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Kangra News: जिले के जोखिमपूर्ण गांवों में टीबी का खतरा सबसे ज्यादा
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धर्मशाला। जिले में टीबी उन्मूलन अभियान के तहत अति-संवेदनशील व जोखिमपूर्ण गांवों में चलाए जा रहे सघन जांच अभियान के दौरान बीमारी का बड़ा दायरा सामने आया है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से चिह्नित 969 जोखिमपूर्ण गांवों में से अब तक 480 गांवों में स्क्रीनिंग पूरी कर ली गई है। इसमें 1,244 लोग टीबी से संक्रमित पाए गए हैं। अभी जिले के करीब 50 फीसदी चिह्नित गांवों में जांच प्रक्रिया बाकी है। ऐसे में आने वाले दिनों में नए मरीजों की संख्या में और इजाफा होना स्वाभाविक है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें इन संवेदनशील क्षेत्रों में घर-घर दस्तक देकर लोगों की स्क्रीनिंग कर रही हैं। संदिग्ध लक्षण दिखने पर तुरंत बलगम और अन्य आवश्यक नमूने लेकर जांच करवाई जा रही है।
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580 शिविरों में 66 हजार से अधिक के एक्स-रे
''टीबी मुक्त भारत अभियान 2.0'' के तहत स्वास्थ्य विभाग अब तक जिले भर में 580 विशेष शिविर आयोजित कर चुका है। इस दौरान 66,503 लोगों के छाती के डिजिटल एक्स-रे किए गए। टीबी के लक्षण वाले 28,999 संदिग्धों की सीबी-नॉट जांच करवाई गई। इनमें से 1,244 लोगों में संक्रमण की पुष्टि होने के बाद उन्हें तत्काल दवाइयां उपलब्ध करवाई गई हैं। हालांकि, जिले में पर्याप्त संख्या में निक्षय मित्र न मिलने के कारण सभी जरूरतमंद मरीजों तक मासिक पोषण सहायता किट नहीं पहुंच पा रही है।
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टीबी एक संक्रामक रोग है और समय रहते पहचान न होने पर यह अन्य लोगों में तेजी से फैल सकता है। इसी को देखते हुए जोखिमपूर्ण गांवों में जांच के साथ-साथ लक्षण दिखने पर तुरंत अस्पताल पहुंचने के लिए जागरूक किया जा रहा है। -डॉ. राजेश सूद, जिला टीबी उन्मूलन एवं जिला स्वास्थ्य अधिकारी, कांगड़ा
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580 शिविरों में 66 हजार से अधिक के एक्स-रे
''टीबी मुक्त भारत अभियान 2.0'' के तहत स्वास्थ्य विभाग अब तक जिले भर में 580 विशेष शिविर आयोजित कर चुका है। इस दौरान 66,503 लोगों के छाती के डिजिटल एक्स-रे किए गए। टीबी के लक्षण वाले 28,999 संदिग्धों की सीबी-नॉट जांच करवाई गई। इनमें से 1,244 लोगों में संक्रमण की पुष्टि होने के बाद उन्हें तत्काल दवाइयां उपलब्ध करवाई गई हैं। हालांकि, जिले में पर्याप्त संख्या में निक्षय मित्र न मिलने के कारण सभी जरूरतमंद मरीजों तक मासिक पोषण सहायता किट नहीं पहुंच पा रही है।
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टीबी एक संक्रामक रोग है और समय रहते पहचान न होने पर यह अन्य लोगों में तेजी से फैल सकता है। इसी को देखते हुए जोखिमपूर्ण गांवों में जांच के साथ-साथ लक्षण दिखने पर तुरंत अस्पताल पहुंचने के लिए जागरूक किया जा रहा है। -डॉ. राजेश सूद, जिला टीबी उन्मूलन एवं जिला स्वास्थ्य अधिकारी, कांगड़ा
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