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दफ्तर में बैठे-बैठे मंजूरी देकर अधिकारियों ने लटकाए विकास कार्य
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धर्मशाला। नगर निगम धर्मशाला के जनरल हाउस की बैठक में पार्षदों ने आधे-अधूरे पड़े कामों के लिए अधिकारियों को निशाने पर लिया। पार्षदों ने आरोप लगाए कि अधिकारी बिना फील्ड में उतरे दफ्तरों में बैठे-बैठे ही विभिन्न विकास परियोजनाओं के लिए मंजूरी दे देते हैं।
इस कारण इन कार्यों की सही-सही डीपीआर तैयार नहीं हो पाती और न ही इन कार्यों के लिए पर्याप्त फंड्ज मिल पाते हैं।
ऐसे में राशि के अभाव में नगर निगम धर्मशाला में कई कार्य अधर में लटके पड़े हैं। इससे जहां लोगों को सुविधाओं से वंचित होना पड़ रहा है, वहीं नगर निगम के विकास पर भी बुरा असर पड़ रहा है। वार्ड नंबर 15 की पार्षद एवं पूर्व मेयर रजनी व्यास ने मामला उठाया कि उनके वार्ड में रास्ते के निर्माण के लिए कम से कम आठ लाख रुपये तक खर्च होने थे।
इसके लिए नगर निगम कार्यालय के अधिकारियों ने बिना मौके पर गए दफ्तर में बैठे-बैठे ही न केवल डीपीआर तैयार कर दी, बल्कि निर्माण कार्य के लिए डेढ़ लाख रुपये का टेंडर अवार्ड कर काम भी शुरू करवा दिया। उन्होंने कहा कि अधिकारियों की इस लापरवाही के कारण आज यह कार्य अधर में लटका पड़ा है। ठेकेदार से जब इस बारे में बात की गई तो उसने बताया कि इस राशि से तो महज पचास मीटर मार्ग ही बन पाएगा। इस कार्य को पूरा करने के लिए करीब साढ़े पांच लाख रुपये की और जरूरत पड़ेगी। इसके बाद डिप्टी मेयर सर्वचंद गलोटिया ने भी अधिकारियों की ऐसी लापरवाही की ओर ध्यान खींचते हुए कहा कि उनके वार्ड में भी एक डंगे का निर्माण कार्य किया जा रहा था। अफसरों ने बिना मौके का मुआयना किए ही कार्य शुरू करवा दिया। परिणाम यह हुआ कि निर्माण के दौरान इस डंगे का आधार ही बेढंगा सा बना दिया गया। अगर अधिकारी मौके पर जाकर ठेकेदार को काम के लिए सही से निर्देश देते, तो बेहद कम राशि में काम पूरा हो जाना था। अधिकारियों की इसी लापरवाही के कारण न तो काम गुणवत्तापूर्ण हुआ और न ही आज तक यह काम पूरा हो सका है। इसके बाद बैठक में मौजूद सभी पार्षदों ने एक स्वर में आयुक्त प्रदीप ठाकुर से अपील की कि किसी भी परियोजना को मंजूरी देने से पहले अधिकारी फील्ड में जाकर पूरा मुआयना करें, ताकि भविष्य में कोई भी परियोजना प्रभावित न हो।
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इस कारण इन कार्यों की सही-सही डीपीआर तैयार नहीं हो पाती और न ही इन कार्यों के लिए पर्याप्त फंड्ज मिल पाते हैं।
ऐसे में राशि के अभाव में नगर निगम धर्मशाला में कई कार्य अधर में लटके पड़े हैं। इससे जहां लोगों को सुविधाओं से वंचित होना पड़ रहा है, वहीं नगर निगम के विकास पर भी बुरा असर पड़ रहा है। वार्ड नंबर 15 की पार्षद एवं पूर्व मेयर रजनी व्यास ने मामला उठाया कि उनके वार्ड में रास्ते के निर्माण के लिए कम से कम आठ लाख रुपये तक खर्च होने थे।
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इसके लिए नगर निगम कार्यालय के अधिकारियों ने बिना मौके पर गए दफ्तर में बैठे-बैठे ही न केवल डीपीआर तैयार कर दी, बल्कि निर्माण कार्य के लिए डेढ़ लाख रुपये का टेंडर अवार्ड कर काम भी शुरू करवा दिया। उन्होंने कहा कि अधिकारियों की इस लापरवाही के कारण आज यह कार्य अधर में लटका पड़ा है। ठेकेदार से जब इस बारे में बात की गई तो उसने बताया कि इस राशि से तो महज पचास मीटर मार्ग ही बन पाएगा। इस कार्य को पूरा करने के लिए करीब साढ़े पांच लाख रुपये की और जरूरत पड़ेगी। इसके बाद डिप्टी मेयर सर्वचंद गलोटिया ने भी अधिकारियों की ऐसी लापरवाही की ओर ध्यान खींचते हुए कहा कि उनके वार्ड में भी एक डंगे का निर्माण कार्य किया जा रहा था। अफसरों ने बिना मौके का मुआयना किए ही कार्य शुरू करवा दिया। परिणाम यह हुआ कि निर्माण के दौरान इस डंगे का आधार ही बेढंगा सा बना दिया गया। अगर अधिकारी मौके पर जाकर ठेकेदार को काम के लिए सही से निर्देश देते, तो बेहद कम राशि में काम पूरा हो जाना था। अधिकारियों की इसी लापरवाही के कारण न तो काम गुणवत्तापूर्ण हुआ और न ही आज तक यह काम पूरा हो सका है। इसके बाद बैठक में मौजूद सभी पार्षदों ने एक स्वर में आयुक्त प्रदीप ठाकुर से अपील की कि किसी भी परियोजना को मंजूरी देने से पहले अधिकारी फील्ड में जाकर पूरा मुआयना करें, ताकि भविष्य में कोई भी परियोजना प्रभावित न हो।
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