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Kangra News: ट्रेन बहाली को लेकर 17 को नगरोटा सूरियां और 21 को रानीताल में प्रदर्शन

Thu, 12 Mar 2026 11:39 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 12 Mar 2026 11:39 PM IST
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Demonstrations for train restoration will be held on the 17th at Nagrota Surian and on the 21st at Ranital.
कांगड़ा घाटी रेल
देहरागोपीपुर (कांगड़ा)। पठानकोट-जोगिंद्रनगर रेलवे ट्रैक पर ट्रेनों की बहाली न होने से लोगों में रोष बढ़ता जा रहा है। अबक रेल बहाली की मांग को लेकर 17 मार्च को नगरोटा सूरियां और 21 मार्च को रानीताल में लोगों ने धरना-प्रदर्शन करने की तैयारी की है।
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स्थानीय लोगों ने बताया कि पठानकोट-जोगिंद्रनगर नैरोगेज रेल मार्ग, जो कभी इंजीनियरिंग का करिश्मा था, आज हुक्मरानों की बेरुखी और सुस्त पैरवी का जीवंत स्मारक बनकर रह गया है। साल 1927 में जिस ट्रैक को अंग्रेजों ने महज दो साल में बिछा दिया था, उसकी आज नेता और रेलवे प्रशासन चार साल में मरम्मत तक नहीं करवा सके।
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उन्होंने कहा कि यह रेल मार्ग उनके लिए केवल लोहे की पटरी नहीं बल्कि कांगड़ा जिले के 11 विधानसभा क्षेत्रों और जिला मंडी के जोगिंद्रनगर की भाग्यरेखा है। जुलाई 2022 में चक्की पुल क्या ढहा, इस पूरे क्षेत्र की किस्मत ही पटरी से उतर गई है। जहां गरीब मजदूर और छात्र मात्र 30-40 रुपये में सफर तय कर लेते थे, आज उन्हें बसों और टैक्सियों के लिए 400 से 500 रुपये कांगड़ा या पालमपुर तक पहुंचने के लिए लुटाने पड़ रहे हैं।
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कांगड़ा और मंडी जिलों को जोड़ने वाली इस लाइफलाइन के कट जाने से स्थानीय बाजार वीरान हो गए हैं। आने जाने और माल ढोने का किफायती जरिया खत्म होने से लागत बढ़ गई है। ढाबा संचालकों का कारोबार ठप होकर रह गया है। अब रेलवे अधिकारियों का दावा है कि अप्रैल के पहले पखवाड़े में यहां ट्रायल होगा।

सांसद अनुराग ठाकुर के प्रयासों से वर्ष 2022 की आपदा में टूटे चक्की पुल के निर्माण के लिए करोड़ों रुपये का बजट स्वीकृत हुआ और आज पुल बनकर तैयार है। क्षतिग्रस्त रेलवे ट्रैक की मरम्मत भी करोड़ों रुपये से हो चुकी है। रेलवे सुरक्षा आयुक्त का निरीक्षण भी हो चुका है। कुछ औपचारिकताएं शेष हैं, जिन्हें पूरा होते ही जल्द ट्रेन सेवाएं शुरू हो जाएंगी। - डॉ. सुकृत सागर, सदस्य, मंडल रेलवे समिति, डीआरयूसीसी
रोजाना पठानकोट या कांगड़ा जाने के लिए अपनी जेब से दस गुना ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ रहा है, जो सफर रेल में 30-40 रुपये में होता था, अब बसों में उसके 300 रुपये लगते हैं। लोगों की समस्या को ध्यान में रखते हुए रेल सेवा शीघ्र बहाली हो। - शिवेंद्र सैनी, सामाजिक कार्यकर्ता, गुलेर

रेल मार्ग बंद होने से कारोबार पूरी तरह पटरी से उतर गया है। पहले सामान मंगवाना सस्ता पड़ता था। अब ट्रकों और टैक्सियों का मनमाना किराया चुकाना पड़ता है। - सुशील कुमार, निवासी गुलेर

कांगड़ा घाटी रेल

कांगड़ा घाटी रेल

कांगड़ा घाटी रेल

कांगड़ा घाटी रेल

कांगड़ा घाटी रेल

कांगड़ा घाटी रेल

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