{"_id":"6a30126ee429bb8d5505769e","slug":"farm-operations-stalled-due-to-the-ban-on-open-air-fuel-usage-kangra-news-c-95-1-kng1046-239704-2026-06-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kangra News: खुले में ईंधन पर लगी रोक से रुके खेतों के काम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kangra News: खुले में ईंधन पर लगी रोक से रुके खेतों के काम
विज्ञापन
जोगिंद्र सिंह (किसान)
पावर टिल्लर समेत अन्य कृषि उपकरण चलाना हुआ मुश्किल
किसान बोले, पेट्रोल पंपों पर उन्हें खुले में उपलब्ध करवाया जाए पेट्रोल-डीजल
संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मशाला। खुले में डीजल और पेट्रोल की बिक्री पर रोक का असर अब ग्रामीण क्षेत्रों में खेतीबाड़ी पर भी दिखने लगा है। कृषि कार्यों में इस्तेमाल होने वाले पावर टिल्लर, लकड़ी काटने वाली मशीनों समेत अन्य उपकरणों के लिए पर्याप्त ईंधन उपलब्ध न होने के कारण किसानों के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। इससे खेतों में चल रहे कई जरूरी कार्य प्रभावित होने लगे हैं।
किसानों का कहना है कि खेती के इस महत्वपूर्ण दौर में समय की विशेष अहमियत होती है। खेतों की तैयारी, जुताई और अन्य कृषि गतिविधियां निर्धारित समय के भीतर पूरी नहीं हुईं तो इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ सकता है। ईंधन की उपलब्धता में आ रही दिक्कत के कारण कई किसान अपने कृषि उपकरणों का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में लकड़ी कटान का कार्य भी प्रभावित हुआ है। कई लोग खेती और घरेलू जरूरतों के लिए मशीनों का इस्तेमाल करते हैं लेकिन डीजल-पेट्रोल नहीं मिलने से मशीनें खड़ी हो गई हैं। इससे रोजमर्रा के कार्यों की गति भी धीमी पड़ गई है।
किसानों का कहना है कि यदि जल्द कोई व्यावहारिक समाधान नहीं निकाला गया तो खेती के कई कार्य निर्धारित समय से पीछे हो सकते हैं। उनका मानना है कि कृषि कार्यों के लिए ईंधन उपलब्ध कराने की अलग व्यवस्था होनी चाहिए ताकि किसान बिना बाधा अपने जरूरी कार्य पूरे कर सकें।
विज्ञापन
यदि जल्द कोई व्यावहारिक समाधान नहीं निकाला गया तो खेतीबाड़ी के कई कार्य निर्धारित समय से पीछे हो सकते हैं। कृषि कार्यों के लिए ईंधन उपलब्ध करवाने की अलग व्यवस्था होनी चाहिए ताकि किसान बिना बाधा अपने जरूरी कार्य पूरे कर सकें। - जोगिंद्र सिंह, किसान, पास्सू
पहले समय में किसान पशुधन के माध्यम से ही खेती करते थे। अब आधुनिक उपकरणों के आने के बाद अधिकतर किसान इन उपकरणों पर निर्भर हैं लेकिन यदि इनको चलाने के लिए ईंधन ही नहीं मिलेगा तो खेती करने में परेशानी का सामना तो करना ही पड़ेगा। - विक्रम सिंह, किसान, कांगड़ा
किसान वर्ग के लिए अर्थव्यवस्था और परिवार के पालन-पोषण का सहारा खेती है। अब पॉवर टिल्लरों के माध्यम से ही खेती होती है। यदि इनको चलाने के लिए ही पेट्रोल-डीजल नहीं मिलेगा तो खेती भी नहीं होगी। सरकार को इसके लिए उचित कदम उठाने चाहिए। - प्रताप सिंह, ब्लॉक अध्यक्ष, हिमाचल प्रदेश किसान सभा धर्मशाला
इस विषय को लेकर मामला प्रदेश सरकार के समक्ष उठाया गया है। उम्मीद है कि सरकार की ओर से शीघ्र ही कोई उचित निर्णय लिया जाएगा। - पुरुषोत्तम सिंह, जिला खाद्य नियंत्रक, कांगड़ा
विज्ञापन
किसान बोले, पेट्रोल पंपों पर उन्हें खुले में उपलब्ध करवाया जाए पेट्रोल-डीजल
संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मशाला। खुले में डीजल और पेट्रोल की बिक्री पर रोक का असर अब ग्रामीण क्षेत्रों में खेतीबाड़ी पर भी दिखने लगा है। कृषि कार्यों में इस्तेमाल होने वाले पावर टिल्लर, लकड़ी काटने वाली मशीनों समेत अन्य उपकरणों के लिए पर्याप्त ईंधन उपलब्ध न होने के कारण किसानों के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। इससे खेतों में चल रहे कई जरूरी कार्य प्रभावित होने लगे हैं।
किसानों का कहना है कि खेती के इस महत्वपूर्ण दौर में समय की विशेष अहमियत होती है। खेतों की तैयारी, जुताई और अन्य कृषि गतिविधियां निर्धारित समय के भीतर पूरी नहीं हुईं तो इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ सकता है। ईंधन की उपलब्धता में आ रही दिक्कत के कारण कई किसान अपने कृषि उपकरणों का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में लकड़ी कटान का कार्य भी प्रभावित हुआ है। कई लोग खेती और घरेलू जरूरतों के लिए मशीनों का इस्तेमाल करते हैं लेकिन डीजल-पेट्रोल नहीं मिलने से मशीनें खड़ी हो गई हैं। इससे रोजमर्रा के कार्यों की गति भी धीमी पड़ गई है।
विज्ञापन
किसानों का कहना है कि यदि जल्द कोई व्यावहारिक समाधान नहीं निकाला गया तो खेती के कई कार्य निर्धारित समय से पीछे हो सकते हैं। उनका मानना है कि कृषि कार्यों के लिए ईंधन उपलब्ध कराने की अलग व्यवस्था होनी चाहिए ताकि किसान बिना बाधा अपने जरूरी कार्य पूरे कर सकें।
विज्ञापन
यदि जल्द कोई व्यावहारिक समाधान नहीं निकाला गया तो खेतीबाड़ी के कई कार्य निर्धारित समय से पीछे हो सकते हैं। कृषि कार्यों के लिए ईंधन उपलब्ध करवाने की अलग व्यवस्था होनी चाहिए ताकि किसान बिना बाधा अपने जरूरी कार्य पूरे कर सकें। - जोगिंद्र सिंह, किसान, पास्सू
पहले समय में किसान पशुधन के माध्यम से ही खेती करते थे। अब आधुनिक उपकरणों के आने के बाद अधिकतर किसान इन उपकरणों पर निर्भर हैं लेकिन यदि इनको चलाने के लिए ईंधन ही नहीं मिलेगा तो खेती करने में परेशानी का सामना तो करना ही पड़ेगा। - विक्रम सिंह, किसान, कांगड़ा
किसान वर्ग के लिए अर्थव्यवस्था और परिवार के पालन-पोषण का सहारा खेती है। अब पॉवर टिल्लरों के माध्यम से ही खेती होती है। यदि इनको चलाने के लिए ही पेट्रोल-डीजल नहीं मिलेगा तो खेती भी नहीं होगी। सरकार को इसके लिए उचित कदम उठाने चाहिए। - प्रताप सिंह, ब्लॉक अध्यक्ष, हिमाचल प्रदेश किसान सभा धर्मशाला
इस विषय को लेकर मामला प्रदेश सरकार के समक्ष उठाया गया है। उम्मीद है कि सरकार की ओर से शीघ्र ही कोई उचित निर्णय लिया जाएगा। - पुरुषोत्तम सिंह, जिला खाद्य नियंत्रक, कांगड़ा

जोगिंद्र सिंह (किसान)

जोगिंद्र सिंह (किसान)