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दो दशक से ज्वालामुखी पेयजल योजना भी नहीं बुझा पाई प्यास
Updated Wed, 01 Nov 2017 10:51 PM IST
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कपिल शर्मा
ज्वालामुखी (कांगड़ा)। वोट लेने के लिए नेता मतदाता के पास जाता है और उससे यह वायदा भी करता है कि उनकी समस्या को वह जल्द से जल्द दूर कर देगा और उन्हें सुविधा मिलेगी। लेकिन चुनाव जीतने के बाद नेताओं के दर्शन दुर्लभ हो जाते हैं, लेकिन इस बार 2017 के चुनाव में जनता अपनी चौखट पर आने वाले नेताओं से जवाब के साथ हिसाब लेने का भी मन बना चुकी है। यही बजह है कि नेताओं को इस बार मतदाता के पास जाकर पसीना बहाना पड़ रहा है।
बात करें ज्वालामुखी धार्मिक पर्यटक स्थल की तो पिछले दो दशक में कई सरकारें आई और कई चली गई, लेकिन चुनाव में जीतने वाले ज्वालामुखी से नेताओं ने आज दिन तक ज्वालामुखी में 24 घंटे पानी की सुविधा देेने के लिए जो भी प्रयास किए वह शायद नाकाफी ही रहे और जनता धार्मिक पर्यटक स्थल में मूलभूत सुविधा से वंचित ही रही। ज्वालामुखी पेयजल योजना तो वर्ष 1996 में बनी, लेकिन उस समय इस योजना का मकसद जो नेताओं ने जनता के लिए तय किया था कि 24 घंटे धार्मिक पर्यटक स्थल में पानी की सप्लाई की जाएगी। वह आज दिन तक पूरा नही हो पाया। जनता में अब चुनावी समय में चर्चा हो रही कि बीते वर्षों में ज्वालामुखी के नेताओं की झोली में आईपीएच मंत्रालय भी आया, लेकिन पानी की चिरलंबित समस्या का समाधान नहीं हो पाया और सरकार बदली और नए नेता भी आ गए, लेकिन वह भी पानी की समस्या का समाधान नहीं कर पाए और जनता गर्मी हो या सर्दी पानी के लिए त्राहि-त्राहि करती रही।
किसी भी नेता ने नही किया स्थायी समाधान: सूद
सीनियर सिटीजन चरण दास सूद ने कहा कि चाहे कोई भी राजनीतिक दल का नेता हो ज्वालामुखी शहर के लिए पानी की समस्या का समाधान नहीं पाया। उन्हें मलाल है कि विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल के लिए कोई ऐसी योजना नही बनाई गई जो कि यहां आने वाले पर्यटकों सहित स्थानीय लोगों को भी राहत दे सके।
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कोट्स
ज्वालामुखी से राजेंद्र कौशल ने कहा कि पानी की सप्लाई की कमी से रोजाना जूझ रही जनता को नेताओं से उम्मीद है कि वे ज्वालामुखी क्षेत्र के लिए पानी की कमी को दूर करने के लिए भरसक प्रयास करेंगे। दिनोंदिन यह समस्या बढ़ती जा रही है, जिसका जल्द समाधान होना चाहिए।
कोट्स
ज्वालामुखी क्षेत्र से रजिंद्र शर्मा ने कहा कि ज्वालामुखी में पानी की कमी सबसे बड़ी समस्या है गृहणियां भी पानी के कमी से परेशान रहती हैं। यह धार्मिक स्थल है यहां पर 24 घंटे पानी आना चाहिए।
कोट्स
भाजपा उम्मीदवार रमेश ध्वाला ने कहा कि उनके घोषणा पत्र में साफ तौर पर उठाऊ पेयजल योजना बनाने के लिए अभी से ही पूरी तैयारी हैं। चुनाव के बाद सबसे पहला यही कार्य करके इलाके की जनता को राहत दी जाएगी।
कोट्स
कांग्रेस उम्मीदवार संजय रतन ने कहा है कि ज्वालामुखी विधानसभा क्षेत्र के लिए वे पानी की करोड़ों की योजनाएं लेकर आए हैं, जिन पर कार्य चल रहा है। चुनाव के बाद जनता की पानी की समस्या का भी स्थायी समाधान करने में पहल की जाएगी। ज्वालामुखी की जनता को पानी के लिए भटकना नही पडे़गा। पेयजल योजनाओं के पूरा होते ही समस्या का निवारण हो जाएगा।
कोट्स
जिला परिषद विजेंद्र कुमार ने कि जो पहले किसी भी नेता ने नहीं किया वह अब होगा और उनका पूरा प्रयास रहेगा कि ज्वालामुखी की जनता को गांव-गांव में मूलभूत सुविधाएं मिलें और पीने का पानी भी पर्याप्त मिले।
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ज्वालामुखी (कांगड़ा)। वोट लेने के लिए नेता मतदाता के पास जाता है और उससे यह वायदा भी करता है कि उनकी समस्या को वह जल्द से जल्द दूर कर देगा और उन्हें सुविधा मिलेगी। लेकिन चुनाव जीतने के बाद नेताओं के दर्शन दुर्लभ हो जाते हैं, लेकिन इस बार 2017 के चुनाव में जनता अपनी चौखट पर आने वाले नेताओं से जवाब के साथ हिसाब लेने का भी मन बना चुकी है। यही बजह है कि नेताओं को इस बार मतदाता के पास जाकर पसीना बहाना पड़ रहा है।
बात करें ज्वालामुखी धार्मिक पर्यटक स्थल की तो पिछले दो दशक में कई सरकारें आई और कई चली गई, लेकिन चुनाव में जीतने वाले ज्वालामुखी से नेताओं ने आज दिन तक ज्वालामुखी में 24 घंटे पानी की सुविधा देेने के लिए जो भी प्रयास किए वह शायद नाकाफी ही रहे और जनता धार्मिक पर्यटक स्थल में मूलभूत सुविधा से वंचित ही रही। ज्वालामुखी पेयजल योजना तो वर्ष 1996 में बनी, लेकिन उस समय इस योजना का मकसद जो नेताओं ने जनता के लिए तय किया था कि 24 घंटे धार्मिक पर्यटक स्थल में पानी की सप्लाई की जाएगी। वह आज दिन तक पूरा नही हो पाया। जनता में अब चुनावी समय में चर्चा हो रही कि बीते वर्षों में ज्वालामुखी के नेताओं की झोली में आईपीएच मंत्रालय भी आया, लेकिन पानी की चिरलंबित समस्या का समाधान नहीं हो पाया और सरकार बदली और नए नेता भी आ गए, लेकिन वह भी पानी की समस्या का समाधान नहीं कर पाए और जनता गर्मी हो या सर्दी पानी के लिए त्राहि-त्राहि करती रही।
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किसी भी नेता ने नही किया स्थायी समाधान: सूद
सीनियर सिटीजन चरण दास सूद ने कहा कि चाहे कोई भी राजनीतिक दल का नेता हो ज्वालामुखी शहर के लिए पानी की समस्या का समाधान नहीं पाया। उन्हें मलाल है कि विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल के लिए कोई ऐसी योजना नही बनाई गई जो कि यहां आने वाले पर्यटकों सहित स्थानीय लोगों को भी राहत दे सके।
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ज्वालामुखी से राजेंद्र कौशल ने कहा कि पानी की सप्लाई की कमी से रोजाना जूझ रही जनता को नेताओं से उम्मीद है कि वे ज्वालामुखी क्षेत्र के लिए पानी की कमी को दूर करने के लिए भरसक प्रयास करेंगे। दिनोंदिन यह समस्या बढ़ती जा रही है, जिसका जल्द समाधान होना चाहिए।
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ज्वालामुखी क्षेत्र से रजिंद्र शर्मा ने कहा कि ज्वालामुखी में पानी की कमी सबसे बड़ी समस्या है गृहणियां भी पानी के कमी से परेशान रहती हैं। यह धार्मिक स्थल है यहां पर 24 घंटे पानी आना चाहिए।
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भाजपा उम्मीदवार रमेश ध्वाला ने कहा कि उनके घोषणा पत्र में साफ तौर पर उठाऊ पेयजल योजना बनाने के लिए अभी से ही पूरी तैयारी हैं। चुनाव के बाद सबसे पहला यही कार्य करके इलाके की जनता को राहत दी जाएगी।
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कांग्रेस उम्मीदवार संजय रतन ने कहा है कि ज्वालामुखी विधानसभा क्षेत्र के लिए वे पानी की करोड़ों की योजनाएं लेकर आए हैं, जिन पर कार्य चल रहा है। चुनाव के बाद जनता की पानी की समस्या का भी स्थायी समाधान करने में पहल की जाएगी। ज्वालामुखी की जनता को पानी के लिए भटकना नही पडे़गा। पेयजल योजनाओं के पूरा होते ही समस्या का निवारण हो जाएगा।
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जिला परिषद विजेंद्र कुमार ने कि जो पहले किसी भी नेता ने नहीं किया वह अब होगा और उनका पूरा प्रयास रहेगा कि ज्वालामुखी की जनता को गांव-गांव में मूलभूत सुविधाएं मिलें और पीने का पानी भी पर्याप्त मिले।