{"_id":"6934808feb1408e6e509e5d8","slug":"he-had-come-home-to-be-a-wedding-guest-but-the-accident-took-away-his-life-kangra-news-c-90-1-ssml1025-178436-2025-12-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kangra News: बराती बनने आए थे घर, हादसे ने छीन ली जिंदगी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kangra News: बराती बनने आए थे घर, हादसे ने छीन ली जिंदगी
Sun, 07 Dec 2025 12:44 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Sun, 07 Dec 2025 12:44 AM IST
विज्ञापन
कटौला (मंडी)। दरलोग संपर्क मार्ग पर हुए कार हादसे ने न केवल दो परिवारों से उनके लाडले छीने, बल्कि एक दोस्त की शादी की खुशियों को भी मातम में बदल दिया। सेना में कार्यरत दो जिगरी दोस्त नायक नितेश कुमार और नायक महेंद्र कुमार शुक्रवार रात अपने सैनिक दोस्त अमर की बरात में शामिल होने जा रहे थे, लेकिन दरलोग गांव से डेढ़ किलोमीटर पहले ही उनकी कार 600 मीटर गहरी खाई में जा गिरी।
रात करीब सवा आठ बजे हुए इस हादसे ने दोनों युवा जवानों को उनके परिवारों और दोस्तों से हमेशा के लिए दूर कर दिया। हादसे की खबर मिलते ही शादी समारोह के लिए निकले अन्य दोस्त मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों की मदद से शवों को क्षेत्रीय अस्पताल मंडी पहुंचाया। हादसे की खबर सुनते ही मृतकों के परिजन रात को ही क्षेत्रीय अस्पताल मंडी पहुंच गए।
रात भर इंतजार के बाद, शनिवार सुबह पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की गई। इसके बाद, सेना की एक टुकड़ी की रेख-रेख में दोनों जांबाजों के पार्थिव शरीर को उनके पैतृक घरों तक अंतिम संस्कार के लिए पहुंचाया गया।
विज्ञापन
बलिदानी पिता का बेटे थे नितेश, पीछे छोड़ गए छह माह का मासूम
नायक नितेश कुमार (32) को देश सेवा की भावना विरासत में मिली थी। उनके दादा शेर सिंह ने भावुक होते हुए बताया कि नितेश के पिता भी हिमाचल पुलिस में सेवारत थे। 1993 में उग्रवादियों के हमले में बलिदान हो गए थे। नितेश 2013 में सेना में भर्ती हुए थे। वह एक अच्छे खिलाड़ी भी थे। सेना की ओर से सोलन में आयोजित प्रतियोगिता में भाग लेने के बाद दोस्त की शादी के लिए घर आए थे। नितेश अपने पीछे अपनी माता, पत्नी, 6 माह का बेटा और तीन साल की बेटी को छोड़ गए हैं।
महेंद्र परीक्षा और दोस्त की शादी के लिए आए थे घर
नायक महेंद्र कुमार (32) भी 2013 में सेना में भर्ती हुए थे। उनके चाचा लालमन ने बताया कि महेंद्र भी देश सेवा की राह पर थे, क्योंकि उनके पिता भी भारतीय सेना में सेवारत थे। महेंद्र इन दिनों एमए की परीक्षा देने और दोस्त के शादी समारोह में शामिल होने के लिए करीब एक सप्ताह पहले ही घर आए थे। वह मध्यप्रदेश में सेवारत थे। महेंद्र भी अपने पीछे माता, छोटा भाई, पत्नी, आठ माह का बेटा और छह साल की बेटी को छोड़ गए हैं।
विज्ञापन
रात करीब सवा आठ बजे हुए इस हादसे ने दोनों युवा जवानों को उनके परिवारों और दोस्तों से हमेशा के लिए दूर कर दिया। हादसे की खबर मिलते ही शादी समारोह के लिए निकले अन्य दोस्त मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों की मदद से शवों को क्षेत्रीय अस्पताल मंडी पहुंचाया। हादसे की खबर सुनते ही मृतकों के परिजन रात को ही क्षेत्रीय अस्पताल मंडी पहुंच गए।
विज्ञापन
रात भर इंतजार के बाद, शनिवार सुबह पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की गई। इसके बाद, सेना की एक टुकड़ी की रेख-रेख में दोनों जांबाजों के पार्थिव शरीर को उनके पैतृक घरों तक अंतिम संस्कार के लिए पहुंचाया गया।
विज्ञापन
बलिदानी पिता का बेटे थे नितेश, पीछे छोड़ गए छह माह का मासूम
नायक नितेश कुमार (32) को देश सेवा की भावना विरासत में मिली थी। उनके दादा शेर सिंह ने भावुक होते हुए बताया कि नितेश के पिता भी हिमाचल पुलिस में सेवारत थे। 1993 में उग्रवादियों के हमले में बलिदान हो गए थे। नितेश 2013 में सेना में भर्ती हुए थे। वह एक अच्छे खिलाड़ी भी थे। सेना की ओर से सोलन में आयोजित प्रतियोगिता में भाग लेने के बाद दोस्त की शादी के लिए घर आए थे। नितेश अपने पीछे अपनी माता, पत्नी, 6 माह का बेटा और तीन साल की बेटी को छोड़ गए हैं।
महेंद्र परीक्षा और दोस्त की शादी के लिए आए थे घर
नायक महेंद्र कुमार (32) भी 2013 में सेना में भर्ती हुए थे। उनके चाचा लालमन ने बताया कि महेंद्र भी देश सेवा की राह पर थे, क्योंकि उनके पिता भी भारतीय सेना में सेवारत थे। महेंद्र इन दिनों एमए की परीक्षा देने और दोस्त के शादी समारोह में शामिल होने के लिए करीब एक सप्ताह पहले ही घर आए थे। वह मध्यप्रदेश में सेवारत थे। महेंद्र भी अपने पीछे माता, छोटा भाई, पत्नी, आठ माह का बेटा और छह साल की बेटी को छोड़ गए हैं।