{"_id":"5b4e324a4f1c1b44748b54f4","slug":"101531851338-kangra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"युवक की मौत को आयुर्वेदिक संस्थान पपरोला जिम्मेदार","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
युवक की मौत को आयुर्वेदिक संस्थान पपरोला जिम्मेदार
Updated Tue, 17 Jul 2018 11:45 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बैजनाथ (कांगड़ा)। जीप हादसे में मारे गए 25 वर्षीय युवक पंतेहड़ निवासी हंसराज की मौत के लिए परिजनों ने आयुर्वेदिक संस्थान पपरोला की कार्यप्रणाली को दोषी ठहराया है। परिजनों का कहना है कि घायल को तुरंत टांडा के लिए रेफर कर दिया जाता तो शायद उसकी जान बच सकती थी। उन्होंने विभाग से मामले की जांच करने को कहा है।
परिजन सतिंद्र कुमार ने कहा कि सोमवार रात सवा 12 बजे हुई दुर्घटना के तुरंत बाद हंसराज को पपरोला आयुर्वेदिक अस्पताल पहुंचा दिया गया था। लेकिन रात को अस्पताल में मात्र एक प्रशिक्षु चिकित्सक मौजूद थीं, जबकि ड्यूटी दे रहे चिकित्सक का मोबाइल फोन भी बंद था। उन्होंने बताया कि थोड़ी देर के बाद अस्पताल आए एमएस ने भी चिकित्सक को फोन किया। लेकिन तब भी उनका मोबाइल बंद मिला। परिजनों ने हंस राज को रेफर करने की गुहार लगाई, लेकिन एमएस का कहना था कि बिना एमएलसी से घायल को रेफर नहीं किया जा सकता। परिजनों ने बताया कि इस दौरान 108 एंबुलेंस को भी सूचित किया गया लेकिन उन्होंने एक घंटे के बाद आने की बात कही। एक घंटे बाद फोन करने पर भी व्यस्त होने की बात कही। करीब डेढ़ बजे संस्थान के पीजी के छात्र के आने पर हंस राज को मृत घोषित कर दिया गया। ऐसे में सवाल उठता है कि आपातकाल में क्या एमएलसी का होना आवश्यक है। वहीं इतने बड़े अस्पताल में चिकित्सक का न होना भी सरकार व विभाग की उदासीनता दर्शा रहा है।
कोट्स
वहीं, आयुर्वेदिक संस्थान पपरोला के प्रिंसिपल डा. वाईके शर्मा ने बताया कि हंसराज की गंभीर हालत को देखते हुए उसे रेफर किया जाना मुमकिन नहीं था। घटना के समय एमएस और रेजीडेंट डॉक्टर अस्पताल में थे और मरीज पर नजर रखे हुए थे। लेकिन कान पर गंभीर चोट होने पर उसे बचाया जा नहीं जा सका।
विज्ञापन
विज्ञापन
परिजन सतिंद्र कुमार ने कहा कि सोमवार रात सवा 12 बजे हुई दुर्घटना के तुरंत बाद हंसराज को पपरोला आयुर्वेदिक अस्पताल पहुंचा दिया गया था। लेकिन रात को अस्पताल में मात्र एक प्रशिक्षु चिकित्सक मौजूद थीं, जबकि ड्यूटी दे रहे चिकित्सक का मोबाइल फोन भी बंद था। उन्होंने बताया कि थोड़ी देर के बाद अस्पताल आए एमएस ने भी चिकित्सक को फोन किया। लेकिन तब भी उनका मोबाइल बंद मिला। परिजनों ने हंस राज को रेफर करने की गुहार लगाई, लेकिन एमएस का कहना था कि बिना एमएलसी से घायल को रेफर नहीं किया जा सकता। परिजनों ने बताया कि इस दौरान 108 एंबुलेंस को भी सूचित किया गया लेकिन उन्होंने एक घंटे के बाद आने की बात कही। एक घंटे बाद फोन करने पर भी व्यस्त होने की बात कही। करीब डेढ़ बजे संस्थान के पीजी के छात्र के आने पर हंस राज को मृत घोषित कर दिया गया। ऐसे में सवाल उठता है कि आपातकाल में क्या एमएलसी का होना आवश्यक है। वहीं इतने बड़े अस्पताल में चिकित्सक का न होना भी सरकार व विभाग की उदासीनता दर्शा रहा है।
विज्ञापन
कोट्स
वहीं, आयुर्वेदिक संस्थान पपरोला के प्रिंसिपल डा. वाईके शर्मा ने बताया कि हंसराज की गंभीर हालत को देखते हुए उसे रेफर किया जाना मुमकिन नहीं था। घटना के समय एमएस और रेजीडेंट डॉक्टर अस्पताल में थे और मरीज पर नजर रखे हुए थे। लेकिन कान पर गंभीर चोट होने पर उसे बचाया जा नहीं जा सका।
विज्ञापन