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नारद के श्राप पर नारायण ने त्रेतायुग में लिया था राम का अवतार : शिवकुमार
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धर्मशाला। नारद के श्राप के चलते नारायण ने त्रेतायुग में राम का अवतार लिया था, साथ ही जो शिव के गण थे उन्हें दानव योनि में जन्म लेना पड़ा था। यह बात लक्ष्मी नारायण मंदिर कैंट रोड धर्मशाला में आयोजित राम कथा के चौथे दिन पं शिव कुमार ने कही। इस अवसर पर भगवान राम के बाल रूप की एक सुंदर झांकी भी प्रस्तुत की गई और महामंडलेश्वर मां सुमन राणा आनंद गिरी के नेतृत्व में सभी राम भक्तों नें खू आंनद मनाया और जम कर गीत मल्हार भी गए।
पंडित ने कहा कि एक बार ब्रह्मश्री नारद को खुद के माध्यम से किए गए कार्य के चलते अभिमान हो गया। अभिमान को तोड़ने के लिए लोक का निर्माण कर राजा की अति सुंदर कन्या विश्व मोहनी की रचना भी कर डाली। नारद उस कन्या पर मोहित हो गए। इसके बाद कन्या के पिता ने स्वयंवर रख दिया। नारद हरी के पास पहुंचकर उन्हें एक सुंदर राजकुमार का रूप देकर स्वयंवर में जाने को कहा। नारद का वानर रूप देखकर लोग हंसने लगे और शिव के गणों ने अपना चेहरा आईने में देखने को कहा। जब नारद ने अपना चेहरा जल में देखा तो क्रोधित होकर शिव के गणों को राक्षस योनि में पैदा होने का श्राप दिया। साथ ही हरी को भी त्रेतायुग में जन्म लेकर अपनी पत्नि के वियोग में भटकते हुए वन वन भटकने का श्राप दिया। नारद ने हरि को त्रेतायुग में नारद के वानर रूप लेकर उनकी सहायता लेने का श्राप भी दिया।
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पंडित ने कहा कि एक बार ब्रह्मश्री नारद को खुद के माध्यम से किए गए कार्य के चलते अभिमान हो गया। अभिमान को तोड़ने के लिए लोक का निर्माण कर राजा की अति सुंदर कन्या विश्व मोहनी की रचना भी कर डाली। नारद उस कन्या पर मोहित हो गए। इसके बाद कन्या के पिता ने स्वयंवर रख दिया। नारद हरी के पास पहुंचकर उन्हें एक सुंदर राजकुमार का रूप देकर स्वयंवर में जाने को कहा। नारद का वानर रूप देखकर लोग हंसने लगे और शिव के गणों ने अपना चेहरा आईने में देखने को कहा। जब नारद ने अपना चेहरा जल में देखा तो क्रोधित होकर शिव के गणों को राक्षस योनि में पैदा होने का श्राप दिया। साथ ही हरी को भी त्रेतायुग में जन्म लेकर अपनी पत्नि के वियोग में भटकते हुए वन वन भटकने का श्राप दिया। नारद ने हरि को त्रेतायुग में नारद के वानर रूप लेकर उनकी सहायता लेने का श्राप भी दिया।
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