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Kangra News: श्रीराम ने तोड़ा शिव धनुष, जयघोष से गूंज उठा झुंग्गा देवी
Wed, 14 Oct 2026 02:25 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Wed, 14 Oct 2026 02:25 AM IST
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फोटो कैप्शन: झुंग्गा देवी में रामलीला के तीसरे दिन सीता स्वयंवर के मंचन के दौरान शिव धनुष तोड़त
- फोटो : Archive
लंबागांव (कांगड़ा)। लंबागांव के झुंग्गा देवी में आयोजित 11 दिवसीय रामलीला के तीसरे दिन मंगलवार को सीता स्वयंवर और श्रीराम-सीता विवाह का मंचन किया गया। कलाकारों ने शानदार प्रस्तुतियों से दर्शकों को रामायण के प्रसंगों से रूबरू करवाया।
रामलीला में ताड़का वध के बाद मिथिलापुरी से संदेश वाहक श्रीराम और लक्ष्मण के पास पहुंचता है। वह उन्हें महाराज जनक की ओर से आयोजित सीता स्वयंवर की जानकारी देता है। इसके बाद महर्षि विश्वामित्र श्रीराम और लक्ष्मण को स्वयंवर में चलने के लिए कहते हैं। स्वयंवर में विभिन्न राज्यों के राजा और राजकुमार सीता से विवाह की इच्छा लेकर पहुंचते हैं।
महाराज जनक की शर्त थी कि जो भी भगवान शिव के धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाने में सफल होगा, सीता का विवाह उसी के साथ किया जाएगा। स्वयंवर में पहुंचे अनेक राजा और राजकुमार पूरी कोशिश करने के बावजूद धनुष को हिला तक नहीं सके। इसके बाद महर्षि विश्वामित्र की आज्ञा से श्रीराम धनुष उठाने के लिए आगे बढ़े और उन्होंने देखते ही देखते शिव धनुष को तोड़ दिया।
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धनुष टूटते ही स्वयंवर स्थल जय श्रीराम के जयघोष से गूंज उठा। इसके बाद माता सीता ने श्रीराम के गले में वरमाला डालकर उन्हें अपने वर के रूप में स्वीकार किया। रामलीला में श्रीराम और माता सीता के विवाह का प्रसंग खुशी और उल्लास के साथ संपन्न हुआ।
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रामलीला में ताड़का वध के बाद मिथिलापुरी से संदेश वाहक श्रीराम और लक्ष्मण के पास पहुंचता है। वह उन्हें महाराज जनक की ओर से आयोजित सीता स्वयंवर की जानकारी देता है। इसके बाद महर्षि विश्वामित्र श्रीराम और लक्ष्मण को स्वयंवर में चलने के लिए कहते हैं। स्वयंवर में विभिन्न राज्यों के राजा और राजकुमार सीता से विवाह की इच्छा लेकर पहुंचते हैं।
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महाराज जनक की शर्त थी कि जो भी भगवान शिव के धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाने में सफल होगा, सीता का विवाह उसी के साथ किया जाएगा। स्वयंवर में पहुंचे अनेक राजा और राजकुमार पूरी कोशिश करने के बावजूद धनुष को हिला तक नहीं सके। इसके बाद महर्षि विश्वामित्र की आज्ञा से श्रीराम धनुष उठाने के लिए आगे बढ़े और उन्होंने देखते ही देखते शिव धनुष को तोड़ दिया।
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धनुष टूटते ही स्वयंवर स्थल जय श्रीराम के जयघोष से गूंज उठा। इसके बाद माता सीता ने श्रीराम के गले में वरमाला डालकर उन्हें अपने वर के रूप में स्वीकार किया। रामलीला में श्रीराम और माता सीता के विवाह का प्रसंग खुशी और उल्लास के साथ संपन्न हुआ।