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Kangra News: दान-पुण्य के साथ कला…शौक से डॉ. शैली बनीं रेजिन आर्टिस्ट
Mon, 03 Nov 2025 05:45 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Mon, 03 Nov 2025 05:45 AM IST
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रेजिन आर्ट करतीं डॉ. शैली शारदा।
धर्मशाला। योल के एक निजी अस्पताल में महिला रोग विशेषज्ञ के रूप में कार्यरत डॉ. शैली शारदा अपने पेशेवर कर्तव्यों के साथ-साथ अब कला के माध्यम से भी लोगों के जीवन में रंग भर रही हैं। शौक के रूप में शुरू की गई रेजिन आर्ट आज उनके लिए आत्म-संतुष्टि, स्वावलंबन और समाजहित तीनों का माध्यम बन चुकी है।
अस्पताल में सेवाएं दे रहीं 49 वर्षीय डॉ. शारदा मरीजों के दर्द को कम करने के साथ-साथ यादों को भी सहेजने का अनूठा काम कर रही हैं। वह अपनी ड्यूटी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच प्रतिदिन एक घंटा रेजिन आर्ट को समर्पित करती हैं। वह बरमाला, राखी, फोटो, चाबी, कॉफी टेबल, डायनिंग टेबल आदि वस्तुओं को रेजिन क्राफ्ट के माध्यम से सुंदर और टिकाऊ रूप देकर संरक्षित कर रही हैं।
डॉ. शारदा ने बताया कि इस कला से वह प्रतिमाह 7 से 8 हजार रुपये तक की अतिरिक्त कमाई कर लेती हैं, लेकिन सबसे विशेष बात यह है कि इस आय का एक चौथाई हिस्सा वह दान-पुण्य में खर्च करती हैं। जिससे सामाजिक सेवा की भावना भी निरंतर जुड़ी रहती है। उन्होंने रेजिन आर्ट में तैयार वस्तुओं की कीमत 50 रुपये से लेकर 2 लाख रुपये तक है। छोटी वस्तुओं जैसे राखी व चाबी के लिए 50 से 200 रुपये तक, जबकि फोटो-फ्रेम, टेबल जैसी बड़ी वस्तुएं 3,000 रुपये से लेकर लाखों तक की श्रेणी में आती हैं।
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सोशल मीडिया से मिली प्रेरणा
दो वर्ष पूर्व सोशल मीडिया पर यह कला देखने के बाद उन्होंने ऑनलाइन प्रशिक्षण लिया और शौकिया तौर पर इसे शुरू किया। अब धीरे-धीरे लोग अपनी पुरानी व कीमती यादों को सुरक्षित रखने और संरक्षित स्वरूप में संजोने के लिए उनसे ऑर्डर करने लगे हैं। घर से होने वाले इस रचनात्मक कार्य ने जहां उन्हें संतोष दिया है, वहीं उनकी परोपकारी सोच ने उन्हें एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व का दर्जा भी दिलाया है।
क्या है रेजिन आर्ट?
रेजिन कला एक आधुनिक कला रूप है, जिसमें दो-भाग वाले एपॉक्सी रेजिन (एक रेजिन और एक हार्डनर) का उपयोग किया जाता है। यह मिश्रण कठोर होकर एक टिकाऊ, चमकदार और पारदर्शी सतह प्रदान करता है। कलाकार इस तरल रेजिन में रंगद्रव्य और अन्य योजक मिलाकर अमूर्त पैटर्न या त्रि-आयामी वस्तुएं बनाते हैं। इसे सांचों में या सतहों पर डाला जाता है। इस कला का उपयोग आभूषण, कोस्टर, मेज और तस्वीरों जैसी यादगार वस्तुओं को सुरक्षित रखने के लिए किया जाता है।
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अस्पताल में सेवाएं दे रहीं 49 वर्षीय डॉ. शारदा मरीजों के दर्द को कम करने के साथ-साथ यादों को भी सहेजने का अनूठा काम कर रही हैं। वह अपनी ड्यूटी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच प्रतिदिन एक घंटा रेजिन आर्ट को समर्पित करती हैं। वह बरमाला, राखी, फोटो, चाबी, कॉफी टेबल, डायनिंग टेबल आदि वस्तुओं को रेजिन क्राफ्ट के माध्यम से सुंदर और टिकाऊ रूप देकर संरक्षित कर रही हैं।
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डॉ. शारदा ने बताया कि इस कला से वह प्रतिमाह 7 से 8 हजार रुपये तक की अतिरिक्त कमाई कर लेती हैं, लेकिन सबसे विशेष बात यह है कि इस आय का एक चौथाई हिस्सा वह दान-पुण्य में खर्च करती हैं। जिससे सामाजिक सेवा की भावना भी निरंतर जुड़ी रहती है। उन्होंने रेजिन आर्ट में तैयार वस्तुओं की कीमत 50 रुपये से लेकर 2 लाख रुपये तक है। छोटी वस्तुओं जैसे राखी व चाबी के लिए 50 से 200 रुपये तक, जबकि फोटो-फ्रेम, टेबल जैसी बड़ी वस्तुएं 3,000 रुपये से लेकर लाखों तक की श्रेणी में आती हैं।
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सोशल मीडिया से मिली प्रेरणा
दो वर्ष पूर्व सोशल मीडिया पर यह कला देखने के बाद उन्होंने ऑनलाइन प्रशिक्षण लिया और शौकिया तौर पर इसे शुरू किया। अब धीरे-धीरे लोग अपनी पुरानी व कीमती यादों को सुरक्षित रखने और संरक्षित स्वरूप में संजोने के लिए उनसे ऑर्डर करने लगे हैं। घर से होने वाले इस रचनात्मक कार्य ने जहां उन्हें संतोष दिया है, वहीं उनकी परोपकारी सोच ने उन्हें एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व का दर्जा भी दिलाया है।
क्या है रेजिन आर्ट?
रेजिन कला एक आधुनिक कला रूप है, जिसमें दो-भाग वाले एपॉक्सी रेजिन (एक रेजिन और एक हार्डनर) का उपयोग किया जाता है। यह मिश्रण कठोर होकर एक टिकाऊ, चमकदार और पारदर्शी सतह प्रदान करता है। कलाकार इस तरल रेजिन में रंगद्रव्य और अन्य योजक मिलाकर अमूर्त पैटर्न या त्रि-आयामी वस्तुएं बनाते हैं। इसे सांचों में या सतहों पर डाला जाता है। इस कला का उपयोग आभूषण, कोस्टर, मेज और तस्वीरों जैसी यादगार वस्तुओं को सुरक्षित रखने के लिए किया जाता है।