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Kangra News: नैनो उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा देने पर चर्चा
Tue, 08 Sep 2026 01:51 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Tue, 08 Sep 2026 01:51 AM IST
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पालमपुर (कांगड़ा)। फसलों की बेहतर पैदावार, लागत में कमी और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर में नैनो उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा देने पर मंथन किया गया। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों और प्रसार कार्यकर्ताओं से पारंपरिक खाद के स्थान पर नैनो उर्वरकों को अपनाने का आह्वान किया जिससे मिट्टी की सेहत सुधरने के साथ किसानों की आय में भी इजाफा हो सके।
कृषि विश्वविद्यालय में यह राज्य स्तरीय कार्यशाला भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर)-अटारी जोन लुधियाना, केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान (सीएसएसआरआई) करनाल और इफको हिमाचल प्रदेश के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गई। कार्यशाला का शुभारंभ सह निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. सोनिया सूद ने किया।
इफको शिमला के राज्य विपणन प्रबंधक डॉ. एसएस कटियार ने प्रदेश में टिकाऊ खेती के लिए नैनो उर्वरकों के प्रचार-प्रसार और किसानों द्वारा इनके प्रभावी उपयोग को लेकर चलाई जा रही योजनाओं व विपणन रणनीतियों की जानकारी दी।
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अनुसंधान और प्रसार शिक्षा की भूमिका पर जोर
कृषि विवि के अनुसंधान निदेशक डॉ. विनोद शर्मा ने कहा कि नवीन कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान और प्रमाण-आधारित जानकारी सबसे महत्वपूर्ण आधार है। वहीं, प्रसार निदेशक डॉ. जनार्दन सिंह ने प्रयोगशाला से खेत तक वैज्ञानिक तकनीकों को पहुंचाने में प्रसार शिक्षा की भूमिका को रेखांकित किया।
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कृषि विश्वविद्यालय में यह राज्य स्तरीय कार्यशाला भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर)-अटारी जोन लुधियाना, केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान (सीएसएसआरआई) करनाल और इफको हिमाचल प्रदेश के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गई। कार्यशाला का शुभारंभ सह निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. सोनिया सूद ने किया।
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इफको शिमला के राज्य विपणन प्रबंधक डॉ. एसएस कटियार ने प्रदेश में टिकाऊ खेती के लिए नैनो उर्वरकों के प्रचार-प्रसार और किसानों द्वारा इनके प्रभावी उपयोग को लेकर चलाई जा रही योजनाओं व विपणन रणनीतियों की जानकारी दी।
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अनुसंधान और प्रसार शिक्षा की भूमिका पर जोर
कृषि विवि के अनुसंधान निदेशक डॉ. विनोद शर्मा ने कहा कि नवीन कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान और प्रमाण-आधारित जानकारी सबसे महत्वपूर्ण आधार है। वहीं, प्रसार निदेशक डॉ. जनार्दन सिंह ने प्रयोगशाला से खेत तक वैज्ञानिक तकनीकों को पहुंचाने में प्रसार शिक्षा की भूमिका को रेखांकित किया।