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कांगड़ा में सियासी घमासान
Kangra
Updated Tue, 20 Nov 2012 12:00 PM IST
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धर्मशाला। राजनीतिक उथल-पुथल के लिए सुर्खियों में रहने वाले कांगड़ा जिला में एक बार फिर सियासी घमासान शुरू हो गया है। सोमवार का दिन कांगड़ा में भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए झटके वाला रहा। एक ओर जहां भाजपा को चुनौती देते हुए दो राजनीतिक धुर विरोधी राकेश पठानिया और राजन सुशांत एक हो गए तो दूसरी तरफ चुनाव में भितरघात जैसे मामलों में कई वरिष्ठ कांग्रेसियों पर पीसीसी का चाबुक चल पड़ा।
राकेश पठानिया और राजन सुशांत की जुगलबंदी जाहिर तौर पर कांगड़ा में भाजपा की सेहत पर असर करेगी। चूंकि दोनों नेताओं को अपने स्तर पर जनाधार है। सबसे बड़ी बात यह है कि चुनाव नतीजे अगर इन दोनों के पक्ष में रहते हैं तो यह भाजपा के लिए बड़ी मुसीबत बन सकते हैं। वहीं, जिला में सोमवार को एक साथ नौ वरिष्ठ कांग्र्रेसियों पर कार्रवाई से हड़कंप मच गया है। इनमें से अधिकतर नेता पूर्व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ठाकुर कौल सिंह गुट से संबंधित हैं। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष वीरभद्र सिंह ने कार्रवाई करते हुए इन्हें पार्टी से छह साल के लिए निकाला है। निकाले गए नेताओं में पहला नाम गद़्दी समुदाय से संबंधित मनोज कुमार का है, जिन्हें सुधीर की टिकट काटकर थमा दी गई थी, लेकिन बाद में इस टिकट पर सुधीर शर्मा ने ही चुनाव लड़ा। धर्मशाला से ही कांग्रेस नेता बलदेव चौधरी और नवनीत ठाकुर पर भी यही कार्रवाई की गई है। वहीं, सुलह से पीसीसी डेलिगेट संजय राणा को वीरभद्र सिंह के करीबी कांग्रेस प्रत्याशी पूर्व विधायक जगजीवन से सियासी दुश्मनी महंगी पड़ी है। उन्हीं के समर्थक ब्लॉक अध्यक्ष प्रधान सिंह और कोषाध्यक्ष अमन सूद को भी पार्टी से निष्कासित किया गया है। यहां प्रदेश कांग्रेस सदस्य रत्न सिंह सहित किसान खेतीहर कांग्रेस के जिलाध्यक्ष लेख राज राणा और कांग्रेस सेवादल नेता राम परमार को भी भितरघात जैसे आरोपों के चलते छह साल के लिए बर्खास्त किया गया है। अब इन नेताओं की आगामी रणनीति क्या रहती है यह देखना रोचक होगा।
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राकेश पठानिया और राजन सुशांत की जुगलबंदी जाहिर तौर पर कांगड़ा में भाजपा की सेहत पर असर करेगी। चूंकि दोनों नेताओं को अपने स्तर पर जनाधार है। सबसे बड़ी बात यह है कि चुनाव नतीजे अगर इन दोनों के पक्ष में रहते हैं तो यह भाजपा के लिए बड़ी मुसीबत बन सकते हैं। वहीं, जिला में सोमवार को एक साथ नौ वरिष्ठ कांग्र्रेसियों पर कार्रवाई से हड़कंप मच गया है। इनमें से अधिकतर नेता पूर्व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ठाकुर कौल सिंह गुट से संबंधित हैं। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष वीरभद्र सिंह ने कार्रवाई करते हुए इन्हें पार्टी से छह साल के लिए निकाला है। निकाले गए नेताओं में पहला नाम गद़्दी समुदाय से संबंधित मनोज कुमार का है, जिन्हें सुधीर की टिकट काटकर थमा दी गई थी, लेकिन बाद में इस टिकट पर सुधीर शर्मा ने ही चुनाव लड़ा। धर्मशाला से ही कांग्रेस नेता बलदेव चौधरी और नवनीत ठाकुर पर भी यही कार्रवाई की गई है। वहीं, सुलह से पीसीसी डेलिगेट संजय राणा को वीरभद्र सिंह के करीबी कांग्रेस प्रत्याशी पूर्व विधायक जगजीवन से सियासी दुश्मनी महंगी पड़ी है। उन्हीं के समर्थक ब्लॉक अध्यक्ष प्रधान सिंह और कोषाध्यक्ष अमन सूद को भी पार्टी से निष्कासित किया गया है। यहां प्रदेश कांग्रेस सदस्य रत्न सिंह सहित किसान खेतीहर कांग्रेस के जिलाध्यक्ष लेख राज राणा और कांग्रेस सेवादल नेता राम परमार को भी भितरघात जैसे आरोपों के चलते छह साल के लिए बर्खास्त किया गया है। अब इन नेताओं की आगामी रणनीति क्या रहती है यह देखना रोचक होगा।
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