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बरसात ने पटियालकड़ और भुनेड़ में ध्वस्त किए तीन मकान
Updated Sat, 05 Aug 2017 12:12 AM IST
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नगरोटा बगवां (कांगड़ा)। विकास खंड नगरोटा बगवां की पटियालकड़ पंचायत में वीरवार को भारी बारिश से दो मकान ध्वस्त हो गए, जबकि बूहला हटवास में भी एक मकान गिरा है। नायब तहसीलदार संसार चंद ने बताया कि पटियालकड़ पंचायत के वार्ड नंबर-5 में भारी बारिश से कृष्ण चंद सुपुत्र प्रताप चंद का दो मंजिला स्लेटपोश रिहायशी मकान पूर्ण रूप से ध्वस्त हो गया, जबकि इसी वार्ड में विनोद कुमार सुपुत्र ज्ञान चंद का एक गैर रिहायशी पुराना मकान भी भारी बारिश की भेंट चढ़ा। उन्होंने स्वयं मौके पर पहुंचकर मौके का मुआयना कर रिहायशी मकान के मालिक कृष्ण कुमार को बतौर अग्रिम राहत 10 हजार रुपये की धनराशि दी है। वहीं, भुनेड़ पंचायत के बूहला हटवास में भी बलराज बबलू सपुत्र जैसी राम का दो कमरों का मकान भारी बारिश से ध्वस्त हो गया है। मौके का मुआयना करप्रभावित व्यक्ति को पांच हजार रुपये की अग्रिम राहत राशि प्रदान की गई है। उधर, प्रदेश भाजपा कार्यसमिति सदस्य अरुण मेहरा कुक्का ने भी पंचायतों का दौरा किया और प्रशासन से प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा देने की मांग उठाई है।
बाक्स
जाको राखे साइयां मार सके न कोए
पटियालकड़ पंचायत में वीरवार सायं जाको राखे साइयां मार सके न कोए की कहावत सार्थक हो गई। पंचायत के वार्ड नंबर- 5 में पड़ोस में बारिश से गिरे एक मकान की आवाज सुनकर कृष्ण कुमार का परिवार जैसे ही गिरे हुए मकान के समीप पहुंचा। इतने में उनका स्वयं का मकान भी पूर्ण रूप से ध्वस्त हो गया। यह कुदरत का करिश्मा ही था। यदि वह मकान के अंदर होते तो जानमाल का बड़ा हादसा हो सकता था। पंचायत प्रधान संजय कुमार ने बताया कि विनोद कुमार के मकान के गिरने की आवाज सुनकर कृष्ण कुमार के घर के लोग गिरे हुए मकान को देखने वहां न पहुंचे होते तो एक बड़ी घटना घटित हो जाती।
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जाको राखे साइयां मार सके न कोए
पटियालकड़ पंचायत में वीरवार सायं जाको राखे साइयां मार सके न कोए की कहावत सार्थक हो गई। पंचायत के वार्ड नंबर- 5 में पड़ोस में बारिश से गिरे एक मकान की आवाज सुनकर कृष्ण कुमार का परिवार जैसे ही गिरे हुए मकान के समीप पहुंचा। इतने में उनका स्वयं का मकान भी पूर्ण रूप से ध्वस्त हो गया। यह कुदरत का करिश्मा ही था। यदि वह मकान के अंदर होते तो जानमाल का बड़ा हादसा हो सकता था। पंचायत प्रधान संजय कुमार ने बताया कि विनोद कुमार के मकान के गिरने की आवाज सुनकर कृष्ण कुमार के घर के लोग गिरे हुए मकान को देखने वहां न पहुंचे होते तो एक बड़ी घटना घटित हो जाती।
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