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Kangra News: टांडा मेडिकल कॉलेज में रेडियोथेरेपी सेवाएं ठप, मरीज परेशान
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कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश के दूसरे सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान टांडा मेडिकल कॉलेज के कैंसर विभाग में पिछले लगभग 15 दिन से रेडियोथेरेपी मशीन बंद पड़ी है। इसका कारण मशीन की तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि उसे संचालित करने वाले दोनों टेक्नीशियनों की अनुपस्थिति है। दोनों टेक्नीशियन एक साथ मैटरनिटी और पैटरनिटी अवकाश पर चले गए हैं, जिससे कैंसर मरीजों को उपचार में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। प्रबंधन की ओर से मरीजों को एक नवंबर तक प्रतीक्षा करने के लिए कहा गया है।
यदि तब तक टेक्नीशियन वापस नहीं लौटे तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। टांडा मेडिकल कॉलेज में रोजाना करीब 15 कैंसर मरीज रेडियोथेरेपी के लिए आते हैं, लेकिन सेवाएं बंद होने से उन्हें निराश लौटना पड़ रहा है। रेडियोथेरेपी एक महत्वपूर्ण उपचार विधि है, जिसमें कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने या उनकी वृद्धि को धीमा करने के लिए उच्च-ऊर्जा विकिरण (जैसे एक्स-रे) का उपयोग किया जाता है। यह उपचार अकेले या सर्जरी और कीमोथेरेपी के साथ मिलकर दिया जा सकता है। इसका असर धीरे-धीरे दिखता है और उपचार खत्म होने के बाद भी इसका प्रभाव जारी रहता है। वर्तमान में रेडियोथेरेपी के क्षेत्र में थ्री-डी कंफॉर्मल रेडियोथेरेपी, इंटेंसिटी-मॉड्यूलेटेड रेडियोथेरेपी और इमेज-गाइडेड रेडियोथेरेपी जैसी अत्याधुनिक तकनीक उपयोग में लाई जा रही हैं। मरीजों और तीमारदारों ने मांग की है कि अस्पताल प्रशासन वैकल्पिक व्यवस्था करे जिससे उपचार में देरी के कारण किसी की जान पर बन न आए।
टांडा मेडिकल कॉलज में रेडियोथेरेपी मशीन ताे ठीक है, पर इसकाे ऑपरेट करने वाले दाेनाें टेक्नीशियन पैटरनिटी और मैटरनिटी छुट्टी पर हैं। इसके बारे में उच्चाधिकारियाें और सरकार काे लिखित में भेज दिया है। इसमें हमने रेडियोथेरेपी मशीन काे ऑपरेट करने वाले तकनीशियन की मांग की है, जिससे मरीजाें काे परेशानी न हाे।
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-डॉ. अपूर्व व्यास, टांडा मेडिकल कॉलेज, कैंसर विभाग
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यदि तब तक टेक्नीशियन वापस नहीं लौटे तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। टांडा मेडिकल कॉलेज में रोजाना करीब 15 कैंसर मरीज रेडियोथेरेपी के लिए आते हैं, लेकिन सेवाएं बंद होने से उन्हें निराश लौटना पड़ रहा है। रेडियोथेरेपी एक महत्वपूर्ण उपचार विधि है, जिसमें कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने या उनकी वृद्धि को धीमा करने के लिए उच्च-ऊर्जा विकिरण (जैसे एक्स-रे) का उपयोग किया जाता है। यह उपचार अकेले या सर्जरी और कीमोथेरेपी के साथ मिलकर दिया जा सकता है। इसका असर धीरे-धीरे दिखता है और उपचार खत्म होने के बाद भी इसका प्रभाव जारी रहता है। वर्तमान में रेडियोथेरेपी के क्षेत्र में थ्री-डी कंफॉर्मल रेडियोथेरेपी, इंटेंसिटी-मॉड्यूलेटेड रेडियोथेरेपी और इमेज-गाइडेड रेडियोथेरेपी जैसी अत्याधुनिक तकनीक उपयोग में लाई जा रही हैं। मरीजों और तीमारदारों ने मांग की है कि अस्पताल प्रशासन वैकल्पिक व्यवस्था करे जिससे उपचार में देरी के कारण किसी की जान पर बन न आए।
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टांडा मेडिकल कॉलज में रेडियोथेरेपी मशीन ताे ठीक है, पर इसकाे ऑपरेट करने वाले दाेनाें टेक्नीशियन पैटरनिटी और मैटरनिटी छुट्टी पर हैं। इसके बारे में उच्चाधिकारियाें और सरकार काे लिखित में भेज दिया है। इसमें हमने रेडियोथेरेपी मशीन काे ऑपरेट करने वाले तकनीशियन की मांग की है, जिससे मरीजाें काे परेशानी न हाे।
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-डॉ. अपूर्व व्यास, टांडा मेडिकल कॉलेज, कैंसर विभाग