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एक ही मकान में अलग कमरे में रहना भी घरेलू हिंसा : कोर्ट

Tue, 22 Sep 2026 07:58 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा Updated Tue, 22 Sep 2026 07:58 AM IST
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Living in a separate room within the same house also constitutes domestic violence: Court
धर्मशाला। एक ही छत के नीचे रहते हुए पत्नी से दूरी बनाकर अलग कमरे में रहना भी घरेलू हिंसा के दायरे में आता है। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी धर्मशाला डॉ. हकीकत ढांडा की अदालत ने इस व्यवस्था के साथ एक महत्वपूर्ण फैसले में पति को अपनी पत्नी को हर माह सात हजार रुपये देने का आदेश दिया है।
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अदालत ने स्पष्ट किया कि साक्ष्यों से यह साबित होता है कि महिला पति की उपेक्षा के चलते अलग रहने को विवश हुई। अदालत ने पति को निर्देश दिया कि वह पत्नी को प्रति माह दो हजार रुपये आवास के एवज में और पांच हजार रुपये भरण-पोषण के लिए प्रदान करे। साथ ही अदालत ने पति को पत्नी के खिलाफ किसी भी तरह की घरेलू हिंसा करने से स्थायी तौर पर रोक दिया है।
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मामले के अनुसार पालमपुर क्षेत्र की पीड़िता ने पति, सास, ससुर और ननद के खिलाफ घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत शिकायत दर्ज करवाई थी। पीड़िता की शादी 17 नवंबर 2020 को हुई थी। आरोप था कि विवाह के करीब दो माह बाद ही ससुराल में कम दहेज लाने के ताने दिए जाने लगे और मार्च 2022 से पति उसी मकान में अलग कमरे में रहने लगा।
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अदालत ने पति व अन्य द्वारा आरोपों से इनकार करने की दलीलों की समीक्षा के बाद पति के खिलाफ आदेश पारित किया। हालांकि, ससुर, सास और ननद के खिलाफ घरेलू हिंसा की किसी विशिष्ट घटना का ठोस साक्ष्य न मिलने पर उनके खिलाफ लगे आरोप खारिज कर दिए गए।
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