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हिरासत में लिए जाएं आशापुरी मतदान केंद्र में तैनात सभी कर्मी

Sat, 19 Nov 2022 11:49 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sat, 19 Nov 2022 11:49 PM IST
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All the personnel posted in the polling station should be questioned, the truth will come out
चुनावों के दौरान ड्यूटी से लापता हुए कर्मचारी के परिजन जिलाधीश कार्यालय धर्मशाला ज्ञापन देने पह - फोटो : Kangra
धर्मशाला। जयसिंहपुर उपमंडल के तहत आशापुरी में मतदान ड्यूटी से लापता हुए संजीव कुमार की तलाश जल्द किए जाने की मांग को लेकर शनिवार को परिजन व ग्रामीण जिला मुख्यालय धर्मशाला पहुंचे। इस दौरान उन्होंने एडीएम को एक ज्ञापन भी सौंपा। साथ ही उन्होंने पुलिस छानबीन पर कई सवाल भी उठाए। इस दौरान संजीव की पत्नी को चक्कर आ गया, जिसे अन्य लोगों ने संभाला।
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रौंखर पंचायत प्रधान नीलम कुमारी के नेतृत्व में पहुंचे परिजनों व ग्रामीणों ने एडीएम कांगड़ा को ज्ञापन सौंपा। पंचायत प्रधान नीलम कुमारी, पूर्व प्रधान पृथ्वी सिंह, बीडीसी सदस्य विपिन कुमार, राजेश, सुभाष आदि ने एडीएम से सवाल उठाते हुए कहा कि आज आठ दिन हो गए हैं, लेकिन संजीव कुमार का सुराग न मिलने से परिजन ही नहीं, ग्रामीण भी परेशान हैं। युवा भी अपने स्तर पर संजीव की तलाश कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि संजीव कुमार के परिवार में माता दर्शना देवी, पत्नी बबिता के अलावा दो बेटियां हैं। परिवार में केवल संजीव ही कमाने वाला है। लोगों ने कहा कि अगर चुनाव ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों को हिरासत में लेकर सख्ती से पूछताछ की जाएगी, तो पूरा सच सामने आ जाएगा। वहीं एडीएम कांगड़ा रोहित राठौर ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि जो सवाल उन्होंने उठाए, उनके तहत जांच को लिखा जाएगा।
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लोगों ने ये उठाए सवाल
ग्रामीणों ने कहा कि 10 नवंबर को चुनाव ड्यूटी पर पहुंचने के बाद उसी रात और 11 नवंबर को ड्यूटी के बाद ऐसा क्या हुआ कि 11 नवंबर की रात को संजीव कुमार के बदले ड्यूटी पर दूसरा कर्मचारी बुलाना पड़ा। वहीं 11 नवंबर की रात को मतदान केंद्र में ऐसा क्या हुआ कि दो रजाइयां जल गईं। स्कूल के सारे सीसीटीवी कैमरे बंद थे। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर संजीव बीमार था तो उनको एंबुलेंस में अस्पताल भेजा जाना चाहिए था। वहीं अगर संजीव ने उस रात कुछ गलत काम किया तो उसको पुलिस के हवाले करना चाहिए था। उन्होंने सवाल उठाया कि संजीव के कपड़े मतदान केंद्र से एक किलोमीटर दूर कैसे पहुंच गए। वहीं संजीव के मोबाइल फोन की बैैटरी 40 फीसदी होने के बाद भी उसे बंद क्यों किया गया।
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