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Kangra News: देव आदेश पर काटी जौ की फसल
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सैंज के तुंग गांव में देव परंपरा का निर्वहन, जुलाई उत्सव मनाया
संवाद न्यूज एजेंसी
न्यूली (कुल्लू)। सैंज घाटी के तुंग गांव में देवता कशु नारायण के आदेश पर किसानों ने जौ की फसल काटी। इस फसल की पहली काशी (जौ के कुछ पौधे) देवता को समर्पित की। तुंग गांव में देवता कशु नारायण के आदेश के उपरांत जौ की फसल को काटा जाता है। इस बार भी कारकूनों और हारियानों ने देव आदेश का पालन किया। रविवार की शाम को लंबी शाड़ी नामक स्थान पर जौ की फसल की कटाई शुरू की। इस देव आदेश को निभाने की परंपरा को जुलाई उत्सव का नाम दिया गया है।
देवता कशु नारायण दोपहर बाद चार बजे तुंग गांव से कारकूनों और हारियानों के साथ लंबी शाड़ी नामक स्थान पर पहुंचे। शाम को देवता के आदेश पर बिजाई की गई जौ की फसल को काटा गया। इसके उपरांत फसल देवता को समर्पित की गई और वाद्य यंत्रों स्वर लहरियों के बीच देवता, कारकून और हारियान नाचते-गाते वापस तुंग पहुंचे।
तुंग गांव में जुलाई उत्सव धूमधाम से मनाया गया। इसमें देवता के साथ हारियानों ने नाटी डाली। हारियान आलम चंद पालसरा, लक्ष्मण सिंह, मोहर सिंह, ठाकुर दत्त ने कहा कि इस उत्सव में जौ की फसल को देवता के आदेश के बाद काटा जाता है। देवता हारियानों के साथ खेत में जाते हैं और हारियान अपनी फसल को सबसे पहले देवता को समर्पित करते हैं। कहा कि यह परंपरा सदियों से चली आ रही है, जिसका वर्तमान में भी निर्वहन किया जा रहा है। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
न्यूली (कुल्लू)। सैंज घाटी के तुंग गांव में देवता कशु नारायण के आदेश पर किसानों ने जौ की फसल काटी। इस फसल की पहली काशी (जौ के कुछ पौधे) देवता को समर्पित की। तुंग गांव में देवता कशु नारायण के आदेश के उपरांत जौ की फसल को काटा जाता है। इस बार भी कारकूनों और हारियानों ने देव आदेश का पालन किया। रविवार की शाम को लंबी शाड़ी नामक स्थान पर जौ की फसल की कटाई शुरू की। इस देव आदेश को निभाने की परंपरा को जुलाई उत्सव का नाम दिया गया है।
देवता कशु नारायण दोपहर बाद चार बजे तुंग गांव से कारकूनों और हारियानों के साथ लंबी शाड़ी नामक स्थान पर पहुंचे। शाम को देवता के आदेश पर बिजाई की गई जौ की फसल को काटा गया। इसके उपरांत फसल देवता को समर्पित की गई और वाद्य यंत्रों स्वर लहरियों के बीच देवता, कारकून और हारियान नाचते-गाते वापस तुंग पहुंचे।
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तुंग गांव में जुलाई उत्सव धूमधाम से मनाया गया। इसमें देवता के साथ हारियानों ने नाटी डाली। हारियान आलम चंद पालसरा, लक्ष्मण सिंह, मोहर सिंह, ठाकुर दत्त ने कहा कि इस उत्सव में जौ की फसल को देवता के आदेश के बाद काटा जाता है। देवता हारियानों के साथ खेत में जाते हैं और हारियान अपनी फसल को सबसे पहले देवता को समर्पित करते हैं। कहा कि यह परंपरा सदियों से चली आ रही है, जिसका वर्तमान में भी निर्वहन किया जा रहा है। संवाद
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