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Kangra News: नूरपुर में यूजीसी एक्ट के नए नियमों के खिलाफ सवर्ण समाज ने निकाली रैली
Tue, 10 Feb 2026 05:31 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Tue, 10 Feb 2026 05:31 AM IST
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नूरपुर में यूजीसी के नए नियमों के विरोध में रैली निकालने के बाद नायब तहसीलदार के माध्यम से राष्
नूरपुर (कांगड़ा)। यूजीसी एक्ट-2026 के नए नियमों के विरोध में सोमवार को सवर्ण समाज नूरपुर में सड़क पर उतर आया। सैकड़ों लोगों ने ऐतिहासिक चौगान बाजार से संयुक्त कार्यालय भवन (लघु सचिवालय) तक रोष रैली निकाली और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इसके बाद स्थानीय नायब तहसीलदार के माध्यम से राष्ट्रपति को एक ज्ञापन सौंपा, जिसकी प्रतियां प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को भी प्रेषित कीं।
सवर्ण समाज के प्रतिनिधियों में शेखर पठानिया और राजेश पठानिया ने कहा कि सरकार एक ओर जाति विहीन समाज की बात करती है, लेकिन दूसरी ओर ऐसे कानून लाए जा रहे हैं जो समाज में आपसी वैमनस्यता और जातिगत खाई को गहरा करते हैं। उन्होंने यूजीसी एक्ट 2026 की तत्काल पुनर्समीक्षा करने और शैक्षणिक संस्थानों में भयमुक्त वातावरण सुनिश्चित करने की मांग उठाई।
प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार से मांग की कि समता समिति में सामान्य वर्ग के प्रतिनिधियों को भी अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए। साथ ही एससी/एसटी और ओबीसी जैसे शब्दों के स्थान पर भेदभाव शब्द को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया जाए। इसके अलावा मांग उठाई की नियमों का दुरुपयोग कर झूठी शिकायत दर्ज कराने वालों के खिलाफ कड़ी सजा का प्रावधान किया जाए। ऐसा कानून बनाया जाए जो सामाजिक एकता को बढ़ावा दें न कि आपसी मतभेदों को।
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सवर्ण समाज के नेताओं ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी इस एक्ट की संवेदनशीलता को देखते हुए फिलहाल इस पर रोक लगाई है। उन्होंने केंद्र सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि इन विवादित नियमों को तुरंत निरस्त नहीं किया गया, तो आने वाले समय में आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा।
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सवर्ण समाज के प्रतिनिधियों में शेखर पठानिया और राजेश पठानिया ने कहा कि सरकार एक ओर जाति विहीन समाज की बात करती है, लेकिन दूसरी ओर ऐसे कानून लाए जा रहे हैं जो समाज में आपसी वैमनस्यता और जातिगत खाई को गहरा करते हैं। उन्होंने यूजीसी एक्ट 2026 की तत्काल पुनर्समीक्षा करने और शैक्षणिक संस्थानों में भयमुक्त वातावरण सुनिश्चित करने की मांग उठाई।
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प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार से मांग की कि समता समिति में सामान्य वर्ग के प्रतिनिधियों को भी अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए। साथ ही एससी/एसटी और ओबीसी जैसे शब्दों के स्थान पर भेदभाव शब्द को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया जाए। इसके अलावा मांग उठाई की नियमों का दुरुपयोग कर झूठी शिकायत दर्ज कराने वालों के खिलाफ कड़ी सजा का प्रावधान किया जाए। ऐसा कानून बनाया जाए जो सामाजिक एकता को बढ़ावा दें न कि आपसी मतभेदों को।
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सवर्ण समाज के नेताओं ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी इस एक्ट की संवेदनशीलता को देखते हुए फिलहाल इस पर रोक लगाई है। उन्होंने केंद्र सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि इन विवादित नियमों को तुरंत निरस्त नहीं किया गया, तो आने वाले समय में आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा।