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देहरा की एक हजार कनाल भूमि सीयू के नाम
Kangra
Updated Mon, 20 Oct 2014 05:32 AM IST
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देहरागोपीपुर (कांगड़ा)। प्रदेश के एकमात्र केंद्रीय विवि के स्थायी भवन की स्थापना के लिए चल रही सियासी खींचतान के कारण इसके खुलने को लेकर प्रश्नचिन्ह लग गया है। पिछले दिनों से लगातार केंद्रीय विवि को लेकर राजनीतिज्ञों के बयान से लगता है कि वोट बैंक के लिए शिक्षा क्षेत्र को भी राजनीतिक नफा नुकसान में तोला जा सकता है। राजस्व रिकार्ड देखें तो देहरा में वर्ष 2010 में ही करीब एक हजार कनाल भूमि केंद्रीय विवि के नाम स्थानांतरित हो चुकी है। पहले यह भूमि शामलात थी। बाद में इसे प्रदेश सरकार के नाम किया गया।
उसके बाद जब केंद्रीय विवि के देहरा में खुलने की घोषणा हुई तो इसे केंद्रीय विवि के नाम कर दिया गया। इस भूमि के लिए न तो वन विभाग और न ही पर्यावरण मंत्रालय से एनओसी की जरूरत है। संबंधित भूमि पर इंडियन फॉरेस्ट एक्ट 1929 और इंडियन फॉरेस्ट कंजरवेशन एक्ट 1980 भी लागू नहीं होता है। यह भूमि चरागाह है। इसी तरह प्रदेश सरकार की ओर से दूसरी दफा केंद्र को देहरा से करीब 2 हजार और धर्मशाला में भूमि की प्रपोजल भेजी गई थी। इसमें धर्मशाला की जमीन की प्रपोजल को रिजेक्ट कर दिया गया।
देहरा की दो हजार कनाल भूमि को केंद्र सरकार ने मंजूर कर लिया। इसके अलावा देहरा में करीब ढाई-तीन हजार कनाल भूमि और भी उपलब्ध है। यदि प्रदेश सरकार चाहे तो केंद्रीय विवि के लिए देहरा की सारी भूमि की प्रपोजल केंद्र को दोबारा भेज सकती है। इसके लिए नेताओं को वोट बैंक को छोड़कर जिला कांगड़ा के विकास के लिए दृढ़ इच्छा शक्ति दिखानी होगी और एकजुट होकर जिला कांगड़ा के देहरा में विवि के स्थायी भवन की पैरवी करनी होगी। केंद्रीय विवि की स्थापना के लिए करीब 5 हजार कनाल भूमि की आवश्यकता है। इस बारे में हिप्र कर्मचारी एवं कामगार बोर्ड के उपाध्यक्ष सुरेंद्र मनकोटिया ने कहा कि शीघ्र ही मुख्यमंत्री से मिलकर इस मसले को रखा जाएगा। उपमंडल देहरा विकास की दृष्टि से काफी पिछड़ चुका है। केंद्रीय विवि के खुलने से देहरा विकसित हो सकता है।
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उसके बाद जब केंद्रीय विवि के देहरा में खुलने की घोषणा हुई तो इसे केंद्रीय विवि के नाम कर दिया गया। इस भूमि के लिए न तो वन विभाग और न ही पर्यावरण मंत्रालय से एनओसी की जरूरत है। संबंधित भूमि पर इंडियन फॉरेस्ट एक्ट 1929 और इंडियन फॉरेस्ट कंजरवेशन एक्ट 1980 भी लागू नहीं होता है। यह भूमि चरागाह है। इसी तरह प्रदेश सरकार की ओर से दूसरी दफा केंद्र को देहरा से करीब 2 हजार और धर्मशाला में भूमि की प्रपोजल भेजी गई थी। इसमें धर्मशाला की जमीन की प्रपोजल को रिजेक्ट कर दिया गया।
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देहरा की दो हजार कनाल भूमि को केंद्र सरकार ने मंजूर कर लिया। इसके अलावा देहरा में करीब ढाई-तीन हजार कनाल भूमि और भी उपलब्ध है। यदि प्रदेश सरकार चाहे तो केंद्रीय विवि के लिए देहरा की सारी भूमि की प्रपोजल केंद्र को दोबारा भेज सकती है। इसके लिए नेताओं को वोट बैंक को छोड़कर जिला कांगड़ा के विकास के लिए दृढ़ इच्छा शक्ति दिखानी होगी और एकजुट होकर जिला कांगड़ा के देहरा में विवि के स्थायी भवन की पैरवी करनी होगी। केंद्रीय विवि की स्थापना के लिए करीब 5 हजार कनाल भूमि की आवश्यकता है। इस बारे में हिप्र कर्मचारी एवं कामगार बोर्ड के उपाध्यक्ष सुरेंद्र मनकोटिया ने कहा कि शीघ्र ही मुख्यमंत्री से मिलकर इस मसले को रखा जाएगा। उपमंडल देहरा विकास की दृष्टि से काफी पिछड़ चुका है। केंद्रीय विवि के खुलने से देहरा विकसित हो सकता है।
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