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Kangra News: गेहूं की फसल में पीला रुतआ बीमारी से रहें सावधान
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पालमपुर (कांगड़ा)। जनवरी के प्रथम पखवाड़े में मौसम के अनुरूप होने वाले कृषि कार्यों को लेकर कृषि विवि पालमपुर के कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह जारी की है। कृषि वैज्ञानिकों की ओर से जारी सलाह के मुताबिक गेहूं की फसल में खरपतवारों पर 2-3 पत्तियां आ गई हों तो इस अवस्था में दोनों प्रकार के खरपतवार नियंत्रण के लिए वेस्टा (मेटसल्फयूरॉन मिथाइल 20 डव्ल्यूपी और क्लोडिनाफाॉप प्रोपार्जिल 15 डव्ल्यूपी) 16 ग्राम प्रति 30 लीटर पानी प्रति कनाल के हिसाब से खेतों में छिड़काव करें। केवल चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार नियंत्रण के लिए 2,4-डी की 50 ग्राम मात्रा को 30 लीटर पानी में घोल बनाकर एक कनाल में छिड़काव करें। छिड़काव के लिए फ्लैट फैन नोजल इस्तेमाल करें। गेहूं के साथ चौड़ी पत्ती वाली फसल की खेती की गई हो तो 2,4-डी का इस्तेमाल न करें। गेहूं की फसल में पीला रतुआ बीमारी आने के प्रति भी सचेत रहें। इस रोग में गेहूं के पत्तों पर पीले रंग के छोटे-2 दाने सीधे धारियों में प्रकट होते हैं। दूसरी ओर पत्तों में धारीदार पीलापन दिखाई देता है। मौसम ठंडा और नम रहे व थोड़ी वर्षा हो जाए तो यह रोग महामारी का रूप धारण कर सकता है। जहां पर किसानों ने पीबीडब्ल्यू-343, पीबीडब्ल्यू-520, पीबीडब्ल्यू-550, एचपीडब्ल्यू-184, एचपीडब्ल्यू-42, एचएस-240, एचएस-295, एचएस-420, यूपी-2338 या डब्ल्यूएच-711 किस्मों की बिजाई की है, ऐसे क्षेत्रों में किसानों को बीमारी के प्रति सतर्क रहने की आवश्यकता है। कृषि विवि पालमपुर के प्रसार निदेशक विनोद कुमार शर्मा ने कहा कि प्रदेश के मध्यवर्ती क्षेत्रों में आलू की बिजाई के लिए सुधरी किस्मों जैसे कुफरी ज्योति, कुफरी गिरीराज, कुफरी चंद्रमुखी व कुफरी हिमालिनी इत्यादि का चयन करें। बुआई से पहले कंदों को डाईथेन एम-45 (25 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी) के घोल में 20 मिनट तक उपचारित करें। प्रदेश के निचले व मध्यवर्ती पहाड़ी क्षेत्रों में प्याज की पौध की रोपाई 15-20 सेंटीमीटर पंक्तियों में तथा 5-7 सेंटीमीटर पौध से पौध की दूरी रखते हुए करें।
इसके अतिरिक्त खेतों में लगी हुई सभी प्रकार की सब्जियों जैसे फूलगोभी, बंदगोभी, गांठगोभी, ब्रॉकली, चाइनीज बदगोभी, पालक, मेथी, मटर व लहसुन इत्यादि में निराई-गुड़ाई कर जरूरत के मुताबिक यूरिया खेतों में दें।
इस तरह करें फसलों का संरक्षण
सरसों वर्गीय तिलहनी फसलों और गोभी वर्गीय सब्जियों में तेला या एफिड का प्रकोप होने पर मैलाथियॅान 50 ईसी मिलीलीटर का छिड़काव करें। अधिक प्रकोप होने पर 15 दिन के अंतराल पर फिर से छिड़काव करें। ध्यान रखें कि छिड़काव के बाद कम से कम एक सप्ताह तक सब्जियां न तोड़ें। जिन क्षेत्रों में भूमि में पाए जाने वाले कीटों जैसे कि सफेद सुंडी, कटुआ कीट व लाल चींटी इत्यादि का प्रकोप होता है वहां पर आलू की बीजाई से पहले क्लोरपाइरिफॉस 20 ईसी लीटर रसायन को 25 किलोग्राम रेत में मिलाकर प्रति हैक्टेयर क्षेत्र की दर से खेत में मिलाएं।
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इसके अतिरिक्त खेतों में लगी हुई सभी प्रकार की सब्जियों जैसे फूलगोभी, बंदगोभी, गांठगोभी, ब्रॉकली, चाइनीज बदगोभी, पालक, मेथी, मटर व लहसुन इत्यादि में निराई-गुड़ाई कर जरूरत के मुताबिक यूरिया खेतों में दें।
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इस तरह करें फसलों का संरक्षण
सरसों वर्गीय तिलहनी फसलों और गोभी वर्गीय सब्जियों में तेला या एफिड का प्रकोप होने पर मैलाथियॅान 50 ईसी मिलीलीटर का छिड़काव करें। अधिक प्रकोप होने पर 15 दिन के अंतराल पर फिर से छिड़काव करें। ध्यान रखें कि छिड़काव के बाद कम से कम एक सप्ताह तक सब्जियां न तोड़ें। जिन क्षेत्रों में भूमि में पाए जाने वाले कीटों जैसे कि सफेद सुंडी, कटुआ कीट व लाल चींटी इत्यादि का प्रकोप होता है वहां पर आलू की बीजाई से पहले क्लोरपाइरिफॉस 20 ईसी लीटर रसायन को 25 किलोग्राम रेत में मिलाकर प्रति हैक्टेयर क्षेत्र की दर से खेत में मिलाएं।
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