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Kangra News: संपत्ति पर हक स्पष्ट नहीं, 90 लाख और गहने देने से अदालत का इन्कार
Mon, 28 Sep 2026 08:21 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Mon, 28 Sep 2026 08:21 AM IST
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धर्मशाला। पुलिस द्वारा जब्त 90 लाख रुपये और गहनों पर वादी का मालिकाना हक साबित नहीं हो पाया है। इसके चलते अदालत ने यह संपत्ति वादी को सुपुर्दगी पर सौंपने से इन्कार कर दिया है। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी-द्वितीय देहरा गौरव चौधरी की अदालत ने वादी की अर्जी खारिज कर दी। कोर्ट ने नकदी को बैंक एफडी में जमा करवाने के निर्देश दिए हैं।
साथ ही सोने-हीरे के आभूषणों को बैंक लॉकर में सुरक्षित रखने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि आवेदक इस स्तर पर संपत्ति पर अपना निर्विवाद कानूनी अधिकार स्थापित नहीं कर पाया है। यह मामला पुलिस थाना रक्कड़ में 29 जून 2026 को दर्ज एफआईआर संख्या 36/2026 से जुड़ा है। इसमें भारतीय न्याय संहिता की धारा 316(2) और 61(2) के तहत केस दर्ज किया गया था।
वादी ने ससुराल पक्ष पर उसकी संपत्ति छुपाने का आरोप लगाया था। पुलिस ने जांच के दौरान 90 लाख रुपये की नकदी, 801 अमेरिकी डॉलर और बड़ी संख्या में सोने-हीरे के जेवरात बरामद किए थे। वादी ने कोर्ट में अर्जी देकर दावा किया कि जब्त संपत्ति उसकी है। साक्ष्य के तौर पर उसने आयकर रिटर्न, जेवरात के बिल और चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) का प्रमाण पत्र पेश किया।
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वहीं आरोपियों ने वादी के इस दावे का कड़ा विरोध किया। अदालत ने पाया कि कई आभूषणों के बिलों में पूरा विवरण दर्ज नहीं है। कई बिल वादी की पत्नी के नाम पर पाए गए। बरामद गहनों और पेश बिलों के बीच सीधा संबंध भी साबित नहीं हो सका। कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि कीमती धातुओं और पत्थरों की विशेषज्ञ जांच अभी बाकी है।
सीए के प्रमाण पत्र में भी स्पष्ट था कि नकदी के स्रोत और उपयोग का स्वतंत्र सत्यापन नहीं हुआ है। लिहाजा, नकदी व विदेशी मुद्रा के स्रोत को प्रमाणित नहीं माना जा सकता। अदालत ने पूरी नकदी और डॉलर को अदालत के नाम पर किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में एफडी करवाने तथा आभूषणों को बैंक लॉकर में रखने के आदेश दिए। पुलिस को एक सप्ताह में यह प्रक्रिया पूरी कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। बिना कोर्ट की अनुमति न तो एफडी भुनाई जाएगी और न ही लॉकर खोला जाएगा।
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साथ ही सोने-हीरे के आभूषणों को बैंक लॉकर में सुरक्षित रखने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि आवेदक इस स्तर पर संपत्ति पर अपना निर्विवाद कानूनी अधिकार स्थापित नहीं कर पाया है। यह मामला पुलिस थाना रक्कड़ में 29 जून 2026 को दर्ज एफआईआर संख्या 36/2026 से जुड़ा है। इसमें भारतीय न्याय संहिता की धारा 316(2) और 61(2) के तहत केस दर्ज किया गया था।
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वादी ने ससुराल पक्ष पर उसकी संपत्ति छुपाने का आरोप लगाया था। पुलिस ने जांच के दौरान 90 लाख रुपये की नकदी, 801 अमेरिकी डॉलर और बड़ी संख्या में सोने-हीरे के जेवरात बरामद किए थे। वादी ने कोर्ट में अर्जी देकर दावा किया कि जब्त संपत्ति उसकी है। साक्ष्य के तौर पर उसने आयकर रिटर्न, जेवरात के बिल और चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) का प्रमाण पत्र पेश किया।
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वहीं आरोपियों ने वादी के इस दावे का कड़ा विरोध किया। अदालत ने पाया कि कई आभूषणों के बिलों में पूरा विवरण दर्ज नहीं है। कई बिल वादी की पत्नी के नाम पर पाए गए। बरामद गहनों और पेश बिलों के बीच सीधा संबंध भी साबित नहीं हो सका। कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि कीमती धातुओं और पत्थरों की विशेषज्ञ जांच अभी बाकी है।
सीए के प्रमाण पत्र में भी स्पष्ट था कि नकदी के स्रोत और उपयोग का स्वतंत्र सत्यापन नहीं हुआ है। लिहाजा, नकदी व विदेशी मुद्रा के स्रोत को प्रमाणित नहीं माना जा सकता। अदालत ने पूरी नकदी और डॉलर को अदालत के नाम पर किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में एफडी करवाने तथा आभूषणों को बैंक लॉकर में रखने के आदेश दिए। पुलिस को एक सप्ताह में यह प्रक्रिया पूरी कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। बिना कोर्ट की अनुमति न तो एफडी भुनाई जाएगी और न ही लॉकर खोला जाएगा।