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Kangra News: उम्र पूरी कर चुकी एंजियोग्राफी मशीन बार-बार छोड़ रही साथ
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धर्मशाला। डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल टांडा के सुपर स्पेशिएलिटी वार्ड में स्थापित एंजियोग्राफी मशीन की उम्र पूरी हो चुकी है। मशीन में बार-बार खराबी आने से हृदय रोगियों की जांच और उपचार प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। इसे ठीक करने के प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन पुरानी मशीन अब बार-बार जवाब दे रही है। इससे मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
टांडा मेडिकल कॉलेज में कांगड़ा के अलावा चंबा, हमीरपुर, ऊना, मंडी और आसपास के क्षेत्रों से मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। एंजियोग्राफी के माध्यम से हृदय की रक्त वाहिकाओं में रुकावट का पता लगाया जाता है। इसके आधार पर डॉक्टर आगे के उपचार का निर्णय लेते हैं। जरूरत पड़ने पर इसी प्रक्रिया के जरिये एंजियोप्लास्टी कर रक्त प्रवाह बहाल किया जाता है।
मेडिकल कॉलेज की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार कार्डियोलॉजी विभाग की ओपीडी में हर साल 40 हजार से अधिक मरीज पहुंचते हैं। यानी प्रतिदिन औसतन 110 से अधिक मरीज उपचार के लिए आते हैं। विभाग में हर साल सात हजार से अधिक इकोकार्डियोग्राफी जांच और एक हजार से अधिक एंजियोप्लास्टी भी की जाती हैं। ऐसे में मशीन की खराब स्थिति हृदय रोगियों के लिए चिंता का विषय है।
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मशीन की उम्र पूरी होने के बाद इसकी कार्यक्षमता और तकनीकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। मरीजों को बेहतर सुविधा देने के लिए नई या आधुनिक एंजियोग्राफी मशीन की आवश्यकता है। हालांकि, नई मशीन की खरीद और स्थापना को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
टांडा के कार्डियोलॉजी विभाग में एंजियोग्राफी मशीन की उम्र पूरी हो गई है, जिस कारण मशीन बार-बार खराब हो रही है। इसे ठीक करने का प्रयास किया जा रहा है। -डॉ. मिलाप शर्मा, प्रिंसिपल, मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, टांडा
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टांडा मेडिकल कॉलेज में कांगड़ा के अलावा चंबा, हमीरपुर, ऊना, मंडी और आसपास के क्षेत्रों से मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। एंजियोग्राफी के माध्यम से हृदय की रक्त वाहिकाओं में रुकावट का पता लगाया जाता है। इसके आधार पर डॉक्टर आगे के उपचार का निर्णय लेते हैं। जरूरत पड़ने पर इसी प्रक्रिया के जरिये एंजियोप्लास्टी कर रक्त प्रवाह बहाल किया जाता है।
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मेडिकल कॉलेज की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार कार्डियोलॉजी विभाग की ओपीडी में हर साल 40 हजार से अधिक मरीज पहुंचते हैं। यानी प्रतिदिन औसतन 110 से अधिक मरीज उपचार के लिए आते हैं। विभाग में हर साल सात हजार से अधिक इकोकार्डियोग्राफी जांच और एक हजार से अधिक एंजियोप्लास्टी भी की जाती हैं। ऐसे में मशीन की खराब स्थिति हृदय रोगियों के लिए चिंता का विषय है।
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मशीन की उम्र पूरी होने के बाद इसकी कार्यक्षमता और तकनीकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। मरीजों को बेहतर सुविधा देने के लिए नई या आधुनिक एंजियोग्राफी मशीन की आवश्यकता है। हालांकि, नई मशीन की खरीद और स्थापना को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
टांडा के कार्डियोलॉजी विभाग में एंजियोग्राफी मशीन की उम्र पूरी हो गई है, जिस कारण मशीन बार-बार खराब हो रही है। इसे ठीक करने का प्रयास किया जा रहा है। -डॉ. मिलाप शर्मा, प्रिंसिपल, मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, टांडा