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पर्यावरण के लिए प्लास्टिक कचरा सबसे बड़ी चुनौती : डॉ. धर्म सिंह
Sun, 09 Mar 2025 12:07 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Sun, 09 Mar 2025 12:07 AM IST
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धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय क्षेत्रीय केंद्र धर्मशाला में पर्यावरण इतिहास पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कांफ्रेंस संपन्न हुई। इसमें समापन समारोह में डॉ. धर्म सिंह प्रधान वैज्ञानिक सीएसआईआर पालमपुर मुख्य वक्ता रहे। कार्यक्रम अध्यक्ष प्रो. कुलदीप अत्री ने मुख्य वक्ता को सम्मानित किया। डॉ. धर्म सिंह ने पर्यावरण संरक्षण में विज्ञान की भूमिका पर वक्तव्य प्रस्तुत किया।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण प्रदूषण के लिए सबसे ज्यादा चुनौती पृथ्वी पर बढ़ते हुए प्लास्टिक और कचरा पदार्थ से है। कचरा प्रबंधन के लिए वैज्ञानिक विधियां बहुत सहायक हैं। उन्होंने कहा कि पृथ्वी पर पर्यावरण प्रदूषण को कम करने के लिए पर्यावरण विज्ञान विषय के अंतर्गत शोध कार्यों का लाभ उठाना चाहिए। कान्फ्रेंस के संयोजक डॉ. राजकुमार ने बताया कि भारत के पर्यावरण इतिहास पर पुनरावलोकन मुख्य: मुद्दे और चुनौतियां विषय पर आधारित दो दिवसीय कान्फ्रेंस हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला के रूसा इक्विटी इनीशिएटिव हेड के अंतर्गत वित्त प्रायोजित है। इस कान्फ्रेंस में 150 से ज्यादा विद्वानों और शोधार्थियों ने शोध पत्र प्रस्तुत किए।
आयोजन सचिव राजेंद्र शर्मा ने राष्ट्रीय कांफ्रेंस को सफल बनाने के लिए विश्वविद्यालय प्रबंधन एवं क्षेत्रीय केंद्र धर्मशाला की आयोजन समिति के सदस्य, इतिहास विभाग के विद्यार्थियों और कान्फ्रेंस में भाग लेने वाले समस्त विद्वानों और शोधार्थियों का आभार जताया। निदेशक प्रो. कुलदीप अत्री और मुख्य वक्ता डॉ. धर्म सिंह नए समापन समारोह में शोध पत्र प्रस्तुत करने वाले विद्वानों और इतिहास विषय पर शोध पत्र प्रस्तुत करने वाले 101 विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र भी वितरित किए। इस कान्फ्रेंस में दो दिन तक का 150 से ज्यादा विद्वानों और विद्यार्थियों ने शोध पत्र प्रस्तुत किए।
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उन्होंने कहा कि पर्यावरण प्रदूषण के लिए सबसे ज्यादा चुनौती पृथ्वी पर बढ़ते हुए प्लास्टिक और कचरा पदार्थ से है। कचरा प्रबंधन के लिए वैज्ञानिक विधियां बहुत सहायक हैं। उन्होंने कहा कि पृथ्वी पर पर्यावरण प्रदूषण को कम करने के लिए पर्यावरण विज्ञान विषय के अंतर्गत शोध कार्यों का लाभ उठाना चाहिए। कान्फ्रेंस के संयोजक डॉ. राजकुमार ने बताया कि भारत के पर्यावरण इतिहास पर पुनरावलोकन मुख्य: मुद्दे और चुनौतियां विषय पर आधारित दो दिवसीय कान्फ्रेंस हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला के रूसा इक्विटी इनीशिएटिव हेड के अंतर्गत वित्त प्रायोजित है। इस कान्फ्रेंस में 150 से ज्यादा विद्वानों और शोधार्थियों ने शोध पत्र प्रस्तुत किए।
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आयोजन सचिव राजेंद्र शर्मा ने राष्ट्रीय कांफ्रेंस को सफल बनाने के लिए विश्वविद्यालय प्रबंधन एवं क्षेत्रीय केंद्र धर्मशाला की आयोजन समिति के सदस्य, इतिहास विभाग के विद्यार्थियों और कान्फ्रेंस में भाग लेने वाले समस्त विद्वानों और शोधार्थियों का आभार जताया। निदेशक प्रो. कुलदीप अत्री और मुख्य वक्ता डॉ. धर्म सिंह नए समापन समारोह में शोध पत्र प्रस्तुत करने वाले विद्वानों और इतिहास विषय पर शोध पत्र प्रस्तुत करने वाले 101 विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र भी वितरित किए। इस कान्फ्रेंस में दो दिन तक का 150 से ज्यादा विद्वानों और विद्यार्थियों ने शोध पत्र प्रस्तुत किए।
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