{"_id":"695ba42bc721f102c3065b2d","slug":"kisan-sabha-takes-out-rally-against-smart-electricity-meters-kangra-news-c-95-1-kng1004-214403-2026-01-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kangra News: स्मार्ट बिजली मीटर के विरोध में किसान सभा ने निकाली रैली","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kangra News: स्मार्ट बिजली मीटर के विरोध में किसान सभा ने निकाली रैली
Tue, 06 Jan 2026 05:13 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Tue, 06 Jan 2026 05:13 AM IST
विज्ञापन
दौलतपुर में स्मार्ट बिजली मीटर के विरोध में रैली निकालते किसान सभा के पदाधिकारी और अन्य। -स्र
धर्मशाला। स्मार्ट प्रीपेड बिजली मीटर लगाने के निर्णय के खिलाफ विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। सोमवार को हिमाचल किसान सभा की दौलतपुर इकाई ने क्षेत्र में रैली निकाल सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। रैली के पश्चात सभा के पदाधिकारियों ने सहायक अभियंता (विद्युत बोर्ड), रानीताल के माध्यम से मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन भी सौंपा।
किसान सभा के राज्य उपाध्यक्ष शौकिनी कपूर, जिला अध्यक्ष जगदीश जग्गी और दौलतपुर इकाई के अध्यक्ष राजकुमार ने केंद्र और राज्य सरकार पर तीखे प्रहार किए। नेताओं ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार वर्ष 2014 से ही बिजली क्षेत्र को निजी कंपनियों के हाथों में सौंपने की तैयारी कर रही है। इसके लिए 2014 से 2022 के बीच पांच बार बिजली संशोधन बिल लाने का प्रयास किया गया।
किसान सभा के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाना दरअसल बिजली बोर्ड के निजीकरण की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली वितरण के लिए निजी कंपनियों को लाइसेंस दिए जाएंगे। इससे बिजली जैसी मूलभूत सुविधा पर आम जनता का नियंत्रण खत्म हो जाएगा और कंपनियों की मनमानी बढ़ेगी। हिमाचल की वर्तमान कांग्रेस सरकार भी इस मामले में पीछे नहीं है और स्मार्ट मीटरों के लिए टेंडर आमंत्रित कर चुकी है। उन्होंने दुख जताया कि केंद्र और राज्य सरकारों की गलत आर्थिक नीतियों के कारण ही आज अधिकांश बिजली बोर्ड वित्तीय संकट से जूझ रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
किसान सभा के राज्य उपाध्यक्ष शौकिनी कपूर, जिला अध्यक्ष जगदीश जग्गी और दौलतपुर इकाई के अध्यक्ष राजकुमार ने केंद्र और राज्य सरकार पर तीखे प्रहार किए। नेताओं ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार वर्ष 2014 से ही बिजली क्षेत्र को निजी कंपनियों के हाथों में सौंपने की तैयारी कर रही है। इसके लिए 2014 से 2022 के बीच पांच बार बिजली संशोधन बिल लाने का प्रयास किया गया।
विज्ञापन
किसान सभा के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाना दरअसल बिजली बोर्ड के निजीकरण की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली वितरण के लिए निजी कंपनियों को लाइसेंस दिए जाएंगे। इससे बिजली जैसी मूलभूत सुविधा पर आम जनता का नियंत्रण खत्म हो जाएगा और कंपनियों की मनमानी बढ़ेगी। हिमाचल की वर्तमान कांग्रेस सरकार भी इस मामले में पीछे नहीं है और स्मार्ट मीटरों के लिए टेंडर आमंत्रित कर चुकी है। उन्होंने दुख जताया कि केंद्र और राज्य सरकारों की गलत आर्थिक नीतियों के कारण ही आज अधिकांश बिजली बोर्ड वित्तीय संकट से जूझ रहे हैं।
विज्ञापन