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कीट को रोकने के लिए अपनाएं प्राकृतिक खेती के सिद्धांत : चंद्र
Wed, 23 Jul 2025 01:13 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Wed, 23 Jul 2025 01:13 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
जवाली (कांगड़ा)। मक्की की फसल में फॉल आर्मी वर्म के बढ़ते प्रकोप को लेकर कृषि मंत्री चंद्र कुमार की अध्यक्षता में जवाली में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। कृषि मंत्री की ओर से सुझाव दिया कि प्राकृतिक खेती के सिद्धांतों पर आधारित रोकथाम के उपायों को बढ़ावा दिया जाए, जिससे कीट नियंत्रण में कीटनाशकों की आवश्यकता कम हो सके।
वहीं, विभाग द्वारा यह स्पष्ट किया गया कि सघन और नियमित निगरानी ही संक्रमण की समय रहते पहचान और नियंत्रण की कुंजी है। चंद्र कुमार ने कहा कि वर्तमान में विकास खंड स्तर के कृषि अधिकारियों की फील्ड टीमें गांव स्तर पर सक्रिय निगरानी कर रही हैं।
इसके अतिरिक्त कृषि विभाग की राज्य जैव नियंत्रण प्रयोगशाला, पालमपुर के अधिकारी और कृषि वैज्ञानिकों की एक जिला स्तरीय टीम बनाई गई है, जो कि अत्यधिक प्रभावित क्षेत्रों में नियमित सर्वेक्षण और निगरानी कर रहे हैं। कृषि मंत्री ने किसानों से अपील की है कि वे फसलों की नियमित निगरानी करें और किसी भी कीट प्रकोप की सूचना तुरंत स्थानीय कृषि अधिकारियों को दें। विभाग की टीमें युद्ध स्तर पर कीट नियंत्रण के कार्य में जुटी हैं।
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प्रकोप की गंभीरता को देखते हुए विभाग में अनुशंसित रसायन कोरेजन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है, जिसे किसान ब्लॉक स्तर कृषि विभाग के कार्यालय से सब्सिडी दरों पर प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने कृषि अधिकारियों को आदेश दिए कि दूसरे राज्यों के कृषि विश्वविद्यालयों से भी इस कीट के नियंत्रण के लिए संपर्क करें और उनसे भी यह चर्चा की जाए कि उनके राज्य में इस कीट के नियंत्रण के लिए क्या प्रयास किए जा रहे हैं।
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जवाली (कांगड़ा)। मक्की की फसल में फॉल आर्मी वर्म के बढ़ते प्रकोप को लेकर कृषि मंत्री चंद्र कुमार की अध्यक्षता में जवाली में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। कृषि मंत्री की ओर से सुझाव दिया कि प्राकृतिक खेती के सिद्धांतों पर आधारित रोकथाम के उपायों को बढ़ावा दिया जाए, जिससे कीट नियंत्रण में कीटनाशकों की आवश्यकता कम हो सके।
वहीं, विभाग द्वारा यह स्पष्ट किया गया कि सघन और नियमित निगरानी ही संक्रमण की समय रहते पहचान और नियंत्रण की कुंजी है। चंद्र कुमार ने कहा कि वर्तमान में विकास खंड स्तर के कृषि अधिकारियों की फील्ड टीमें गांव स्तर पर सक्रिय निगरानी कर रही हैं।
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इसके अतिरिक्त कृषि विभाग की राज्य जैव नियंत्रण प्रयोगशाला, पालमपुर के अधिकारी और कृषि वैज्ञानिकों की एक जिला स्तरीय टीम बनाई गई है, जो कि अत्यधिक प्रभावित क्षेत्रों में नियमित सर्वेक्षण और निगरानी कर रहे हैं। कृषि मंत्री ने किसानों से अपील की है कि वे फसलों की नियमित निगरानी करें और किसी भी कीट प्रकोप की सूचना तुरंत स्थानीय कृषि अधिकारियों को दें। विभाग की टीमें युद्ध स्तर पर कीट नियंत्रण के कार्य में जुटी हैं।
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प्रकोप की गंभीरता को देखते हुए विभाग में अनुशंसित रसायन कोरेजन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है, जिसे किसान ब्लॉक स्तर कृषि विभाग के कार्यालय से सब्सिडी दरों पर प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने कृषि अधिकारियों को आदेश दिए कि दूसरे राज्यों के कृषि विश्वविद्यालयों से भी इस कीट के नियंत्रण के लिए संपर्क करें और उनसे भी यह चर्चा की जाए कि उनके राज्य में इस कीट के नियंत्रण के लिए क्या प्रयास किए जा रहे हैं।