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Kangra News: बंगाल हिंसा के विरोध में प्रदर्शन, राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग
Sun, 20 Apr 2025 07:05 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Sun, 20 Apr 2025 07:05 AM IST
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डीसी कार्यालय परिसर में प्रदर्शन करते विश्व हिंदू परिसर के सदस्य। -संवाद
धर्मशाला। बंगाल में हो रही हिंसा के विरोध में विश्व हिंदू परिषद इकाई कांगड़ा के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने शनिवार को धर्मशाला स्थित डीसी कार्यालय परिसर में प्रदर्शन किया। इस दौरान परिषद की ओर से जिला प्रशासन के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा गया।
ज्ञापन में बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाने, कानून व्यवस्था का संचालन केंद्रीय सुरक्षा बलों को सौंपने और हिंसा की जांच एनआईए से करवाने की मांग की गई है। साथ ही दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग भी की गई।
विश्व हिंदू परिषद कांगड़ा के प्रधान राजेंद्र बड़जात्या ने कहा कि वक्फ कानून के विरोध की आड़ में संपूर्ण बंगाल को हिंसा की आग में झोंका जा रहा है। हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है, जबकि राष्ट्र विरोधी ताकतें खुलकर काम कर रही हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि स्थिति नियंत्रण से बाहर होने से पहले कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी अपने हाथ में ले और ऐसे तत्वों पर कठोर कार्रवाई करे।
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उन्होंने बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें निष्कासित करने और बंगाल-बांग्लादेश की 450 किलोमीटर सीमा पर तारबंदी का कार्य शुरू करने की मांग भी उठाई। इस अवसर पर तरुण, रवि, मोहिंद्र सिंह, प्रिया, अदिति, सोनाली, अमित समेत अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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ज्ञापन में बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाने, कानून व्यवस्था का संचालन केंद्रीय सुरक्षा बलों को सौंपने और हिंसा की जांच एनआईए से करवाने की मांग की गई है। साथ ही दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग भी की गई।
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विश्व हिंदू परिषद कांगड़ा के प्रधान राजेंद्र बड़जात्या ने कहा कि वक्फ कानून के विरोध की आड़ में संपूर्ण बंगाल को हिंसा की आग में झोंका जा रहा है। हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है, जबकि राष्ट्र विरोधी ताकतें खुलकर काम कर रही हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि स्थिति नियंत्रण से बाहर होने से पहले कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी अपने हाथ में ले और ऐसे तत्वों पर कठोर कार्रवाई करे।
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उन्होंने बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें निष्कासित करने और बंगाल-बांग्लादेश की 450 किलोमीटर सीमा पर तारबंदी का कार्य शुरू करने की मांग भी उठाई। इस अवसर पर तरुण, रवि, मोहिंद्र सिंह, प्रिया, अदिति, सोनाली, अमित समेत अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।