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Kangra News: आश्वासन के बाद अकिल बख्शी ने सातवें दिन खत्म की भूख हड़ताल
Fri, 09 Oct 2026 01:57 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Fri, 09 Oct 2026 01:57 AM IST
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नूरपुर अस्पताल के प्रागंण में एमसीएच के मुद्दे को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे अकिल बक्शी क
नूरपुर (कांगड़ा)। नूरपुर के बहुप्रतीक्षित मातृ-शिशु अस्पताल (एमसीएच) को शुरू करवाने की मांग के संबंध में रणजीत बख्शी जनकल्याण सभा के अध्यक्ष अकिल बख्शी की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल वीरवार को सातवें दिन समाप्त हो गई। प्रशासन से मिले आश्वासन के बाद उन्होंने अनशन खत्म किया लेकिन साफ कहा कि अस्पताल संचालन के लिए जब तक ठोस कदम नहीं उठते, संघर्ष जारी रहेगा।
प्रशासन ने नागरिक अस्पताल नूरपुर की रोगी कल्याण समिति (आरकेएस) में सभा को शामिल करने की सिफारिश का भरोसा दिया है। साथ ही, स्वास्थ्य निदेशालय और मुख्यमंत्री कार्यालय से ईमेल के जरिए लंबित कार्यों की सूची संबंधित विभागों को कार्रवाई के लिए भेजने की बात कही।
अकिल बख्शी ने कहा कि मातृ-शिशु अस्पताल के संचालन के लिए कई कार्य बाकी हैं। सिर्फ आश्वासनों से काम नहीं चलेगा। यदि प्रशासन ने तय समय पर जमीन पर काम नहीं दिखाया तो जनहित में आगे की रणनीति बनाई जाएगी।
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स्टाफ की नियुक्ति सबसे बड़ी अड़चन
मातृ-शिशु अस्पताल के संचालन में सबसे बड़ी बाधा स्टाफ की कमी है। भवन में बिजली, पानी और सीवरेज की व्यवस्था के अलावा स्त्री रोग विशेषज्ञ, शिशु रोग विशेषज्ञ, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ, नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती बेहद जरूरी है। स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल के लिए 41 पदों के सृजन का प्रस्ताव सरकार को भेजा है लेकिन मंजूरी न मिलने से मामला अभी अधर में है।
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प्रशासन ने नागरिक अस्पताल नूरपुर की रोगी कल्याण समिति (आरकेएस) में सभा को शामिल करने की सिफारिश का भरोसा दिया है। साथ ही, स्वास्थ्य निदेशालय और मुख्यमंत्री कार्यालय से ईमेल के जरिए लंबित कार्यों की सूची संबंधित विभागों को कार्रवाई के लिए भेजने की बात कही।
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अकिल बख्शी ने कहा कि मातृ-शिशु अस्पताल के संचालन के लिए कई कार्य बाकी हैं। सिर्फ आश्वासनों से काम नहीं चलेगा। यदि प्रशासन ने तय समय पर जमीन पर काम नहीं दिखाया तो जनहित में आगे की रणनीति बनाई जाएगी।
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स्टाफ की नियुक्ति सबसे बड़ी अड़चन
मातृ-शिशु अस्पताल के संचालन में सबसे बड़ी बाधा स्टाफ की कमी है। भवन में बिजली, पानी और सीवरेज की व्यवस्था के अलावा स्त्री रोग विशेषज्ञ, शिशु रोग विशेषज्ञ, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ, नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती बेहद जरूरी है। स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल के लिए 41 पदों के सृजन का प्रस्ताव सरकार को भेजा है लेकिन मंजूरी न मिलने से मामला अभी अधर में है।