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Kangra News: सस्ती और असरदार खाद को छोड़ 12-32-16 के लिए लग रही दौड़
Mon, 21 Oct 2024 04:26 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Mon, 21 Oct 2024 04:26 AM IST
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धर्मशाला। खेती के लिए किसान आए दिन नए-नए उपकरण अपना रहे हैं, लेकिन सालों से पुरानी खाद को ही फसलों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। किसान आज भी गेहूं की फसल के लिए इफको की एनपीके 12-32-16 खाद का ही इस्तेमाल कर रहे हैं। जबकि गेहूं की पैदावार के लिए इफको की डीएपी 18-46-0 खाद ज्यादा बेहतर और असरदार है। 12-32-16 खाद के मुकाबले डीएपी 18-46-0 खाद में नाइट्रोजन और फास्फोरस की मात्रा अधिक होने के कारण फसलों की पैदावार ज्यादा होती है।
इसके अलावा डीएपी 18-46-0 खाद में क्रेंद सरकार की ओर से सब्सिडी भी ज्यादा है और इसका दाम भी 12-32-16 खाद के मुकाबले कम है। डीएपी 18-46-0 खाद की एक बोरी का दाम 1,300 रुपये के करीब है, जबकि एनपीके 12-32-16 खाद के दाम 1,420 रुपये हैं। जिला कांगड़ा के इंदौरा और नूरपुर क्षेत्र के किसान ही केवल इस डीएपी 18-46-0 खाद का इस्तेमाल कर रहे हैं और अन्य क्षेत्रों में किसानों को इसके बारे में पता ही नहीं है, जिससे इसकी हिमांड भी कम है।
जानकारी के अनुसार पंजाब और हरियाणा के अधिकतर किसान गेहूं की बिजाई करते समय इसी खाद का इस्तेमाल करते हैं। दोनों राज्यों में इसकी डिमांड अधिक होने के कारण आपूर्ति भी पूरी नहीं हो पाती है, लेकिन हिमाचल प्रदेश में इसकी डिमांड जानकारी न होने के कारण कम है।
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दोनों में ये है अंतर
डाई-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) खाद में नाइट्रोजन और फास्फोरस दोनों होते हैं, जो प्राथमिक मैक्रो-पोषक तत्व हैं। डीएपी में 18 फीसदी नाइट्रोजन और 46 फीसदी फॉस्फोरस होता है। वहीं, इफको की एनपीके 12-32-16 खाद में 12 फीसदी नाइट्रोजन, 32 फीसदी फास्फेट और 16 फीसदी पोटाक्स होता है।
जानकारी के अनुसार इस समय धान की कटाई और थ्रेसिंग का कार्य चला हुआ है। इसके बाद प्रदेशभर में गेहूं की बिजाई करने का कार्य शुरू हो जाएगा। बिजाई के समय ही खेतों में अच्छी पैदावार के लिए इफको की इस खाद का इस्तेमाल किया जाता है। यह खाद के इस्तेमाल से गेहूं को जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं, जिससे फसल अच्छी होती है।
- किसान गेहूं की बिजाई के समय डीएपी 18-46-0 खाद की बजाय आज भी एनपीके 12-32-16 खाद ही इस्तेमाल कर रहे हैं। जबकि डीएपी 18-46-0 खाद में नाइट्रोजन और अन्य तत्व ज्यादा मात्रा में हैं, जिससे फसल अच्छी होती है। डीएपी 18-46-0 खाद के दाम 12-32-16 के कम हैं और सब्सिडी भी ज्यादा है। जिले भर में 12-32-16 और डीएपी 18-46-0 खाद की सप्लाई जरूरत के हिसाब से पहुंचाई जा रही है, जिससे की समय पर किसानों को खाद के लिए परेशान न होना पड़े।
- प्रदीप कुमार, क्षेत्रीय प्रबंधक, हिमफेड जिला कांगड़ा
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इसके अलावा डीएपी 18-46-0 खाद में क्रेंद सरकार की ओर से सब्सिडी भी ज्यादा है और इसका दाम भी 12-32-16 खाद के मुकाबले कम है। डीएपी 18-46-0 खाद की एक बोरी का दाम 1,300 रुपये के करीब है, जबकि एनपीके 12-32-16 खाद के दाम 1,420 रुपये हैं। जिला कांगड़ा के इंदौरा और नूरपुर क्षेत्र के किसान ही केवल इस डीएपी 18-46-0 खाद का इस्तेमाल कर रहे हैं और अन्य क्षेत्रों में किसानों को इसके बारे में पता ही नहीं है, जिससे इसकी हिमांड भी कम है।
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जानकारी के अनुसार पंजाब और हरियाणा के अधिकतर किसान गेहूं की बिजाई करते समय इसी खाद का इस्तेमाल करते हैं। दोनों राज्यों में इसकी डिमांड अधिक होने के कारण आपूर्ति भी पूरी नहीं हो पाती है, लेकिन हिमाचल प्रदेश में इसकी डिमांड जानकारी न होने के कारण कम है।
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दोनों में ये है अंतर
डाई-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) खाद में नाइट्रोजन और फास्फोरस दोनों होते हैं, जो प्राथमिक मैक्रो-पोषक तत्व हैं। डीएपी में 18 फीसदी नाइट्रोजन और 46 फीसदी फॉस्फोरस होता है। वहीं, इफको की एनपीके 12-32-16 खाद में 12 फीसदी नाइट्रोजन, 32 फीसदी फास्फेट और 16 फीसदी पोटाक्स होता है।
जानकारी के अनुसार इस समय धान की कटाई और थ्रेसिंग का कार्य चला हुआ है। इसके बाद प्रदेशभर में गेहूं की बिजाई करने का कार्य शुरू हो जाएगा। बिजाई के समय ही खेतों में अच्छी पैदावार के लिए इफको की इस खाद का इस्तेमाल किया जाता है। यह खाद के इस्तेमाल से गेहूं को जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं, जिससे फसल अच्छी होती है।
- किसान गेहूं की बिजाई के समय डीएपी 18-46-0 खाद की बजाय आज भी एनपीके 12-32-16 खाद ही इस्तेमाल कर रहे हैं। जबकि डीएपी 18-46-0 खाद में नाइट्रोजन और अन्य तत्व ज्यादा मात्रा में हैं, जिससे फसल अच्छी होती है। डीएपी 18-46-0 खाद के दाम 12-32-16 के कम हैं और सब्सिडी भी ज्यादा है। जिले भर में 12-32-16 और डीएपी 18-46-0 खाद की सप्लाई जरूरत के हिसाब से पहुंचाई जा रही है, जिससे की समय पर किसानों को खाद के लिए परेशान न होना पड़े।
- प्रदीप कुमार, क्षेत्रीय प्रबंधक, हिमफेड जिला कांगड़ा