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Kangra News: मनरेगा सोशल ऑडिट कर्मी भी लड़ सकेंगे पंचायत चुनाव
Tue, 05 May 2026 06:03 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Tue, 05 May 2026 06:03 AM IST
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देहरागोपीपुर (कांगड़ा)। प्रदेश में होने वाले पंचायत चुनावों को लेकर मनरेगा के सोशल ऑडिट कार्य से जुड़े कर्मियों के लिए राहत भरी खबर है। पंचायती राज विभाग ने स्पष्ट किया है कि ब्लॉक रिसोर्स पर्सन (बीआरपी) और विलेज रिसोर्स पर्सन (वीआरपी) अब बिना किसी रोक-टोक के चुनाव लड़ सकेंगे।
विभाग द्वारा जारी स्पष्टीकरण के अनुसार, ये कर्मी नियमित सरकारी कर्मचारी की श्रेणी में नहीं आते हैं। हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 122 (1) (जी) के तहत केवल सरकारी, अनुबंध या अंशकालिक कर्मचारियों के चुनाव लड़ने पर पाबंदी है। चूंकि सोशल ऑडिट कर्मी आवश्यकतानुसार आकस्मिक (कैजुअल) आधार पर सेवाएं देते हैं, इसलिए उनका पद लाभ के पद के दायरे में नहीं आता है।
विभाग ने इस संबंध में राज्य चुनाव आयोग, सभी उपायुक्तों और खंड विकास अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए हैं, ताकि नामांकन के समय किसी प्रकार का भ्रम न रहे। जिला पंचायत अधिकारी कांगड़ा सचिन ठाकुर ने पुष्टि करते हुए बताया कि विभाग का पत्र प्राप्त हो चुका है और इस बारे में संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भेज दिए गए हैं। इस फैसले से अब मनरेगा के तहत काम करने वाले सैकड़ों युवाओं के लिए चुनावी राजनीति में उतरने का रास्ता साफ हो गया है।
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विभाग द्वारा जारी स्पष्टीकरण के अनुसार, ये कर्मी नियमित सरकारी कर्मचारी की श्रेणी में नहीं आते हैं। हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 122 (1) (जी) के तहत केवल सरकारी, अनुबंध या अंशकालिक कर्मचारियों के चुनाव लड़ने पर पाबंदी है। चूंकि सोशल ऑडिट कर्मी आवश्यकतानुसार आकस्मिक (कैजुअल) आधार पर सेवाएं देते हैं, इसलिए उनका पद लाभ के पद के दायरे में नहीं आता है।
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विभाग ने इस संबंध में राज्य चुनाव आयोग, सभी उपायुक्तों और खंड विकास अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए हैं, ताकि नामांकन के समय किसी प्रकार का भ्रम न रहे। जिला पंचायत अधिकारी कांगड़ा सचिन ठाकुर ने पुष्टि करते हुए बताया कि विभाग का पत्र प्राप्त हो चुका है और इस बारे में संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भेज दिए गए हैं। इस फैसले से अब मनरेगा के तहत काम करने वाले सैकड़ों युवाओं के लिए चुनावी राजनीति में उतरने का रास्ता साफ हो गया है।
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