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Kangra News: आपदा से निपटने का अभ्यास बना खामियों का आईना
Wed, 14 Oct 2026 02:32 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Wed, 14 Oct 2026 02:32 AM IST
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धर्मशाला में भूकंप को लेकर आयोजित मॉक डि्रल में घायल हुए मरीजों की क्षेत्रीय अस्पताल की बेड पर
धर्मशाला। क्षेत्रीय अस्पताल धर्मशाला में मंगलवार को भूकंप से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए मॉक ड्रिल हुई। इस दौरान अस्पताल प्रबंधन की कई गंभीर खामियां उजागर हुईं। आपातकालीन वार्ड में घायलों को लाते समय स्टाफ में तालमेल की भारी कमी दिखी। घायलों को सुरक्षित उठाने के बजाय लापरवाही बरती गई।
आपातकालीन वार्ड के बाहर सुरक्षा कर्मियों को यह तक जानकारी नहीं थी कि किस मरीज को स्ट्रेचर पर ले जाना है और किसे व्हीलचेयर पर। वहीं, आपातकालीन वार्ड के बाहर लगा सालों पुराना फायर अलार्म चालू करते ही जल गया। उससे धुआं निकलने लगा और उसने काम करना बंद कर दिया। इस अलार्म की आवाज भी इतनी धीमी थी कि ओपीडी तक सुनाई नहीं देती। इससे साफ हुआ कि अस्पताल में बिजली उपकरणों की समय पर जांच तक नहीं होती।
मॉक ड्रिल के दौरान फार्मेसी विंग ढहने का काल्पनिक परिदृश्य बनाया गया था। इसमें चार घायलों को इमरजेंसी पहुंचाया गया, जहां एक की मौत दर्शाई गई और तीन का इलाज हुआ।
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वास्तविक मरीजों को न हो परेशानी, दिए निर्देश
ड्रिल के दौरान कर्मचारियों को आपदा के समय ''झुको, ढको और पकड़े रहो'' के नियम समझाए गए। साथ ही निर्देश दिए गए कि अभ्यास के दौरान ओपीडी और अन्य वार्डों में भर्ती वास्तविक मरीजों के उपचार में किसी तरह की बाधा नहीं आनी चाहिए।
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मॉक ड्रिल के दौरान सामने आई सभी खामियों को दूर किया जाएगा। पुराने फायर अलार्म की जगह अब नया इंटीग्रेटेड अलार्म लगाया जाएगा। अभ्यास में दिखी कमियों पर टीम के साथ चर्चा होगी ताकि भविष्य में ऐसी गलतियां दोबारा न हों। -डॉ. अनुराधा शर्मा, एमएस, क्षेत्रीय अस्पताल धर्मशाला
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आपातकालीन वार्ड के बाहर सुरक्षा कर्मियों को यह तक जानकारी नहीं थी कि किस मरीज को स्ट्रेचर पर ले जाना है और किसे व्हीलचेयर पर। वहीं, आपातकालीन वार्ड के बाहर लगा सालों पुराना फायर अलार्म चालू करते ही जल गया। उससे धुआं निकलने लगा और उसने काम करना बंद कर दिया। इस अलार्म की आवाज भी इतनी धीमी थी कि ओपीडी तक सुनाई नहीं देती। इससे साफ हुआ कि अस्पताल में बिजली उपकरणों की समय पर जांच तक नहीं होती।
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मॉक ड्रिल के दौरान फार्मेसी विंग ढहने का काल्पनिक परिदृश्य बनाया गया था। इसमें चार घायलों को इमरजेंसी पहुंचाया गया, जहां एक की मौत दर्शाई गई और तीन का इलाज हुआ।
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वास्तविक मरीजों को न हो परेशानी, दिए निर्देश
ड्रिल के दौरान कर्मचारियों को आपदा के समय ''झुको, ढको और पकड़े रहो'' के नियम समझाए गए। साथ ही निर्देश दिए गए कि अभ्यास के दौरान ओपीडी और अन्य वार्डों में भर्ती वास्तविक मरीजों के उपचार में किसी तरह की बाधा नहीं आनी चाहिए।
मॉक ड्रिल के दौरान सामने आई सभी खामियों को दूर किया जाएगा। पुराने फायर अलार्म की जगह अब नया इंटीग्रेटेड अलार्म लगाया जाएगा। अभ्यास में दिखी कमियों पर टीम के साथ चर्चा होगी ताकि भविष्य में ऐसी गलतियां दोबारा न हों। -डॉ. अनुराधा शर्मा, एमएस, क्षेत्रीय अस्पताल धर्मशाला

धर्मशाला में भूकंप को लेकर आयोजित मॉक डि्रल में घायल हुए मरीजों की क्षेत्रीय अस्पताल की बेड पर