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हिमाचल प्रदेश: घर जमाई बनने से इन्कार पर टूटा रिश्ता, छह साल अलग रहने के बाद कोर्ट ने खत्म किया विवाह

Fri, 02 Oct 2026 10:16 AM IST
Ankesh Dogra संवाद न्यूज एजेंसी, धर्मशाला।
संवाद न्यूज एजेंसी, धर्मशाला। Published by: Ankesh Dogra Updated Fri, 02 Oct 2026 10:16 AM IST
सार

हिमाचल प्रदेश के देहरा परिवार न्यायालय ने एक दंपती के करीब छह साल से चले आ रहे अलगाव के बाद विवाह विच्छेद की डिक्री जारी की है। पति का आरोप था कि पत्नी उस पर मायके में घर जमाई बनकर रहने का दबाव डालती थी। इन्कार करने के बाद दोनों के बीच विवाद बढ़ गया और पत्नी जुलाई 2019 में पति का घर छोड़कर मायके चली गई। पति के कई प्रयासों के बावजूद वह वापस नहीं लौटी। अगस्त 2022 में एसडीएम के समक्ष भी पत्नी ने पति के साथ रहने से इन्कार किया। पत्नी के अदालत में पेश नहीं होने के बाद मामले की एकतरफा सुनवाई हुई। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर क्रूरता और परित्याग साबित मानते हुए तलाक मंजूर कर दिया।

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dehra family court divorce case wife left home six years cruelty desertion
कोर्ट का आदेश। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

घर जमाई बनकर मायके में रहने से पति के इन्कार से शुरू हुआ वैवाहिक विवाद आखिरकार तलाक तक पहुंच गया। करीब छह साल तक अलग रहने के बाद देहरा परिवार न्यायालय ने पति की तलाक याचिका मंजूर करते हुए विवाह विच्छेद की डिक्री जारी कर दी। यह मामला ज्वालामुखी उपमंडल क्षेत्र के एक दंपती से जुड़ा है। मामले की सुनवाई अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय देहरा सपना पांडेय ने की।

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2019 में पत्नी छोड़कर चली गई थी घर
पति ने अदालत में बताया कि उसका विवाह जनवरी 2015 में ज्वालामुखी स्थित एक मंदिर में हिंदू रीति-रिवाज से हुआ था। दंपती का एक बेटा भी है। पति का आरोप था कि पत्नी उस पर अपने मायके में घर जमाई बनकर रहने का दबाव डालती थी। जब उसने ऐसा करने से इन्कार किया तो पत्नी का उसके और उसके माता-पिता के प्रति व्यवहार खराब हो गया। याचिका के अनुसार, शिमला में नौकरी के दौरान भी पत्नी ने उसके माता-पिता के साथ दुर्व्यवहार किया और घरेलू जिम्मेदारियां निभाने से इन्कार किया। इसके बाद जुलाई 2019 में पत्नी पति का घर छोड़कर मायके चली गई। पति के अनुसार उसने पत्नी को वापस लाने के लिए व्यक्तिगत तौर पर और फोन के माध्यम से कई प्रयास किए, लेकिन पत्नी साथ रहने के लिए तैयार नहीं हुई।
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एसडीएम के सामने भी साथ रहने से किया इन्कार
मामला आगे बढ़ने पर पति ने ज्वालामुखी के एसडीएम के समक्ष तलाशी वारंट की प्रक्रिया शुरू की। अगस्त 2022 में पत्नी एसडीएम के सामने पेश हुई और उसने पति के साथ रहने में रुचि नहीं होने की बात कही। पति ने अदालत में यह भी कहा कि बाद में उसे पत्नी के किसी अन्य व्यक्ति के साथ रहने की जानकारी मिली। हालांकि अदालत के समक्ष मुख्य रूप से वैवाहिक संबंध से जुड़े विवाद, अलग रहने और साथ रहने से इन्कार के तथ्यों पर विचार किया गया।
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पत्नी अदालत में पेश नहीं हुई
तलाक याचिका पर सुनवाई के दौरान पत्नी अदालत में पेश नहीं हुई। इसके बाद 24 सितंबर 2024 को उसे एकतरफा कर दिया गया। पति की ओर से पेश की गई गवाही और दस्तावेजों का पत्नी की ओर से प्रतिवाद नहीं किया गया। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और रिकॉर्ड के आधार पर मामले की सुनवाई आगे बढ़ाई।

अदालत ने माना- क्रूरता और परित्याग साबित
अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करने के बाद माना कि मामले में क्रूरता और परित्याग के आधार साबित होते हैं। अदालत के अनुसार, दोनों के बीच वैवाहिक जीवन को दोबारा बहाल किए जाने की कोई वास्तविक संभावना नजर नहीं आती। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए देहरा परिवार न्यायालय ने पति की तलाक याचिका मंजूर कर ली और दोनों के विवाह को समाप्त करते हुए विवाह विच्छेद की डिक्री जारी कर दी। इस फैसले के साथ वर्ष 2019 से चले आ रहे वैवाहिक अलगाव का कानूनी रूप से अंत हो गया।
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