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Kangra News: न्यायिक आदेशों से नाराजगी मामला स्थानांतरण का आधार नहीं
Wed, 21 Oct 2026 03:45 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Wed, 21 Oct 2026 03:45 AM IST
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धर्मशाला। न्यायिक आदेशों से नाराजगी किसी मामले को दूसरी अदालत में स्थानांतरित करने का आधार नहीं हो सकती। सत्र न्यायाधीश धर्मशाला अमन सूद की अदालत ने एक निजी आपराधिक शिकायत को दूसरी अदालत में भेजने की मांग वाली याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की।
अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी पक्षकार के खिलाफ आदेश पारित होने का अर्थ संबंधित न्यायाधीश का पक्षपात नहीं है। असंतुष्ट पक्षकार कानून के तहत अपील या पुनरीक्षण का सहारा ले सकता है।
धर्मशाला के अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम की अदालत में लंबित निजी आपराधिक शिकायत को स्थानांतरित कराने के लिए वादी ने याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता ने संबंधित अदालत के 19 सितंबर 2026 के दो आदेशों पर असंतोष जताया था।
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पहले आदेश में जालंधर की पारिवारिक अदालत से वैवाहिक कार्यवाही का रिकॉर्ड तलब करने की अर्जी खारिज हुई थी। दूसरे आदेश में पूर्व शिकायत में दर्ज याचिकाकर्ता की मां के बयान को रिकॉर्ड पर लेने से इंकार किया गया था।
याचिकाकर्ता ने एक दीवानी मामले के आदेश और अदालत की कथित मौखिक टिप्पणी का भी हवाला दिया था, हालांकि अधिकारी पर व्यक्तिगत पक्षपात का आरोप नहीं लगाया था।
सत्र अदालत ने प्रदेश उच्च न्यायालय के फैसले का हवाला देकर कहा कि महज आशंका या प्रतिकूल आदेशों पर केस ट्रांसफर नहीं हो सकता। इसके लिए ठोस और उचित कारण जरूरी हैं। अदालत ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी करने या न्यायिक अधिकारी से रिपोर्ट मांगने का आधार नहीं पाया। अदालत ने याचिका खारिज कर लंबित शिकायत का निपटारा साक्ष्यों के आधार पर कानून सम्मत करने के निर्देश दिए।
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अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी पक्षकार के खिलाफ आदेश पारित होने का अर्थ संबंधित न्यायाधीश का पक्षपात नहीं है। असंतुष्ट पक्षकार कानून के तहत अपील या पुनरीक्षण का सहारा ले सकता है।
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धर्मशाला के अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम की अदालत में लंबित निजी आपराधिक शिकायत को स्थानांतरित कराने के लिए वादी ने याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता ने संबंधित अदालत के 19 सितंबर 2026 के दो आदेशों पर असंतोष जताया था।
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पहले आदेश में जालंधर की पारिवारिक अदालत से वैवाहिक कार्यवाही का रिकॉर्ड तलब करने की अर्जी खारिज हुई थी। दूसरे आदेश में पूर्व शिकायत में दर्ज याचिकाकर्ता की मां के बयान को रिकॉर्ड पर लेने से इंकार किया गया था।
याचिकाकर्ता ने एक दीवानी मामले के आदेश और अदालत की कथित मौखिक टिप्पणी का भी हवाला दिया था, हालांकि अधिकारी पर व्यक्तिगत पक्षपात का आरोप नहीं लगाया था।
सत्र अदालत ने प्रदेश उच्च न्यायालय के फैसले का हवाला देकर कहा कि महज आशंका या प्रतिकूल आदेशों पर केस ट्रांसफर नहीं हो सकता। इसके लिए ठोस और उचित कारण जरूरी हैं। अदालत ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी करने या न्यायिक अधिकारी से रिपोर्ट मांगने का आधार नहीं पाया। अदालत ने याचिका खारिज कर लंबित शिकायत का निपटारा साक्ष्यों के आधार पर कानून सम्मत करने के निर्देश दिए।