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एचआइवी संक्रमित जी सकता है लंबा स्वस्थ जीवन : डीसी
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धर्मशाला में विश्व एड्स जागरूका अभियान की बैठक की अध्यक्षता करते उपायुक्त डा. निपुण जिंदल।
- फोटो : Kangra
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धर्मशाला। जिलाधीश कांगड़ा डॉ. निपुण जिंदल की अध्यक्षता में उपायुक्त कार्यालय के सभागार में विश्व एड्स दिवस के उपलक्ष्य पर अंतर विभागीय जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर उन्होंने प्रतिभागियों से कहा कि आमदनी की असमानता, लैंगिक भेदभाव भी एचआईवी एड्स को प्रभावित करती हैं।
कलंक और भेदभाव इसे और भी भयावह समस्या बना देते हैं। एचआईवी संक्रमित व्यक्ति भी स्वस्थ लंबा जीवन जी सकता है। असमानता को दूर करना एचआईवी और कोविड-19 और भविष्य की महामारियों से लड़ने के लिए आवश्यक है। उन्होंने बताया कि एचआईवी केवल स्वास्थ्य का मुद्दा नहीं, बल्कि एक सामाजिक समस्या है। एक महीने तक चलने वाले इस एचआईवी एड्स अभियान में सभी विभाग अपने-अपने कार्यक्षेत्र में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करेंगे। इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. गुरदर्शन गुप्ता ने बताया कि राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम एचआईवी के साथ जी रहे लोगों के लिए सुविधाएं, उपचार और एचआईवी की रोकथाम के लिए प्रयासरत है।
इस अवसर पर चर्चा में जिला एड्स कार्यक्रम अधिकारी डॉ. राजेश सूद ने स्पष्ट किया कि अब एचआईवी संक्रमण में पहले से काफी कमी आई है पर यह कमी अभी भी 2030 तक एचआईवी उन्मूलन के लक्ष्य से काफी दूर है। हिमाचल प्रदेश में 4752 व्यक्ति एचआईवी के साथ जी रहे हैं जिसमें से जिला कांगड़ा के 1249 लोग हैं।
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कलंक और भेदभाव इसे और भी भयावह समस्या बना देते हैं। एचआईवी संक्रमित व्यक्ति भी स्वस्थ लंबा जीवन जी सकता है। असमानता को दूर करना एचआईवी और कोविड-19 और भविष्य की महामारियों से लड़ने के लिए आवश्यक है। उन्होंने बताया कि एचआईवी केवल स्वास्थ्य का मुद्दा नहीं, बल्कि एक सामाजिक समस्या है। एक महीने तक चलने वाले इस एचआईवी एड्स अभियान में सभी विभाग अपने-अपने कार्यक्षेत्र में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करेंगे। इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. गुरदर्शन गुप्ता ने बताया कि राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम एचआईवी के साथ जी रहे लोगों के लिए सुविधाएं, उपचार और एचआईवी की रोकथाम के लिए प्रयासरत है।
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इस अवसर पर चर्चा में जिला एड्स कार्यक्रम अधिकारी डॉ. राजेश सूद ने स्पष्ट किया कि अब एचआईवी संक्रमण में पहले से काफी कमी आई है पर यह कमी अभी भी 2030 तक एचआईवी उन्मूलन के लक्ष्य से काफी दूर है। हिमाचल प्रदेश में 4752 व्यक्ति एचआईवी के साथ जी रहे हैं जिसमें से जिला कांगड़ा के 1249 लोग हैं।
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