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Kangra News: रिटायर नहीं, रीस्टार्ट... श्रेष्ठा ने शुरू किया स्वाद का उद्यम
Mon, 27 Oct 2025 05:16 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Mon, 27 Oct 2025 05:16 AM IST
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लंबागांव की 63 वर्षीय श्रेष्ठा देवी अपने उत्पादों के साथ। - संवाद
लंबागांव। डिजिटल युग की भाग-दौड़ में जहां अधिकतर लोग विशेषकर महिलाएं अपना खाली समय मोबाइल की स्क्रीन पर बिताने में व्यस्त हैं। वहीं लंबागांव की 63 वर्षीय श्रेष्ठा देवी ने एक नई मिसाल कायम की है। जिस उम्र में लोग रिटायरमेंट की सोचते हैं, श्रेष्ठा देवी ने रीस्टार्ट बटन दबाया और स्वाद का उद्यम शुरू कर दिया।
श्रेष्ठा साधन-संपन्न परिवार से हैं। उन्होंने समय को व्यर्थ नहीं गंवाया बल्कि 2023 में स्वयं सहायता समूहों से प्रशिक्षण लेकर अपने घर से ही नींबू, कटहल, आम के अचार, चंबा चुख और चटनी बनाने का काम शुरू किया। हार्ट और थायराइड जैसी बीमारियों से जूझते हुए भी उनकी लगन और गुणवत्ता पर ध्यान देने की रणनीति ने उन्हें न केवल आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि वह आज प्रतिमाह हजारों रुपये कमाकर अन्य महिलाओं के लिए एक प्रेरणादायक स्रोत भी बन गई हैं।
उनकी अथक मेहनत और लगन का परिणाम है कि उनके उत्पादों की मांग अब स्थानीय बाजारों के साथ-साथ आस-पास के क्षेत्रों में भी बढ़ती जा रही है। श्रेष्ठा देवी का मानना है कि इस कार्य को शुरू करने के लिए किसी बड़ी पूंजी या विशेष साधन की नहीं, बल्कि सिर्फ लगन, सही समय के उपयोग और उत्पादों की गुणवत्ता पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
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उन्होंने कहा कि समय की कीमत समझना बहुत जरूरी है। मोबाइल पर समय गंवाने से बेहतर इसका उपयोग सही दिशा में करना चाहिए, ताकि घर की आय में बढ़ोतरी हो और आत्मसंतोष भी मिल सके। गांव की अन्य महिलाएं भी अब श्रेष्ठा देवी से प्रेरणा लेकर उनके बनाए उत्पादों की तरह अपने घरों में लघु उद्योग शुरू करने की योजना बना रही हैं।
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श्रेष्ठा साधन-संपन्न परिवार से हैं। उन्होंने समय को व्यर्थ नहीं गंवाया बल्कि 2023 में स्वयं सहायता समूहों से प्रशिक्षण लेकर अपने घर से ही नींबू, कटहल, आम के अचार, चंबा चुख और चटनी बनाने का काम शुरू किया। हार्ट और थायराइड जैसी बीमारियों से जूझते हुए भी उनकी लगन और गुणवत्ता पर ध्यान देने की रणनीति ने उन्हें न केवल आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि वह आज प्रतिमाह हजारों रुपये कमाकर अन्य महिलाओं के लिए एक प्रेरणादायक स्रोत भी बन गई हैं।
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उनकी अथक मेहनत और लगन का परिणाम है कि उनके उत्पादों की मांग अब स्थानीय बाजारों के साथ-साथ आस-पास के क्षेत्रों में भी बढ़ती जा रही है। श्रेष्ठा देवी का मानना है कि इस कार्य को शुरू करने के लिए किसी बड़ी पूंजी या विशेष साधन की नहीं, बल्कि सिर्फ लगन, सही समय के उपयोग और उत्पादों की गुणवत्ता पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
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उन्होंने कहा कि समय की कीमत समझना बहुत जरूरी है। मोबाइल पर समय गंवाने से बेहतर इसका उपयोग सही दिशा में करना चाहिए, ताकि घर की आय में बढ़ोतरी हो और आत्मसंतोष भी मिल सके। गांव की अन्य महिलाएं भी अब श्रेष्ठा देवी से प्रेरणा लेकर उनके बनाए उत्पादों की तरह अपने घरों में लघु उद्योग शुरू करने की योजना बना रही हैं।