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Kangra News: टांडा के मातृ-शिशु अस्पताल में सुविधा के नाम पर मिल रही सजा

Mon, 16 Mar 2026 10:12 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 16 Mar 2026 10:12 AM IST
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In Tanda's Mother-Child Hospital, punishment is being meted out in the name of convenience.
टांडा में जीएस बाली मातृ ​शिशु अस्पताल। - फोटो : shiv tripathi
धर्मशाला। डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय मेडिकल कॉलेज टांडा का मातृ-शिशु अस्पताल वर्तमान में गर्भवती महिलाओं के लिए राहत कम और आफत ज्यादा साबित हो रहा है। करोड़ों की लागत से तैयार इस आलीशान भवन को एक ही छत के नीचे सभी सुविधाएं देने के दावे के साथ शुरू किया गया था, लेकिन प्रशासनिक ढिलाई के कारण आज यहां इलाज के नाम पर केवल औपचारिक ओपीडी चल रही है।
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जांच और टेस्ट के लिए महिलाओं को जिस तरह भटकना पड़ रहा है, वह किसी मानसिक और शारीरिक सजा से कम नहीं है। अस्पताल की नई इमारत में सुविधाएं ही नहीं है। इस कारण गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड और अन्य खून की जांच के लिए पुराने अस्पताल परिसर तक का लंबा सफर पैदल तय करना पड़ रहा है।
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जिस अवस्था में महिलाओं को आराम और तुरंत उपचार की आवश्यकता होती है, उस स्थिति में टांडा प्रशासन उन्हें एक भवन से दूसरे भवन के चक्कर कटवा रहा है। इससे गर्भवती महिलाओं के साथ-साथ तीमारदारों को भी परेशान हो रहे हैं। आश्चर्यजनक है कि भवन का निर्माण कार्य पूरा होने के बावजूद अस्पताल प्रबंधन रैंप और अन्य छोटे-मोटे कार्यों का बहाना बनाकर पूरी सेवाएं शुरू करने से पल्ला झाड़ रहा है।
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दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाली निर्धन महिलाओं को मजबूरन निजी केंद्रों पर महंगे टेस्ट करवाने पड़ रहे हैं, जिससे उन पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। प्रशासन की यह सुस्ती साफ दर्शाती है कि मरीजों की तकलीफ उनकी प्राथमिकताओं में शामिल नहीं है। लोगों का कहना है कि मातृ-शिशु अस्पताल के निर्माण से क्षेत्र की गर्भवती महिलाओं को बेहतर और त्वरित स्वास्थ्य सेवाएं मिलने की उम्मीद थी, लेकिन अस्पताल के पूरी तरह से शुरू न होने से यह उद्देश्य अभी तक पूरा नहीं हो पाया है।


फिलहाल अस्पताल में केवल ओपीडी ही संचालित की जा रही है। भवन में रैंप का निर्माण कार्य जारी है, जिसके पूरा होते ही अल्ट्रासाउंड और अन्य लैबोरेटरी सुविधाओं को यहीं शिफ्ट कर दिया जाएगा ताकि मरीजों को भटकना न पड़े। -डॉ. विवेक बनियाल, एमएस, टांडा अस्पताल
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