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Kangra News: विद्युत विधेयक के विरोध में की आवाज बुलंद
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शाहपुर (कांगड़ा)। हिमाचल प्रदेश बिजली बोर्ड के कर्मचारियों, इंजीनियरों और पेंशनभोगियों ने प्रस्तावित विद्युत (संशोधन) विधेयक 2025 के प्रति विरोध जताया। वीरवार को कर्मचारियों, इंजीनियरों और पेंशनभोगियों की संयुक्त कार्रवाई समिति की ओर से शाहपुर में सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस दौरान समिति ने विधेयक को वापस लेने और बिजली को एक सामाजिक अधिकार के रूप में मान्यता देने की मांग उठाई। इसके अलावा निजीकरण पर पूर्ण रोक, संघीय शक्तियों की सुरक्षा और क्रॉस-सब्सिडी को बनाए रखने की भी मांग की गई।
कर्मचारी अभियंता की राष्ट्रीय समन्वय समिति के संयोजक सुदीप दत्ता ने कहा कि बिजली संशोधन विधेयक के खिलाफ 12 फरवरी को राष्ट्रीय स्तर हड़ताल की जाएगी। उन्होंने कहा कि विद्युत अधिनियम, 2003 के 22 वर्ष बीत जाने के बावजूद वितरण उपयोगिताओं का संचयी घाटा 26,000 करोड़ से बढ़कर 6.9 लाख करोड़ रुपये हो गया है। इसके बावजूद भारत सरकार ने 2014 से बिजली अधिनियम में संशोधन को आगे बढ़ाने का लगातार प्रयास किया है।
उन्होंने कहा कि विधेयक का एक प्रमुख प्रावधान प्रतिस्पर्धा और उपभोक्ता की पसंद की आड़ में एक ही क्षेत्र में एक सामान्य सार्वजनिक नेटवर्क का उपयोग करके कई वितरण लाइसेंसधारियों को अनुमति देता है। हिमाचल प्रदेश के संदर्भ में इससे निजी कंपनियों को बद्दी, नालागढ़, काला अंब जैसे उच्च राजस्व वाले औद्योगिक क्षेत्रों को चुनने की अनुमति मिल जाएगी, जबकि बिजली बोर्ड को कम राजस्व वाले ग्रामीण और घरेलू उपभोक्ताओं की सेवा करने के लिए छोड़ दिया जाएगा। वर्तमान में बिजली बोर्ड का लगभग 64 फीसदी राजस्व औद्योगिक क्षेत्रों से आता है। जॉइंट एक्शन कमेटी के सहसंयोजक हीरा लाल वर्मा ने कहा तथाकथित कैरिज और कंटेंट्स का अलग करना मॉडल क्रॉस-सब्सिडी तंत्र को नष्ट कर देगा। सार्वजनिक उपयोगिताओं को भी कमजोर कर देगा। बिजली संशोधन बिल 2025 से सीधा-सीधा बिजली बोर्ड के निजीकरण का रास्ता प्रशस्त होगा।
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कर्मचारी अभियंता की राष्ट्रीय समन्वय समिति के संयोजक सुदीप दत्ता ने कहा कि बिजली संशोधन विधेयक के खिलाफ 12 फरवरी को राष्ट्रीय स्तर हड़ताल की जाएगी। उन्होंने कहा कि विद्युत अधिनियम, 2003 के 22 वर्ष बीत जाने के बावजूद वितरण उपयोगिताओं का संचयी घाटा 26,000 करोड़ से बढ़कर 6.9 लाख करोड़ रुपये हो गया है। इसके बावजूद भारत सरकार ने 2014 से बिजली अधिनियम में संशोधन को आगे बढ़ाने का लगातार प्रयास किया है।
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उन्होंने कहा कि विधेयक का एक प्रमुख प्रावधान प्रतिस्पर्धा और उपभोक्ता की पसंद की आड़ में एक ही क्षेत्र में एक सामान्य सार्वजनिक नेटवर्क का उपयोग करके कई वितरण लाइसेंसधारियों को अनुमति देता है। हिमाचल प्रदेश के संदर्भ में इससे निजी कंपनियों को बद्दी, नालागढ़, काला अंब जैसे उच्च राजस्व वाले औद्योगिक क्षेत्रों को चुनने की अनुमति मिल जाएगी, जबकि बिजली बोर्ड को कम राजस्व वाले ग्रामीण और घरेलू उपभोक्ताओं की सेवा करने के लिए छोड़ दिया जाएगा। वर्तमान में बिजली बोर्ड का लगभग 64 फीसदी राजस्व औद्योगिक क्षेत्रों से आता है। जॉइंट एक्शन कमेटी के सहसंयोजक हीरा लाल वर्मा ने कहा तथाकथित कैरिज और कंटेंट्स का अलग करना मॉडल क्रॉस-सब्सिडी तंत्र को नष्ट कर देगा। सार्वजनिक उपयोगिताओं को भी कमजोर कर देगा। बिजली संशोधन बिल 2025 से सीधा-सीधा बिजली बोर्ड के निजीकरण का रास्ता प्रशस्त होगा।
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