा है, वह हम सभी के लिए आत्मचिंतन का विषय है। वैश्विक स्तर पर हो रहे युद्ध न केवल मानवीय क्षति कर रहे हैं, बल्कि इनके विनाशकारी दुष्परिणाम जलवायु परिवर्तन की समस्या को और अधिक भयावह बना रहे हैं।
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प्रो. महावीर सिंह सोमवार को विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय केंद्र मोहली (धर्मशाला) में आपदा प्रबंधन में समसामयिक मुद्दे तथा चुनौतियां विषय पर आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में बतौर मुख्यातिथि बोल रहे थे। उन्होंने अपने संबोधन में प्रो. सिंह ने अतीत और वर्तमान की पर्यावरणीय परिस्थितियों का तुलनात्मक विश्लेषण किया।
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विश्वविद्यालय की भविष्य की रूपरेखा साझा करते हुए प्रो. महावीर ने कहा कि संस्थान में ग्रीन ऊर्जा, साइबर सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और भारतीय ज्ञान परंपरा जैसे क्षेत्रों में विशेष शोध केंद्रों की स्थापना की गई है। इन केंद्रों के माध्यम से महत्वपूर्ण शोध परियोजनाओं पर कार्य किया जाएगा। उन्होंने कहा कि संगोष्ठियों का आयोजन मात्र एक औपचारिकता नहीं होना चाहिए, बल्कि यह विषय विशेषज्ञों के बीच गंभीर विमर्श का एक सशक्त मंच बनना चाहिए।
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कुलपति ने हिमाचल प्रदेश की समृद्ध ग्रामीण संस्कृति, रीति-रिवाजों और इतिहास को संरक्षित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। साथ ही आधुनिक युग में डाटा विज्ञान की उपयोगिता पर विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते हुए क्षेत्रीय केंद्र के बुनियादी ढांचे में सुधार और एक भव्य सेमिनार हॉल के शीघ्र निर्माण का आश्वासन दिया।
इससे पूर्व क्षेत्रीय केंद्र के निदेशक प्रो. कुलदीप अत्री ने सभी अतिथियों का स्वागत किया, जबकि संयोजक प्रो. डीपी वर्मा ने आपदा प्रबंधन की वर्तमान प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। इस संगोष्ठी में विभिन्न जिलों से आए विशेषज्ञों, शोधार्थियों सहित लगभग 180 विद्यार्थी भाग ले रहे हैं।

आपदा प्रबंधन के लिए जनभागीदारी जरूरी : अटवाल
संगोष्ठी की मुख्य वक्ता होम गार्ड्स एवं सिविल डिफेंस विभाग की महानिदेशक सतवंत अटवाल त्रिवेदी ने कुल्लू के मनाली, मंडी के थुनाग और चंबा जिले में आई पिछली प्राकृतिक आपदाओं से जुड़े अपने जमीनी अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि आपदाओं का सामना केवल सरकारी तंत्र के भरोसे नहीं किया जा सकता, इसके लिए समाज की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है। उन्होंने आपदा पूर्व और आपदा के पश्चात महिलाओं की सुरक्षा तथा उनकी भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया और विभाग द्वारा चलाए जा रहे जन-जागरूकता कार्यक्रमों की जानकारी दी।
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