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Kangra News: बागवानी फसलों की संरक्षित खेती का दिया प्रशिक्षण
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कृषि विवि में रक्षा कर्मियों को प्रमाण पत्र देते कुलपति डॉ एके पांडास्त्रोत विवि
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पालमपुर (कांगड़ा)। कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर में भारतीय रक्षा कर्मियों के लिए आयोजित पांचवां दीर्घावधि प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न हुआ। सब्जियों और बागवानी फसलों की संरक्षित खेती एवं मूल्य संवर्धन विषय पर आधारित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम नौ फरवरी से आयोजित किया जा रहा था। कार्यक्रम में भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना के कुल 38 रक्षा कर्मियों ने भाग लिया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन समारोह में विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अशोक कुमार पांडा ने प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए। इस अवसर पर अलहिलाल आर्मी स्टेशन से लेफ्टिनेंट कर्नल हरनीत सिंह बादशाह विशेष रूप से उपस्थित रहे। प्रशिक्षण में भारतीय सेना के 23, नौसेना के पांच और वायुसेना के 10 कर्मियों ने हिस्सा लिया।
कुलपति ने कहा कि संरक्षित खेती, मूल्य संवर्धन तकनीकों में स्वरोजगार बढ़ाने और कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने प्रतिभागियों से आग्रह किया कि प्रशिक्षण के दौरान अर्जित ज्ञान का उपयोग आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रसार और किसानों को जागरूक करने में करें।
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प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. विनोद शर्मा ने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम रक्षा कर्मियों को व्यावहारिक ज्ञान के साथ उद्यमिता कौशल भी प्रदान करते हैं। कृषि आधारित गतिविधियां भविष्य में स्वरोजगार का बेहतर माध्यम बन सकती हैं।
वहीं, लेफ्टिनेंट कर्नल हरनीत सिंह बादशाह ने विश्वविद्यालय की ओर से चलाए जा रहे प्रशिक्षण कार्यक्रमों की सराहना करते हुए कहा कि इससे रक्षा कर्मियों को नई तकनीकों की जानकारी मिल रही है। प्रशिक्षण प्रभारी डॉ. लव भूषण ने कार्यक्रम की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की। समारोह में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के अधिकारी और प्राध्यापक भी मौजूद रहे।
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प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन समारोह में विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अशोक कुमार पांडा ने प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए। इस अवसर पर अलहिलाल आर्मी स्टेशन से लेफ्टिनेंट कर्नल हरनीत सिंह बादशाह विशेष रूप से उपस्थित रहे। प्रशिक्षण में भारतीय सेना के 23, नौसेना के पांच और वायुसेना के 10 कर्मियों ने हिस्सा लिया।
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कुलपति ने कहा कि संरक्षित खेती, मूल्य संवर्धन तकनीकों में स्वरोजगार बढ़ाने और कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने प्रतिभागियों से आग्रह किया कि प्रशिक्षण के दौरान अर्जित ज्ञान का उपयोग आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रसार और किसानों को जागरूक करने में करें।
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प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. विनोद शर्मा ने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम रक्षा कर्मियों को व्यावहारिक ज्ञान के साथ उद्यमिता कौशल भी प्रदान करते हैं। कृषि आधारित गतिविधियां भविष्य में स्वरोजगार का बेहतर माध्यम बन सकती हैं।
वहीं, लेफ्टिनेंट कर्नल हरनीत सिंह बादशाह ने विश्वविद्यालय की ओर से चलाए जा रहे प्रशिक्षण कार्यक्रमों की सराहना करते हुए कहा कि इससे रक्षा कर्मियों को नई तकनीकों की जानकारी मिल रही है। प्रशिक्षण प्रभारी डॉ. लव भूषण ने कार्यक्रम की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की। समारोह में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के अधिकारी और प्राध्यापक भी मौजूद रहे।