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Kangra News: पंचायत प्रतिनिधियों को नहीं पता कैसे सुलझाएं कलह-कलेश के मामले
Thu, 28 Nov 2024 05:26 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Thu, 28 Nov 2024 05:26 AM IST
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खास खबर....
पुलिस की ओर से पंचायतों को भेजे रास्ता रोकेने, थप्पड़ मारने और जुआ खेलने के 400 मामले लंबित
मामले न सुलझने से नौकरी और अन्य क्षेत्रों के लिए आवेदन नहीं कर पा रहे आरोपी
तनुज सैणी
धर्मशाला। गांवों में होने वाले छोटे कलह-कलेश को कैसे सुलझाया जाए, इसकी जानकारी पंचायत प्रतिनिधियों को नहीं है। जमीन के लिए जाने वाले रास्ते को रोकना, पशुओं से क्रूरता, थप्पड़ मारने और जुआ से संबंधित मामले पुलिस थानों दर्ज तो होते हैं, लेकिन इन्हें सुलझाने के लिए पंचायतों को भेजा जाता है।
ऐसे मामलों को सुलझाने की जानकारी न होने के चलते जिला कांगड़ा में इन मामलों की सूची बढ़ती जा रही है। इतना ही नहीं ऐसे छोटे-छोटे मामले न सुलझने के कारण केसों में आरोपी बनाए नौकरी अथवा अन्य क्षेत्रों में आवेदन भी नहीं कर पा रहे हैं। इस वर्ष ही जिला में कांगड़ा पुलिस की ओर से विभिन्न पुलिस थानों में ऐसे 442 मामले सुलझाने के लिए पंंचायतों को भेजे हैं, लेकिन मात्र 42 मामलों को ही सुलझाया जा सका है।
ग्राम प्रतिनिधियों को मध्यस्थता और आम सहमति बनाकर समुदाय के सदस्यों के बीच स्थानीय विवादों और संघर्षों को सुलझाने के लिए शक्तियां प्रदान की गई हैं। पुलिस थानों में दर्ज गांवों में आए दिन होने वाले छोटे-छोटे लड़ाई झगड़ों में प्रारंभिक तौर पर एफआईआर तो दर्ज की जाती है, लेकिन इन्हें ग्राम स्तर पर ही निपटाने के लिए भेज दिया जाता है। ऐसे मामलों को निपटाने के लिए समय भी निर्धारित होता है। बावजूद इसके पंचायत प्रतिनिधियों को शक्तियों की पूरी जानकारी न होना और ऑर्डर लिखने की जानकारी न होने के कारण ऐसे मामले लटकते जा रहे हैं। लंबे समय से ऐसे मामले पंचायतों में लटके होनेे के कारण पुलिस को भी इनकी मौजूदा स्थिति को ट्रैक करने में परेशानी होती है।
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वहीं, मामलों में पंचायत स्तर पर कोई कार्रवाई न होने के कारण शिकायतकर्ता का भी कानून से भरोसा उठता है, जबकि मामले के आरोपियों को भी हौसला आता है, कि उन पर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं हुई है। उधर, एसपी कांगड़ा शालिनी अग्निहोत्री ने बताया कि पंचायतों को रास्ता रोकने, थप्पड़ मारने, पशु क्रूरता और जुए से संबंधित थानों में दर्ज मामले सुलझाने के लिए भेजे जाते हैं। लंबे समय से ऐसे मामले लंबित पड़े हुए हैं। जिला कांगड़ा में 31 अक्तूबर 2024 तक 442 ऐसे मामले भेजे थे जिनमें से मात्र 42 ही सुलझ पाए हैं।
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पुलिस की ओर से पंचायतों को भेजे रास्ता रोकेने, थप्पड़ मारने और जुआ खेलने के 400 मामले लंबित
मामले न सुलझने से नौकरी और अन्य क्षेत्रों के लिए आवेदन नहीं कर पा रहे आरोपी
तनुज सैणी
धर्मशाला। गांवों में होने वाले छोटे कलह-कलेश को कैसे सुलझाया जाए, इसकी जानकारी पंचायत प्रतिनिधियों को नहीं है। जमीन के लिए जाने वाले रास्ते को रोकना, पशुओं से क्रूरता, थप्पड़ मारने और जुआ से संबंधित मामले पुलिस थानों दर्ज तो होते हैं, लेकिन इन्हें सुलझाने के लिए पंचायतों को भेजा जाता है।
ऐसे मामलों को सुलझाने की जानकारी न होने के चलते जिला कांगड़ा में इन मामलों की सूची बढ़ती जा रही है। इतना ही नहीं ऐसे छोटे-छोटे मामले न सुलझने के कारण केसों में आरोपी बनाए नौकरी अथवा अन्य क्षेत्रों में आवेदन भी नहीं कर पा रहे हैं। इस वर्ष ही जिला में कांगड़ा पुलिस की ओर से विभिन्न पुलिस थानों में ऐसे 442 मामले सुलझाने के लिए पंंचायतों को भेजे हैं, लेकिन मात्र 42 मामलों को ही सुलझाया जा सका है।
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ग्राम प्रतिनिधियों को मध्यस्थता और आम सहमति बनाकर समुदाय के सदस्यों के बीच स्थानीय विवादों और संघर्षों को सुलझाने के लिए शक्तियां प्रदान की गई हैं। पुलिस थानों में दर्ज गांवों में आए दिन होने वाले छोटे-छोटे लड़ाई झगड़ों में प्रारंभिक तौर पर एफआईआर तो दर्ज की जाती है, लेकिन इन्हें ग्राम स्तर पर ही निपटाने के लिए भेज दिया जाता है। ऐसे मामलों को निपटाने के लिए समय भी निर्धारित होता है। बावजूद इसके पंचायत प्रतिनिधियों को शक्तियों की पूरी जानकारी न होना और ऑर्डर लिखने की जानकारी न होने के कारण ऐसे मामले लटकते जा रहे हैं। लंबे समय से ऐसे मामले पंचायतों में लटके होनेे के कारण पुलिस को भी इनकी मौजूदा स्थिति को ट्रैक करने में परेशानी होती है।
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वहीं, मामलों में पंचायत स्तर पर कोई कार्रवाई न होने के कारण शिकायतकर्ता का भी कानून से भरोसा उठता है, जबकि मामले के आरोपियों को भी हौसला आता है, कि उन पर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं हुई है। उधर, एसपी कांगड़ा शालिनी अग्निहोत्री ने बताया कि पंचायतों को रास्ता रोकने, थप्पड़ मारने, पशु क्रूरता और जुए से संबंधित थानों में दर्ज मामले सुलझाने के लिए भेजे जाते हैं। लंबे समय से ऐसे मामले लंबित पड़े हुए हैं। जिला कांगड़ा में 31 अक्तूबर 2024 तक 442 ऐसे मामले भेजे थे जिनमें से मात्र 42 ही सुलझ पाए हैं।