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हरियाणा की तरह हिमाचल में भी रिपीट हो सकती थी सरकार : धवाला
Thu, 10 Oct 2024 04:40 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Thu, 10 Oct 2024 04:40 AM IST
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ज्वालामुखी(कांगड़ा)। पूर्व मंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता रमेश धवाला की ज्वाला फिर से फूट पड़ी है। धवाला ने हरियाणा में भाजपा के लगातार तीसरी बार सरकार रिपीट करने पर त्वरित टिप्पणी करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश में भी भाजपा की सरकार रिपीट कर सकती थी, परंतु संगठन के कुछ पदाधिकारी और नेताओं की बदौलत ऐसा न हो पाया। कई नेताओं के टिकट काट दिए गए तो कई लोगों को यहां से वहां चुनाव लड़ने के लिए भेज दिया गया। इस वजह से भाजपा का सारा संतुलन बिगड़ गया और सरकार के रिपीट करने का सपना धरा का धरा रह गया।
उन्होंने बताया कि हरियाणा में ओबीसी और अनुसूचित जाति वर्ग ने भाजपा की सरकार को लगातार तीसरी बार सत्ता के द्वार तक पहुंचा, लेकिन हिमाचल प्रदेश में ऐसा न हो पाया। ओबीसी और अनुसूचित जाति वर्ग के नेताओं को उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया। उन्होंने अपना उदाहरण पेश करते हुए बताया कि वर्ष 1998 में उन्होंने कांग्रेस से समर्थन वापस लेकर भाजपा की सरकार अपने वोट से बनाई और पूरे 5 साल तक भाजपा की सरकार प्रदेश में पहली बार प्रोफेसर प्रेम कुमार धूमल के नेतृत्व में चलाई।
इतना ही नहीं उन्होंने करोड़ों रुपए के ऑफर को ठुकरा कर भाजपा का साथ दिया। पार्टी के लिए मार तक खाई, उनका अपहरण तक हुआ, परंतु उन्होंने पार्टी के सच्चे सिपाही की तरह पार्टी का साथ न छोड़ा। परंतु पिछले पांच साल भाजपा की सरकार में उन्होंने जलालत में व्यतीत किए हैं। उन्होंने पांच साल ज्वालामुखी विधानसभा क्षेत्र में काम किया और चुनाव से ठीक 20 दिन पहले उन्हें देहरा टिकट देकर भेज दिया गया, उन्होंने पार्टी हाई कमान को बहुत पहले ही सूचित किया था कि यदि उन्हें कहीं और भेजना है तो छह महीने पहले जानकारी दे देना, ताकि वह वहां पर अपनी जमीन सुधार सके परंतु 20 दिन पहले उन्हें देहरा का टिकट देकर ज्वालामुखी से भेज दिया गया। परंतु फिर भी देहरा की जनता के ऋणी है उन्होंने 17,000 से अधिक वोट देकर उन्हें मान सम्मान दिया।
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उन्होंने बताया कि हरियाणा में ओबीसी और अनुसूचित जाति वर्ग ने भाजपा की सरकार को लगातार तीसरी बार सत्ता के द्वार तक पहुंचा, लेकिन हिमाचल प्रदेश में ऐसा न हो पाया। ओबीसी और अनुसूचित जाति वर्ग के नेताओं को उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया। उन्होंने अपना उदाहरण पेश करते हुए बताया कि वर्ष 1998 में उन्होंने कांग्रेस से समर्थन वापस लेकर भाजपा की सरकार अपने वोट से बनाई और पूरे 5 साल तक भाजपा की सरकार प्रदेश में पहली बार प्रोफेसर प्रेम कुमार धूमल के नेतृत्व में चलाई।
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इतना ही नहीं उन्होंने करोड़ों रुपए के ऑफर को ठुकरा कर भाजपा का साथ दिया। पार्टी के लिए मार तक खाई, उनका अपहरण तक हुआ, परंतु उन्होंने पार्टी के सच्चे सिपाही की तरह पार्टी का साथ न छोड़ा। परंतु पिछले पांच साल भाजपा की सरकार में उन्होंने जलालत में व्यतीत किए हैं। उन्होंने पांच साल ज्वालामुखी विधानसभा क्षेत्र में काम किया और चुनाव से ठीक 20 दिन पहले उन्हें देहरा टिकट देकर भेज दिया गया, उन्होंने पार्टी हाई कमान को बहुत पहले ही सूचित किया था कि यदि उन्हें कहीं और भेजना है तो छह महीने पहले जानकारी दे देना, ताकि वह वहां पर अपनी जमीन सुधार सके परंतु 20 दिन पहले उन्हें देहरा का टिकट देकर ज्वालामुखी से भेज दिया गया। परंतु फिर भी देहरा की जनता के ऋणी है उन्होंने 17,000 से अधिक वोट देकर उन्हें मान सम्मान दिया।
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