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प्राइमरी स्कूलों में लगातार घट रही नौनिहालों की संख्या
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students strength in schools discreased
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देहरागोपीपुर (कांगड़ा)। प्रदेश सरकार के तमाम कार्यक्रमों के बावजूद प्राइमरी स्कूलों में बच्चों की संख्या लगातार कम हो रही है। उपमंडल देहरा के तहत देहरा, रक्कड़ और डाडासीबा शिक्षा खंडों में कई सरकारी प्राइमरी स्कूलों में बच्चों की संख्या लगातार कम हो रही है। कई स्कूलों में बच्चों की संख्या शून्य है। कुछ स्कूल बच्चों के दाखिले न होने के कारण बंद करने पड़ रहे हैं। कुछ स्कूलों में विद्यार्थी तो हैं, लेकिन वहां एक भी अध्यापक नहीं है। शिक्षा विभाग को संबंधित स्कूलों में प्रतिनियुक्ति पर अध्यापकों को भेजकर काम चलाना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार शिक्षा खंड देहरा के तहत 59 राजकीय प्राथमिक स्कूल हैं। इनमें से 8 स्कूल ऐसे हैं जहां बच्चों की संख्या 10 या उससे कम हैं। इनमें क्योरी, कलरू, दरंग (अंब), केली सेहड़ा, मिठी अंबल, बंजा दा बोड़ू, टिल्लू, झूड़ेबाला स्कूल शामिल हैं। इन सभी स्कूलों में एक-एक अध्यापक कार्यरत हैं। झूड़ेबाला स्कूल में बच्चे की संख्या 10 है, लेकिन यहां पर पढ़ाने के लिए कोई भी अध्यापक नहीं है।
यहां पर विभाग प्रतिनियुक्ति से काम चला रहा है। इसी तरह शिक्षा खंड रक्कड़ में कुल 80 प्राइमरी स्कूल हैं। यहां पर 6 स्कूल ऐसे हैं जिनमें बच्चों की संख्या 10 या इससे कम है। इनमें दोदरू, नौरी, कुरियाल खेड़ा, लड़ोआ, कठियाड़ा और जुरकी स्कूल शामिल हैं। शिक्षा खंड डाडासीबा में कुल 116 सरकारी प्राथमिक स्कूल हैं। यहां पर 22 स्कूल ऐसे हैं जहां पर बच्चों की संख्या 10 या इससे कम है। तीन स्कूल ऐसे हैं जिनमें एक भी छात्र नहीं है और इन स्कूलों में ताला लटका है। इनमें चनौता, सुभाष नगर और जदामन (गुरनवाड़) शामिल हैं। छात्र न होने के कारण बैरी (काहनपुर) स्कूल को बंद कर दिया गया है। बसलाहड़, घमरूर, सुलयाह और अपर गुरनवाड़ में कुछ छात्र तो हैं, लेकिन यहां स्थायी अध्यापक नहीं है।
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----------कोटस---------
प्रदेश सरकार प्रारंभिक शिक्षा में सुधार करने के लिए प्रयासरत है। सरकार की ओर से प्राइमरी स्कूलों में बुनियादी शिक्षा ढांचे का सुधार और अध्यापकों की व्यवस्था करने का प्रयास किया जाएगा।
- गोविंद सिंह ठाकुर, शिक्षा मंत्री, हिमाचल प्रदेश
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जानकारी के अनुसार शिक्षा खंड देहरा के तहत 59 राजकीय प्राथमिक स्कूल हैं। इनमें से 8 स्कूल ऐसे हैं जहां बच्चों की संख्या 10 या उससे कम हैं। इनमें क्योरी, कलरू, दरंग (अंब), केली सेहड़ा, मिठी अंबल, बंजा दा बोड़ू, टिल्लू, झूड़ेबाला स्कूल शामिल हैं। इन सभी स्कूलों में एक-एक अध्यापक कार्यरत हैं। झूड़ेबाला स्कूल में बच्चे की संख्या 10 है, लेकिन यहां पर पढ़ाने के लिए कोई भी अध्यापक नहीं है।
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यहां पर विभाग प्रतिनियुक्ति से काम चला रहा है। इसी तरह शिक्षा खंड रक्कड़ में कुल 80 प्राइमरी स्कूल हैं। यहां पर 6 स्कूल ऐसे हैं जिनमें बच्चों की संख्या 10 या इससे कम है। इनमें दोदरू, नौरी, कुरियाल खेड़ा, लड़ोआ, कठियाड़ा और जुरकी स्कूल शामिल हैं। शिक्षा खंड डाडासीबा में कुल 116 सरकारी प्राथमिक स्कूल हैं। यहां पर 22 स्कूल ऐसे हैं जहां पर बच्चों की संख्या 10 या इससे कम है। तीन स्कूल ऐसे हैं जिनमें एक भी छात्र नहीं है और इन स्कूलों में ताला लटका है। इनमें चनौता, सुभाष नगर और जदामन (गुरनवाड़) शामिल हैं। छात्र न होने के कारण बैरी (काहनपुर) स्कूल को बंद कर दिया गया है। बसलाहड़, घमरूर, सुलयाह और अपर गुरनवाड़ में कुछ छात्र तो हैं, लेकिन यहां स्थायी अध्यापक नहीं है।
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प्रदेश सरकार प्रारंभिक शिक्षा में सुधार करने के लिए प्रयासरत है। सरकार की ओर से प्राइमरी स्कूलों में बुनियादी शिक्षा ढांचे का सुधार और अध्यापकों की व्यवस्था करने का प्रयास किया जाएगा।
- गोविंद सिंह ठाकुर, शिक्षा मंत्री, हिमाचल प्रदेश