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Kangra News: बिजली संशोधन विधेयक के खिलाफ गरजे कर्मचारी, आंदोलन की चेतावनी
Wed, 11 Mar 2026 07:54 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Wed, 11 Mar 2026 07:54 AM IST
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धर्मशाला में प्रदर्शन के दौरान संयुक्त एक्शन कमेटी के पदाधिकारी और सदस्य। -स्रोत : आयोजक
धर्मशाला। केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित बिजली (संशोधन) विधेयक 2025 और स्मार्ट मीटर के विरोध में सोमवार को धर्मशाला में बिजली कर्मचारियों, अभियंताओं और पेंशनरों ने प्रदर्शन किया। संयुक्त एक्शन कमेटी (जेएसी) के बैनर तले प्रदर्शनकारियों ने मुख्य अभियंता कार्यालय के बाहर एकत्रित होकर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
यह प्रदर्शन बिजली कर्मचारियों और अभियंताओं की राष्ट्रीय समन्वय समिति के देशव्यापी हड़ताल के आह्वान पर किया गया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि इस विधेयक से एक ही क्षेत्र में कई वितरण लाइसेंस देने और वायर व सप्लाई व्यवसाय को अलग करने जैसे प्रावधान किए जा रहे हैं, जो सीधे तौर पर बिजली क्षेत्र के निजीकरण का मार्ग प्रशस्त करेंगे।
कर्मचारी नेताओं ने कहा कि कॉस्ट-रिफ्लेक्टिव टैरिफ लागू होने से आम जनता पर बिजली बिलों का बोझ बढ़ेगा और हिमाचल जैसे कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले राज्य में सार्वजनिक विद्युत बोर्ड कमजोर होगा। जेएसी के संयोजक सूर्या जम्वाल ने कहा कि प्रस्तावित संशोधन न केवल उपभोक्ता विरोधी हैं, बल्कि इनसे कर्मचारियों की नौकरी की सुरक्षा और पेंशनरों की सामाजिक सुरक्षा पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
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कर्मचारियों ने बिजली संशोधन विधेयक को जनविरोधी, कर्मचारी विरोधी और राज्य विरोधी बताते हुए इसे तुरंत वापस लेने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार ने इस विधेयक को वापस नहीं लिया, तो देशभर के संगठन मिलकर आंदोलन को और उग्र करेंगे। इस अवसर पर सैकड़ों की संख्या में विभागीय पदाधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।
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यह प्रदर्शन बिजली कर्मचारियों और अभियंताओं की राष्ट्रीय समन्वय समिति के देशव्यापी हड़ताल के आह्वान पर किया गया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि इस विधेयक से एक ही क्षेत्र में कई वितरण लाइसेंस देने और वायर व सप्लाई व्यवसाय को अलग करने जैसे प्रावधान किए जा रहे हैं, जो सीधे तौर पर बिजली क्षेत्र के निजीकरण का मार्ग प्रशस्त करेंगे।
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कर्मचारी नेताओं ने कहा कि कॉस्ट-रिफ्लेक्टिव टैरिफ लागू होने से आम जनता पर बिजली बिलों का बोझ बढ़ेगा और हिमाचल जैसे कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले राज्य में सार्वजनिक विद्युत बोर्ड कमजोर होगा। जेएसी के संयोजक सूर्या जम्वाल ने कहा कि प्रस्तावित संशोधन न केवल उपभोक्ता विरोधी हैं, बल्कि इनसे कर्मचारियों की नौकरी की सुरक्षा और पेंशनरों की सामाजिक सुरक्षा पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
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कर्मचारियों ने बिजली संशोधन विधेयक को जनविरोधी, कर्मचारी विरोधी और राज्य विरोधी बताते हुए इसे तुरंत वापस लेने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार ने इस विधेयक को वापस नहीं लिया, तो देशभर के संगठन मिलकर आंदोलन को और उग्र करेंगे। इस अवसर पर सैकड़ों की संख्या में विभागीय पदाधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।