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भाई की समझदारी ने बचाई जान
Kangra
Updated Sat, 05 May 2012 12:00 PM IST
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डरोह (कांगड़ा)। डरोह के कस्बा गांव में छोटे भाई की सूझबूझ से बड़ी बहन की जान बच गई। अगर भाई बिजली के मेन स्विच को समय पर आफ न करता तो बड़ा हादसा हो सकता था। कस्बा निवासी शशि पाल शर्मा ने बताया कि उनकी बेटी मुस्कान नवमी कक्षा में और बेटा शाश्वत छठी कक्षा में पढ़ते हैं।
वह रोज की तरह स्कूल से शाम को वापस आए और भोजन खाकर पढ़ने बैठ गए। घर के अन्य लोग अपने-अपने काम में लगे हुए थे। मुस्कान ने छत के ऊपर रखी कपड़े धोने की मशीन में अपनी स्कूल की वर्दी धोने के लिए डाल दी तथा मशीन चालू कर दी। थोड़ी देर के बाद मशीन आफ हुई तो वह ज्यों ही कपड़े निकालने लगी तो मशीन में बिजली का करंट आ गया और वह मशीन के साथ चिपक गई। मुस्कान के चिल्लाने की आवाज सुनकर छोटा भाई छत पर गया तो उसने देखा कि उसकी बहन करंट की चपेट में थी। घर के अन्य सदस्य भी दौड़े, लेकिन किसी का दिमाग नहीं चल रहा था। ऐसे में शाश्वत एकदम नीचे बिजली के मीटर के पास गया और मेन स्विच आफ कर दिया। झटके से लड़की मशीन से छूट गई और सारा गांव उनकी चीख पुकार सुनकर एकत्रित हो गया। सभी शाश्वत की इस समझदारी को सराहने लगे। अध्यापक शशि पाल ने बताया कि अगर समय पर बेटे ने बिजली का मेन स्विच आफ न किया होता तो उनकी बेटी की जान नहीं बच सकती थी। बाद में वह मुस्कान को डरोह के एक निजी क्लिनिक में लेकर गए, जहां मौजूद डाक्टर ने लड़की की हालत को सही देखकर उसे घर ले जाने की सलाह दी।
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वह रोज की तरह स्कूल से शाम को वापस आए और भोजन खाकर पढ़ने बैठ गए। घर के अन्य लोग अपने-अपने काम में लगे हुए थे। मुस्कान ने छत के ऊपर रखी कपड़े धोने की मशीन में अपनी स्कूल की वर्दी धोने के लिए डाल दी तथा मशीन चालू कर दी। थोड़ी देर के बाद मशीन आफ हुई तो वह ज्यों ही कपड़े निकालने लगी तो मशीन में बिजली का करंट आ गया और वह मशीन के साथ चिपक गई। मुस्कान के चिल्लाने की आवाज सुनकर छोटा भाई छत पर गया तो उसने देखा कि उसकी बहन करंट की चपेट में थी। घर के अन्य सदस्य भी दौड़े, लेकिन किसी का दिमाग नहीं चल रहा था। ऐसे में शाश्वत एकदम नीचे बिजली के मीटर के पास गया और मेन स्विच आफ कर दिया। झटके से लड़की मशीन से छूट गई और सारा गांव उनकी चीख पुकार सुनकर एकत्रित हो गया। सभी शाश्वत की इस समझदारी को सराहने लगे। अध्यापक शशि पाल ने बताया कि अगर समय पर बेटे ने बिजली का मेन स्विच आफ न किया होता तो उनकी बेटी की जान नहीं बच सकती थी। बाद में वह मुस्कान को डरोह के एक निजी क्लिनिक में लेकर गए, जहां मौजूद डाक्टर ने लड़की की हालत को सही देखकर उसे घर ले जाने की सलाह दी।
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